दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र में ‘पंडित’ शब्द पर बवाल, आचार्य कृष्णम बोले- ‘योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र में आए एक बहुविकल्पीय प्रश्न में ‘अवसरवादी’ शब्द के विकल्प के रूप में ‘पंडित’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर प्रदेश की सियासत की खलबली मच गई है। इस विवाद ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है और आध्यात्मिक गुरु और प्रखर वक्ता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है।

इसे भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश: अब मंत्रियों की मौजूदगी में सुनी जाएगी जनता की फरियाद, सात दिन में होंगी हल

विपक्ष पर लगाया साजिश का आरोप

इस पूरे मामले को साजिश बताते हुए आचार्य कृष्णम ने विपक्षी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि, यह मुख्यमंत्री की छवि को ब्राह्मण विरोधी बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, ताकि आगामी चुनावों में हिंदू समाज को जातियों में बांटकर सत्ता तक पहुंचा जा सके।

SI recruitment exam

पत्रकारों से बात करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दो टूक कहा कि, इस विवादित सवाल के पीछे राहुल गांधी और अखिलेश यादव सहित विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं का हाथ है। उन्होंने तर्क दिया कि, विपक्ष लंबे समय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ब्राह्मणों के दुश्मन के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है। अब परीक्षा में ऐसा सवाल पूछकर यह संदेश देने का प्रयास है कि, यह सब मुख्यमंत्री के इशारे पर हो रहा है, जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का एकमात्र एजेंडा हिंदुओं को जातियों में विभाजित करना है, ताकि वे इसका राजनीतिक लाभ उठा सकें। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने का एक गंदा षड्यंत्र बताया।

मामले की हो उच्चस्तरीय जांच

विवादित प्रश्न पर आगे बोलते हुए आचार्य ने शासन और प्रशासन के भीतर मौजूद कुछ संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की, कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, क्योंकि यह विश्वास करना कठिन है कि, बिना किसी प्रशासनिक मिलीभगत के इतना संवेदनशील और विवादित सवाल परीक्षा पत्र का हिस्सा बन गया।

आचार्य का मानना है कि शासन में बैठे कुछ अधिकारी विपक्ष के साथ मिलकर सरकार को अस्थिर करने और उसे हिंदू विरोधी दिखाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए न कर सके।

संभल की घटना का भी किया जिक्र

संभल के ताजा घटनाक्रम और जिला प्रशासन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी को लेकर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी राय स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और संभल के डीएम व एसपी को उच्च न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन करना चाहिए। संभल के सीओ कुलदीप कुमार के विवादित बयान का जिक्र करते हुए आचार्य ने नसीहत दी कि, अधिकारियों को अपनी मर्यादा और भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्दी में बैठे लोगों का काम किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कानून की रक्षा करना है। भाषा की गरिमा खोने वाले अधिकारी न केवल अपनी संस्था को बदनाम करते हैं बल्कि समाज में विद्वेष भी फैलाते हैं।

देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की स्थिति की सराहना करते हुए आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर अटूट विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि आज भारत पूरी दुनिया का मार्गदर्शन कर रहा है और वैश्विक पटल पर एक सशक्त शक्ति के रूप में उभरा है। भारत अब किसी विदेशी ताकत के सामने नहीं झुकता और न ही किसी से डरता है।

इसी संदर्भ में उन्होंने राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि, वे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और विदेशी ताकतों का नाम लेकर भारत में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। आचार्य ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता विदेशी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य भारत सरकार और प्रधानमंत्री को वैश्विक स्तर पर बदनाम करना है।

देश की छवि खराब करते हैं राहुल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी नेताओं की तुलना करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बेहद सख्त उपमाओं का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी एक विशाल बरगद के पेड़ की तरह हैं, जो अडिग हैं और सबको छाया दे रहे हैं, जबकि राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेता गमलों में उगे उन पौधों की तरह हैं जिनकी जड़ें बहुत कमजोर हैं।

उन्होंने देश में सिलेंडर की कमी जैसे मुद्दों को भी विपक्ष का प्रोपेगेंडा करार दिया और कहा कि राहुल गांधी प्रोपेगेंडा मंत्री की तरह व्यवहार कर रहे हैं। आचार्य के अनुसार, विपक्ष की नफरत मोदी से इतनी अधिक है कि वे इसके लिए देश की छवि खराब करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। कुल मिलाकर, आचार्य के इन बयानों ने यूपी की सियासत में ब्राह्मण कार्ड और प्रशासनिक साजिश की एक नई बहस छेड़ दी है।

 

इसे भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश के विकास व सुधार के लिए पं. गोविंद बल्लभ पंत ने अनेक कदम उठाए: सीएम योगी

Related Articles

Back to top button