
नई दिल्ली। संसद का वर्तमान सत्र लगातार हंगामे और ऐतिहासिक राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बन रहा है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के ठीक एक दिन बाद, जहां स्पीकर ओम बिरला ने सदन की मर्यादा को लेकर सख्त रुख अपनाया है, वहीं विपक्ष ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की अपनी मुहिम को तेज कर दिया है। इस बीच, निशिकांत दुबे के आरोपों और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के स्पष्टीकरण ने सदन के भीतर और बाहर बहस के नए आयाम खोल दिए हैं।
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सदन की गरिमा सर्वोपरि- बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की गरिमा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि, सदन का संचालन पूरी तरह से निर्धारित नियमों के आधार पर होता है। उन्होंने साफ शब्दों में स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य को नियमों के विरुद्ध जाकर आचरण करने की छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा, जब सदन में मर्यादाएं टूटती हैं, तो कठोर फैसले लेना मेरी विवशता बन जाती है।

विपक्ष द्वारा लगाए गए ‘नेता को बोलने से रोकने’ के आरोपों पर स्पीकर ने पलटवार करते हुए कहा कि चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी सदस्यों को नियमों के दायरे में रहकर बोलने का समान अवसर दिया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि, सदन कोई विशेषाधिकारों का अखाड़ा नहीं, बल्कि नियमों से चलने वाली संवैधानिक संस्था है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री या मंत्रियों को भी जनहित के किसी विशेष मुद्दे पर बात रखने के लिए स्पीकर से पूर्व अनुमति लेनी पड़ती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग
संसद में राजनीतिक हलचल उस समय और बढ़ गई जब विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी। तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) में व्यापक अनियमितताएं बरती गई हैं, जो आगामी विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस महाभियोग प्रस्ताव के लिए विपक्ष ने लोकसभा के 120 और राज्यसभा के 60 सदस्यों के हस्ताक्षर जुटा लिए हैं। यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार होगा जब किसी कार्यरत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू होगी। यह कदम केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और अधिक गंभीर स्तर पर ले जाने वाला है।
राहुल पर सनसनीखेज आरोप
सदन की कार्यवाही के दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक बेहद सनसनीखेज आरोप लगाकर सियासी पारा चढ़ा दिया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चलाए जा रहे प्रोपेगैंडा को जॉर्ज सोरोज जैसी विदेशी हस्तियों से फंडिंग मिल रही है। दुबे ने आरोप लगाया कि भारत जोड़ो यात्रा के लिए सोरोज ने 100 करोड़ रुपये का निवेश किया। भाजपा सांसद ने तर्क दिया कि राहुल गांधी देश की छवि खराब करने के लिए सोरोज के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले दिनों में और तीखा होने के स्पष्ट संकेत हैं।

दूसरी ओर, देश में रसोई गैस के संकट को लेकर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि घरेलू सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए भारत सरकार ने व्यापक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने खाड़ी देशों से 60 फीसदी एलपीजी का आयात किया है और एलपीजी की खरीद की प्रक्रिया को बदल दिया गया है। पुरी ने दावा किया, पिछले 5 दिनों में हमारी रिफाइनरियों ने एलपीजी के प्रोडक्शन में 28 फीसदी की वृद्धि की है, जिससे देश में घरेलू सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है।
वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई का मंच बना सदन
संसद का यह सत्र केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई का मंच बन चुका है। एक तरफ स्पीकर की नियमों पर सख्ती है, तो दूसरी तरफ विपक्ष का महाभियोग जैसा बड़ा कदम लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति गहराते अविश्वास को दर्शाता है। विदेशी फंडिंग के आरोप और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जैसे मुद्दों पर सरकार का बचाव यह दिखाता है कि सदन में आने वाले दिन और अधिक चुनौतीपूर्ण होंगे।
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