बजट सत्र के बीच गैरसैंण पहुंचे सीएम धामी ने भराड़ी देवी मंदिर में टेका माथा, लिया आशीर्वाद

गैरसैंण/उत्तराखंड। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) इन दिनों सियासी सरगर्मियों और विकास की चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। राज्य विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार सुबह भराड़ी देवी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं निरंतर प्रगति की कामना की। सीएम का यह दौरा जहां एक ओर धार्मिक आस्था को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर राज्य की नई राजधानी में विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

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एक्स पर साझा की तस्वीरें

गुरुवार सुबह विधानसभा सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ समय प्रकृति की गोद में बिताने का निर्णय लिया। वे गैरसैंण के रमणीय वातावरण में टहलने के लिए निकले और इसी दौरान उन्होंने भराड़ी देवी मंदिर जाकर माता का आशीर्वाद लिया।

CM Dhami,

मंदिर में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, आज सुबह भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में भराड़ी देवी मंदिर में दर्शन कर मां के श्रीचरणों में नमन किया और प्रदेश की देवतुल्य जनता के सुख-समृद्धि व उत्तराखंड की निरंतर प्रगति के लिए मां से प्रार्थना की।

सीएम धामी का यह कदम विधानसभा सत्र के दौरान एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने वाला माना जा रहा है। स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि उनके इस सादगी भरे अंदाज की सराहना कर रहे हैं। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र का गुरुवार को चौथा दिन है। सदन में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। कार्यसूची में कुल 12 प्रमुख सूचनाएं शामिल की गई हैं, जिन पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है।

रानीखेत को जिला बनाने की मांग उठी

सदन की कार्यवाही में आज रानीखेत को जिला बनाए जाने का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। भाजपा विधायक बंशीधर भगत द्वारा रखी गई इस मांग पर राजस्व मंत्री ने अपना पक्ष रखा और सरकार की भावी नीति स्पष्ट की। इसके साथ ही, जनपद हरिद्वार के भगवानपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विद्यालयों के उच्चीकरण और नए भवन निर्माण का मामला भी गूंजा। विधायक ममता राकेश के सवालों के जवाब में विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय स्थिति स्पष्ट करते हुए निर्माण कार्यों को गति देने का आश्वासन दिया।

इससे पहले, बुधवार को बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में बेहद तीखी और अर्थपूर्ण चर्चा देखने को मिली। करीब 11 घंटे 25 मिनट तक चली मैराथन कार्यवाही में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राज्यपाल के अभिभाषण पर विस्तृत मंथन हुआ। विपक्ष ने नियम 58 के तहत कार्यस्थगन की 5 सूचनाएं रखीं, जिसमें प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों को उठाया गया। बसपा विधायक शहजाद ने लोक महत्व का मुद्दा रखते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। सत्र के दौरान नियमों के दायरे में रहते हुए सदन ने 5 महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित किए, जो राज्य के भविष्य के लिए दूरगामी परिणाम लाने वाले हैं।

धामी ने खींचा उपलब्धियों का खाका

राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत खाका रखा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ (संकल्प से सिद्धि) के मंत्र के साथ काम कर रही है। सीएम धामी ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए वे हर संभव कदम उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा, हमारी सरकार केवल योजनाओं की घोषणा नहीं करती, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए भी प्रतिबद्ध है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन की समस्या और स्वरोजगार के क्षेत्रों में सरकार ने अभूतपूर्व कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं को भरोसा दिलाया कि सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और स्वरोजगार के अवसरों के सृजन पर विशेष ध्यान दे रही है। गैरसैंण में हो रहा यह सत्र राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने सत्र को एक नई दिशा दी है, जहां एक ओर विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं मुख्यमंत्री धामी अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ पूरी मजबूती से जवाब दे रहे हैं।

कई प्रस्तावों पर होनी है चर्चा

विशेषज्ञों का मानना है कि गैरसैंण में बजट सत्र आयोजित करना राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास के प्रति सरकार की गंभीरता का प्रमाण है। रानीखेत को जिला बनाने की मांग और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के मुद्दों ने यह साबित कर दिया है कि सदन में केवल राजनीति नहीं, बल्कि प्रदेश की मूलभूत समस्याओं के समाधान पर भी गहन मंथन हो रहा है।

आने वाले दिनों में बजट सत्र में कई और महत्वपूर्ण विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों पर चर्चा होनी है। मुख्यमंत्री धामी के तेवर और सरकार की कार्यशैली यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में उत्तराखंड को एक ‘मॉडल राज्य’ के रूप में स्थापित करने के लिए कड़े और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। फिलहाल, भराड़ीसैंण की फिजाओं में धार्मिक आस्था की गूंज और सदन के भीतर विकास के वादों की गूंज ने उत्तराखंड की राजनीति को एक नई ऊंचाई पर ला खड़ा किया है।

 

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