मिडिल ईस्ट में भीषण जंग का नौवां दिन… ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष तेज, तेल डिपो पर हमले से दहला तेहरान

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने खाड़ी देशों की चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है।

मिडिल ईस्ट में जारी ईरान और इजरायल का संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी की राह नजर नहीं आ रही है। यह भीषण जंग अब अपने नौवें दिन में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन शांति या युद्धविराम के कोई भी संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं। शनिवार की देर रात इस संघर्ष में उस वक्त बड़ा उछाल आया, जब इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान स्थित एक प्रमुख तेल डिपो पर जोरदार हमला किया। इस हमले ने न केवल ईरान की औद्योगिक कमर तोड़ने की कोशिश की है, बल्कि युद्ध की गंभीरता को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने खाड़ी देशों की चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है। एक टेलीविजन संबोधन में नेतन्याहू ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनका अंतिम लक्ष्य ईरानी शासन को पूरी तरह समाप्त करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इजरायल इस लड़ाई को अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान द्वारा लगातार अपने पड़ोसी खाड़ी देशों को मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है।

शनिवार रात तेहरान के तेल डिपो पर हुए हमले की पुष्टि खुद इजरायली सेना ने की है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और एसोसिएटेड प्रेस द्वारा जारी किए गए वीडियो फुटेज में रात के अंधेरे में तेहरान के आसमान में उठती आग की भीषण लपटें साफ देखी जा सकती हैं। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध में यह पहली बार है जब किसी नागरिक औद्योगिक सुविधा को इतने बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया है, जो इस बात का संकेत है कि अब युद्ध के दायरे में केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं रह गए हैं।

इस बीच, मानवीय क्षति के आंकड़े भी डराने वाले हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने जानकारी दी है कि अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में अब तक कम से कम 1,332 ईरानी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। इन मृतकों में बड़ी संख्या में महिलाएं और मासूम बच्चे शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, 180 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है और 20 से ज्यादा स्कूलों को भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों लोग घायल अवस्था में अस्पतालों में भर्ती हैं, जिससे ईरान में मानवीय संकट गहराता जा रहा है।

ईरान के भीतर भी राजनीतिक और सैन्य विचारधाराओं में टकराव की स्थिति बनी हुई है। एक ओर जहां ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने हाल ही में खाड़ी के पड़ोसी देशों पर हुए हमलों के लिए माफी मांगी थी, वहीं दूसरी ओर ईरान की मिसाइलें और ड्रोन लगातार उन देशों की सीमाओं को चुनौती दे रहे हैं। ईरान के कट्टरपंथी नेताओं ने साफ कर दिया है कि तेहरान अपनी युद्ध रणनीति में कोई बदलाव नहीं करेगा और वे किसी भी हाल में पीछे हटने वाले नहीं हैं। तेहरान की सरकारी मीडिया ने इन तमाम तबाही का सीधा आरोप अमेरिका और इजरायल पर मढ़ा है, जिससे आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका है।

Related Articles

Back to top button