
देहरादून। उत्तराखंड में होली का पर्व पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देशभर की तरह ही देवभूमि उत्तराखंड में भी रंगों, गीतों और नृत्यों की धूम छाई हुई है। इसी कड़ी में देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर एक भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोक कलाकारों के साथ जमकर थिरके। उन्होंने न केवल होली गीतों पर नाचते हुए मस्ती की, बल्कि ढोलक और चिमटा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र भी बजाए, जिससे पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा।
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हारुल नृत्य पर प्रस्तुति दी
यह कार्यक्रम उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन था। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों गढ़वाल, कुमाऊं, जौनसार-बावर और राठ क्षेत्र से आए लोक कलाकारों और होल्यारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक धुनों और नृत्यों से मुख्यमंत्री आवास के प्रांगण को रंग-बिरंगे उत्सव में बदल दिया। एक ओर जहां जौनसारी कलाकारों ने हारुल नृत्य की प्रस्तुति दी, वहीं दूसरी ओर कुमाऊंनी होल्यारों की टीमों ने अपनी मधुर धुनों में सबको झूमने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम में पौड़ी जिले के राठ क्षेत्र से आई सांस्कृतिक टोली ने भी खासा रंग जमाया। कलाकारों ने ‘आई डान्ड्यू बसंत, डाली मा मौल्यार…’ जैसे लोकप्रिय गीत गाए, जिससे पूरा वातावरण होली के रंगों और भावनाओं से सराबोर हो गया। इसी तरह कुमाऊं के कलाकारों ने ‘आओ दगड़ियो, नाचो गाओ, ए गे रंगीली होली…’ का आह्वान किया, जिस पर मौजूद सभी लोग लोक संस्कृति के रंग में रम गए। यह समागम उत्तराखंड की सांस्कृतिक विविधता और एकता का बेहतरीन उदाहरण था, जहां विभिन्न क्षेत्रों की परंपराएं एक साथ नजर आईं।
लोक कलाओं को मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस अवसर पर पूरी तरह से लोक कलाकारों के साथ शामिल हुए। वे खुद होली गीतों की लय पर थिरकते नजर आए और कलाकारों के साथ मिलकर ढोलक व चिमटा बजाते हुए मस्ती में डूब गए। उनकी इस सहभागिता से लोक कलाकार बेहद खुश दिखे। कलाकारों ने बताया कि मुख्यमंत्री धामी लोक संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उनके प्रयासों से न केवल लोक कलाओं को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि कलाकारों को भी उचित संरक्षण और सम्मान प्राप्त हो रहा है।
एक बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होली पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि होली का पावन पर्व हमें एक-दूसरे से प्रेम, स्नेह और भाईचारे के साथ मिल-जुलकर रहने का संदेश देता है। यह पर्व हमारे पूर्वजों की विरासत और सांस्कृतिक धरोहर को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम है। इसी कारण हम ऐसे आयोजनों को लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। सीएम धामी ने आगे कहा कि, प्रदेश भर में होली के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से हमारी पौराणिक सांस्कृतिक पहचान फिर से पटल पर छा रही है।
गाना गा कर बताई कठिनाइयां
सीएम धामी ने कहा, हमारी यह पहचान अक्षुण्ण रहे, इसके लिए हमारे नौजवान युवा सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इस होली मिलन समारोह में पैठाणी क्षेत्र से युवाओं का दल शामिल हुआ, जो देश के विभिन्न स्थानों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुका है। ये युवा पिछले वर्ष की तरह इस बार भी यहां पहुंचे और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने खासकर प्रदेश की बेटियों यानी मातृशक्ति की चुनौतियों का जिक्र किया।
ढोलक और हुड़के की थाप, मंजीरे की छनक और मधुर लोकगीतों के साथ होली का उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है। pic.twitter.com/PxMLRHHcy1
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) March 2, 2026
सीएम ने बताया कि, युवाओं ने गानों के माध्यम से उन अभावों और कठिनाइयों को पेश किया है, जिनका महिलाओं को लंबे समय से सामना करना पड़ रहा है। यह प्रयास न केवल जागरूकता फैलाता है, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। यह होली मिलन समारोह उत्तराखंड सरकार की सांस्कृतिक नीतियों का प्रतीक बना।
रिपोर्ट्स के अनुसार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य लोक परंपराओं को जीवंत रखने और युवा पीढ़ी को इनसे जोड़ने के लिए लगातार सक्रिय है। ऐसे आयोजन न केवल उत्सव का आनंद देते हैं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और भाईचारे को मजबूत करने का काम करते हैं। उत्तराखंड की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, संगीत, नृत्य और सामूहिक खुशी का उत्सव है। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित यह कार्यक्रम इसका जीता-जागता प्रमाण है। सीएम धामी ने लोक कलाकारों के साथ होली मनाई और सभी को होली की बधाई दी।
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