शेयर मार्केट में शुरुआती कारोबार में गिरावट के बाद तेजी, रुपया लुढ़का

शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 291.93 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,206.21 अंक पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी 74.6 अंक यानी 0.29 प्रतिशत टूटकर 25,379.75 अंक के स्तर पर आ गया।

मुंबई । शेयर बाजार में शुक्रवार का कारोबारी सत्र काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, जहां निवेशकों को शुरुआती घंटों में भारी बिकवाली और बाद में रिकवरी का सामना करना पड़ा। वैश्विक संकेतों और घरेलू परिस्थितियों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी चाल बदली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 291.93 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,206.21 अंक पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी 74.6 अंक यानी 0.29 प्रतिशत टूटकर 25,379.75 अंक के स्तर पर आ गया। हालांकि, यह गिरावट ज्यादा देर टिक नहीं सकी और बाजार ने बैंकिंग और पूंजीगत वस्तुओं के शेयरों में आई खरीदारी के दम पर शानदार वापसी की। रिकवरी के बाद सेंसेक्स 161.43 अंक चढ़कर 82,659.57 पर और निफ्टी 65.55 अंक की बढ़त के साथ 25,519.90 के स्तर पर कारोबार करने लगा, जिसने निवेशकों को कुछ राहत प्रदान की।

बाजार की इस तेजी में सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से कई दिग्गज शेयरों ने योगदान दिया। विशेष रूप से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एनटीपीसी, लार्सन एंड टुब्रो, और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई। इसके अलावा टाइटन, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, पावरग्रिड, सन फार्मास्यूटिकल्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर भी लाभ के साथ कारोबार कर रहे थे। बैंकिंग क्षेत्र में आई मजबूती ने बाजार को निचले स्तरों से उबारने में अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, आईटी और टेक सेक्टर के शेयरों पर दबाव बना रहा, जिसमें टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और भारती एयरटेल जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक और एशियन पेंट्स जैसे बड़े नाम भी शुरुआती कारोबार में सुस्त नजर आए, जिससे बाजार की बढ़त की रफ्तार कुछ हद तक सीमित रही।

वैश्विक मोर्चे पर नजर डालें तो एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्की 225 सूचकांक 1.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 0.67 प्रतिशत टूट गया। हालांकि, दक्षिण कोरिया के कॉस्पी सूचकांक ने करीब दो प्रतिशत की प्रभावशाली बढ़त दर्ज की। चीन के शेयर बाजार ‘चंद्र नव वर्ष’ की छुट्टियों के चलते बंद रहे, जिससे वहां से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र (बृहस्पतिवार) को गिरावट देखी गई थी, जिसका असर भारतीय बाजार की शुरुआती ओपनिंग पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया, जहां ब्रेंट क्रूड का भाव 0.33 प्रतिशत बढ़कर 71.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो उभरते बाजारों के लिए हमेशा एक चिंता का विषय रहता है।

घरेलू बाजार की तरलता और निवेश के आंकड़ों पर गौर करें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख नकारात्मक बना हुआ है। बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 880.49 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। चौंकाने वाली बात यह रही कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी इसी राह पर चलते हुए 596.28 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की। दोनों प्रमुख श्रेणियों के निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक फिलहाल सुरक्षित दांव लगाने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके कारण बाजार में स्थिरता की कमी नजर आ रही है।

रुपया शुरुआती कारोबार में 27 पैसे टूटकर 90.95 प्रति डॉलर पर

मुद्रा बाजार में भी शुक्रवार को भारी हलचल देखी गई और भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 27 पैसे टूटकर 90.95 के स्तर पर आ गया। रुपये की इस कमजोरी के पीछे मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह मानी जा रही हैं। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.94 पर खुला और जल्द ही 90.95 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि बुधवार को रुपया 90.68 पर बंद हुआ था और बृहस्पतिवार को ‘छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती’ के उपलक्ष्य में बाजार बंद थे। डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97.89 पर रहा। रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट ने आयातकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे आने वाले समय में महंगाई और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।

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