कोलंबो के मैदान पर बृहस्पतिवार को क्रिकेट जगत ने एक बार फिर उलटफेर का गवाह बना, जब जिम्बाब्वे ने अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराते हुए श्रीलंका को छह विकेट से करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही जिम्बाब्वे ने न केवल ग्रुप बी में अपनी बादशाहत कायम रखी, बल्कि एक भी मैच हारे बिना शीर्ष टीम के रूप में सुपर आठ में शान से प्रवेश किया। इससे पहले जिम्बाब्वे ने दिग्गज ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराकर सनसनी फैला दी थी, और अब मेजबान श्रीलंका के खिलाफ उनकी इस जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे इस विश्व कप में किसी भी बड़ी टीम को हराने का माद्दा रखते हैं। कोलंबो की पिच बल्लेबाजी के लिए आसान नहीं थी, लेकिन जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों ने सूझबूझ और आक्रामकता का सही संतुलन दिखाते हुए 179 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को 19.3 ओवर में चार विकेट खोकर हासिल कर लिया।
मैच की शुरुआत में श्रीलंका ने अपनी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश की, लेकिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम ने पावरप्ले से ही मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। सलामी बल्लेबाज ब्रायन बेनेट और ताडी मारूमानी ने टीम को विस्फोटक शुरुआत दिलाई और पहले छह ओवरों में बिना किसी नुकसान के 55 रन बोर्ड पर टांग दिए। इन दोनों बल्लेबाजों के बीच पहले विकेट के लिए 8.3 ओवर में 69 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई, जिसने जीत की ठोस नींव रखी। मारूमानी ने 26 गेंदों में 34 रनों की तेज पारी खेली, लेकिन अंततः दुनिथ वेलालागे ने उन्हें अपनी ही गेंद पर कैच आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया। इसके बाद आए रियान बर्ल ने भी 12 गेंदों में 23 रनों की कैमियो पारी खेलकर रन गति को बनाए रखा, हालांकि वे दासुन शनाका का शिकार बन गए।
मध्यक्रम में अनुभवी कप्तान सिकंदर रजा और ब्रायन बेनेट ने मोर्चे को संभाला और श्रीलंकाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़ दी। ब्रायन बेनेट ने मैदान के चारों ओर शॉट खेलते हुए 48 गेंदों में 63 रनों की बेहतरीन अर्धशतकीय पारी खेली। दूसरी ओर, कप्तान सिकंदर रजा ने अपने चिर-परिचित अंदाज में बल्लेबाजी की और महज 26 गेंदों में नाबाद 45 रन कूट दिए। रजा ने श्रीलंकाई आक्रमण के खिलाफ विशेष रूप से आक्रामकता दिखाई, जब उन्होंने 15वें ओवर में दिलशान मदुशंका को लगातार दो गगनचुंबी छक्के जड़े। इसके अगले ही ओवर में उन्होंने स्टार स्पिनर महीष तीक्षणा को भी एक छक्का और एक चौका लगाकर मैच पूरी तरह जिम्बाब्वे की झोली में डाल दिया। रजा की कप्तानी पारी ने यह सुनिश्चित किया कि टीम लक्ष्य के करीब पहुंचकर लड़खड़ाए नहीं।
अंतिम ओवरों का रोमांच तब चरम पर था जब जिम्बाब्वे को जीत के लिए केवल आठ रनों की दरकार थी। स्ट्राइक पर मौजूद टोनी मुनियोंगा ने दबाव को बखूबी झेला और अनुभवी स्पिनर महीष तीक्षणा की गेंद पर एक शानदार छक्का लगाकर मैच को खत्म कर दिया। इस छक्के के साथ ही जिम्बाब्वे के खेमे में जश्न का माहौल छा गया और डगआउट में मौजूद खिलाड़ी मैदान की ओर दौड़ पड़े। श्रीलंका की ओर से गेंदबाजी आक्रमण काफी फीका नजर आया और उनके प्रमुख गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहे। हालांकि दोनों टीमें पहले ही सुपर आठ के लिए क्वालीफाई कर चुकी थीं, लेकिन जिम्बाब्वे की इस जीत ने उनके आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, जबकि श्रीलंका के लिए अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने का समय है।
जिम्बाब्वे के इस प्रदर्शन ने क्रिकेट विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है। जिस टीम को टूर्नामेंट की शुरुआत में कमजोर माना जा रहा था, उसने लगातार दो विश्व विजेताओं ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को हराकर अपनी क्षमताओं का लोहा मनवाया है। तेज गेंदबाज मुजरबानी की धारदार गेंदबाजी और फिर बल्लेबाजों के सामूहिक प्रयास ने जिम्बाब्वे को ग्रुप की सबसे खतरनाक टीम बना दिया है। श्रीलंका के खिलाफ मिली इस जीत ने यह भी साबित किया कि जिम्बाब्वे की टीम अब केवल ‘उलटफेर’ करने वाली टीम नहीं रह गई है, बल्कि वे एक सुव्यवस्थित और संतुलित इकाई के रूप में खेल रहे हैं, जो खिताब की दौड़ में किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
सुपर आठ के मुकाबलों से पहले जिम्बाब्वे का यह अजेय अभियान अन्य टीमों के लिए चेतावनी की तरह है। ब्रायन बेनेट की निरंतरता और सिकंदर रजा का अनुभव टीम के लिए तुरुप का इक्का साबित हो रहा है। कोलंबो में मिली इस जीत के बाद अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या जिम्बाब्वे अपना यही फॉर्म सुपर आठ के कड़े मुकाबलों में भी जारी रख पाएगा। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह विश्व कप अब और भी रोमांचक हो गया है क्योंकि ‘अंडरडॉग’ कही जाने वाली टीमें अब फ्रंट सीट पर बैठकर खेल का रुख तय कर रही हैं।



