
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए इस बात का भरोसा दिलाया है कि, 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ही जीतेगी। उन्होंने कहा, विपक्ष को अपनी स्थिति समझ में आ चुकी है, तभी वे बौखलाए हुए हैं। आगामी चुनाव में भी डबल इंजन की सरकार धूम-धड़ाके के साथ तीसरी बार सत्ता में वापसी करेगी।
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गरमाई यूपी की राजनीति

आज 18 फरवरी को एक कार्यक्रम में बोलते हुए सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस या किसी अन्य किसी विपक्षी दल के लिए प्रदेश में कोई राजनीतिक अवसर नहीं बचा है। यहां सिर्फ बीजेपी ही जीतेगी। योगी का ये बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। सभी दल चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
अखिलेश पर कसा तंज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विपक्ष पर तीखा हमला बोलने के साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अब अपनी स्थिति को समझ चुके हैं, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। योगी ने कांग्रेस की स्थिति की तुलना बिहार में कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) गठबंधन कीहालिया दुर्गति से की। पिछले साल यानी 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। मुख्यमंत्री ने कहा, उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस और सपा की यही दुर्गति होने वाली है।
कांग्रेस पर कसा तंज
कार्यक्रम में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस को अंतिम दिनों में होने का तंज कसा। उन्होंने कहा, अर्थी को कंधा देने के लिए चार लोगों की जरूरत पड़ती है, लेकिन यूपी विधानसभा में कांग्रेस के वे चार लोग भी जीतकर नहीं आए। उन्होंने आगे कहा कि अगली बार सपा भी इसी हालत में पहुंच जाएगी। यह टिप्पणी विपक्ष की सीटों की कमी और उनकी घटती राजनीतिक प्रासंगिकता को उजागर करती है।
अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं में जाना चाहिए। उन्होंने तंज किया कि,आरएसएस की शाखाओं में जाने से अखिलेश को सुबह जल्दी उठने की आदत पड़ जाएगी, क्योंकि वे 12 बजे सोकर उठते हैं। यह बयान अखिलेश की जीवनशैली और अनुशासन पर कटाक्ष है, जो योगी अक्सर अपने संबोधनों में इस्तेमाल करते हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद का किया जिक्र
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने वंदेमातरम और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े हाल के विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, वंदेमातरम राष्ट्रगीत है, राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का अपमान राष्ट्रद्रोह है। उन्होंने अखिलेश को चुनौती दी कि, वे आरएसएस शाखाओं में जाएं, इससे उनका और उनकी पारिवारिक पार्टी का भला होगा। योगी ने इसे राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए विपक्ष की विचारधारा पर सवाल उठाया।
कांग्रेस अपने अंतिम दिन गिन रही है,
अर्थी को कंधा देने के लिए कम से कम चार लोगों की आवश्यकता पड़ती है, कांग्रेस के पास वह चार लोग भी जीत के नहीं आए हैं यूपी सदन में…
अगली बार समाजवादी पार्टी भी उधर ही जा रही है… pic.twitter.com/pLbQAWCudZ
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 17, 2026
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योगी ने इटावा में अखिलेश यादव द्वारा मंदिर निर्माण के दावों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, अच्छी बात है कि अखिलेश को सद्बुद्धि आ रही है। देर आए दुरुस्त आए, मैं उन्हें बधाई देता हूं, लेकिन यह आस्था नहीं, अवसरवाद है। उन्होंने आगे कहा कि अब अखिलेश श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए भी आगे आएं, तो लोग उनकी प्रशंसा करेंगे। योगी ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा, अविमुक्तेश्वरानंद का नाम जपते-जपते कल ये लोग गाजी की वकालत करने लगेंगे। यह टिप्पणी विपक्ष पर अवसरवादी होने और धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाती है।
बिहार चुनाव का दिया उदाहरण
कार्यक्रम में अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए योगी ने कहा, डबल इंजन की सरकार (केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार) ने उत्तर प्रदेश को विकास के नए आयाम दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2027 में बीजेपी की सरकार धूमधड़ाके से आएगी। सपा या किसी अन्य दल के लिए कोई स्कोप नहीं है।
योगी ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन की जो दुर्गति हुई, वैसी ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा की भी तय है। यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने बड़ी बहुमत से जीत हासिल की थी और योगी आदित्यनाथ लगातार विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हाल के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को कुछ नुकसान हुआ था, लेकिन योगी का यह दावा दिखाता है कि वे 2027 में और मजबूत वापसी की तैयारी में हैं।
राजनीतिक हलकों में हलचल
बता दें कि, सीएम योगी ने ये वक्तव्य ऐसे समय में दिया है, जब अखिलेश यादव PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के साथ विपक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि, योगी का ये हमला विपक्ष की एकजुटता को तोड़ने और उनके धार्मिक-राष्ट्रवादी एजेंडे पर सवाल उठाने का प्रयास है। योगी के इस संबोधन से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। वहीं विपक्ष भी तिलमिला गया है। योगी आदित्यनाथ का यह आक्रामक रुख 2027 के चुनावों की शुरुआती बिगुल समझा जा सकता है। उन्होंने न केवल अपनी सरकार की सफलता का दावा किया, बल्कि विपक्ष को पूरी तरह खारिज करने की कोशिश की।
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