
मुंबई। आज 17 फरवरी दिन मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा है, लेकिन पहली बार वे मुंबई में हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात में रक्षा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रणनीतिक साझेदारी और नए बड़े सौदों पर फोकस रहेगा। ख़ास कर राफेल, स्कॉर्पीन पनडुब्बियां, हैमर (HAMMER) मिसाइलों का संयुक्त निर्माण और हेलीकॉप्टर उत्पादन जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
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आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

माना जा रहा है कि फ़्रांस के राष्टपति की ये भारत यात्रा दोनों देशों के सबंधों को नई ऊंचाई तक ले जायेगी। इस यात्रा से आत्मनिर्भर भारत को मजबूती मिलगी। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन भी बढ़ेगा।
बता दें कि, मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों के साथ 16 फरवरी की रात मुंबई पहुंचे। यहां, एयरपोर्ट पर उनका स्वागत महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। मेक्रों के स्वागत में मुंबई में बैंड्रा-वरली सी लिंक को फ्रेंच तिरंगे के रंगों में सजाया गया है, जो दोनों देशों की मजबूत साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है।
19 फरवरी तक रहेंगे भारत में
प्रधानमंत्री मोदी ने उनके स्वागत में एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है। उन्होंने लिखा है ‘भारत आपका स्वागत करता है! हम अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई गति देना चाहते हैं। जल्द ही मुंबई और फिर दिल्ली में मिलेंगे, मेरे प्रिय मित्र।’ मैक्रों ने भी यात्रा से पहले एक पोस्ट की थी। उन्होंने लिखा था, ‘वे व्यापार, अर्थव्यवस्था, उद्योग, संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र के नेताओं के साथ आए हैं ताकि सहयोग और गहरा हो। मेक्रों की ये यात्रा 17 से 19 फरवरी तक चलेगी।
आज मुंबई में मोदी-मैक्रों की द्विपक्षीय बैठक होगी, जहां लोक भवन में MoUs पर हस्ताक्षर और प्रेस स्टेटमेंट होगा। शाम को दोनों नेता इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का उद्घाटन करेंगे और बिजनेस लीडर्स, स्टार्टअप्स तथा इनोवेटर्स से संबोधित करेंगे। इसके बाद मैक्रों दिल्ली जाएंगे, जहां वे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेंगे।
नई तकनीकी विकसित करेंगे
एआई (Artificial intelligence) दोनों देशों की प्राथमिकता लिस्ट में है। मुंबई में AI इम्पैक्ट फोरम और दिल्ली में समिट के जरिए भारत और फ्रांस मिलकर नई तकनीक विकसित करेंगे। फोकस वैश्विक स्तर पर AI के नैतिक इस्तेमाल, हेल्थकेयर, क्लाइमेट चेंज और सप्लाई चेन में होगा। यह होराइजन 2047 रोडमैप का हिस्सा है, जो 2023 में अपनाया गया था।
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भारत-फ्रांस रक्षा संबंध दशकों पुराना है। फ्रांस भारत का सबसे विश्वसनीय साझेदार रहा है, जहां तकनीक ट्रांसफर और समय पर डिलीवरी होती है। इस यात्रा में कई बड़े ऐलान होने की उम्मीद है।
आपको बता दें कि, भारत ने साल 2016 में फ़्रांस से 36 राफेल जेट्स का सौदा किया था, जो इस समय भारतीय वायुसेना में सक्रिय हैं। अब रक्षा मंत्रालय ने 114 अतिरिक्त राफेल की खरीद पर मुहर लगी है, जिसमें 90 विमान भारत में ही बनेंगे (कम से कम 50% स्वदेशी कंटेंट)। डील की अनुमानित कीमत ₹3.25 लाख करोड़ है। यह भारत की हवाई ताकत को मजबूत करेगा, जिसमें AESA रडार, SPECTRA EW सूट और मेटियोर मिसाइल जैसी क्षमताएं हैं। सैफ्रन इंजन असेंबली लाइन भारत में लगाने को तैयार है।
स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां
2005 के प्रोजेक्ट-75 के तहत 6 स्कॉर्पीन (कलवरी क्लास) पनडुब्बियां मझगांव डॉक में फ्रेंच तकनीक से बन रही हैं। अब तक 5 शामिल हो चुकी हैं, छठी जल्द आएगी। अब प्रोजेक्ट-75 इंडिया के तहत 3 अतिरिक्त पनडुब्बियों पर सहयोग बढ़ सकता है। इसमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) अपग्रेड भी शामिल है। ये पनडुब्बियां स्टेल्थ और लंबी रेंज हमलों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
हैमर मिसाइल पर होगी डील

HAMMER (Highly Agile Modular Munition Extended Range) MBDA की एयर-टू-ग्राउंड प्रेसिजन मिसाइल है, जो राफेल से लॉन्च होती है। यह बंकरों, ठिकानों को दूर से नष्ट कर सकती है। भारत इसे राफेल पर एकीकृत कर रहा है। संयुक्त उत्पादन के लिए MoU साइन होने वाला है, जिसमें BEL और सैफ्रन का JV शामिल है। यह आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देगा।
हेलीकॉप्टरों का संयुक्त निर्माण
एयरबस हेलीकॉप्टर्स भारत में निवेश कर रही है। H125 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर का फाइनल असेंबली लाइन ताटा के साथ वेमगल (कर्नाटक) में शुरू होगा। मोदी-मैक्रों इसका उद्घाटन करेंगे। इससे भारतीय सेना को नए हेलीकॉप्टर मिलेंगे और हजारों रोजगार सृजित होंगे।
क्यों भारत के लिए अहम है सौदा
आत्मनिर्भर भारत: ज्यादातर सौदों में भारत में निर्माण, तकनीक ट्रांसफर और स्वदेशी कंटेंट पर जोर है। इससे निर्भरता कम होगी।
रणनीतिक संतुलन: फ्रांस इंडो-पैसिफिक में भारत का मजबूत साथी है, खासकर चीन की चुनौतियों के सामने।
विश्वसनीयता: फ्रांस सौदों में देरी नहीं करता और ट्रांसफर में उदार है।
आर्थिक लाभ: व्यापार, रोजगार, इनोवेशन और क्लाइमेट परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा।
मोदी-मैक्रों की पुरानी दोस्ती और यह यात्रा दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगी। आने वाले दिनों में कई MoUs और बड़े ऐलानों की उम्मीद है, जो भारत-फ्रांस साझेदारी को नई गति देंगे।
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