हल्के में न लें थकान और चिड़चिड़ेपन को, हो सकते हैं डिप्रेशन के लक्षण, एक्सपर्ट्स ने बताया- कैसे बचें

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास खुद के लिए जरा भी टाइम नहीं होता। न उन्हें आराम करने को मिल रहा है और न ही सूकून से बैठकर खाने को। ऐसे में कुछ लोग हर समय थकान महसूस करने लगते हैं, उन्हें छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा पन होने लगता है या फिर बिना वजह उदासी छाने लगती है।

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अक्सर लोग इसे काम का दबाव, नींद की कमी या रोजमर्रा की थकान मानकर इग्नोर कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि, ये लक्षण डिप्रेशन (अवसाद) के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे में इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल,  डिप्रेशन एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जो व्यक्ति की सोच, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करती है।
ये हैं संकेत

डिप्रेशन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में लाखों लोग डिप्रेशन की समस्या से पीड़ित हैं और यह दुनिया में सबसे आम मानसिक विकारों में से एक है। अगर समय पर इसकी पहचान न हो, तो यह आत्मविश्वास की कमी, निर्णय लेने में कठिनाई, रिश्तों में दरार और यहां तक कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है। साइकेट्रिस्ट बताते हैं कि, डिप्रेशन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग तरीके से दिखते हैं। जैसे लगातार उदासी, निराशा, थकान, आत्मविश्वास की कमी, नींद में बदलाव (ज्यादा या कम सोना), भूख में कमी या बढ़ोतरी, किसी भी काम में रुचि न रहना इसके प्रमुख संकेत हैं।

कई कारणों से होता है डिप्रेशन

कुछ लोगों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन ज्यादा होता है, जबकि कुछ खुद को दूसरों से अलग-थलग महसूस करने लगते हैं। मेयो क्लिनिक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुसार, ये लक्षण कम से कम दो हफ्ते तक बने रहें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। डिप्रेशन के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लंबे समय तक तनाव, मानसिक सदमा, रिश्तों में समस्या, आर्थिक दबाव, हॉर्मोनल असंतुलन, किसी बड़े नुकसान का अनुभव या मस्तिष्क में केमिकल (जैसे सेरोटोनिन) का असंतुलन मुख्य वजहें हैं। कभी-कभी आनुवंशिक कारक, पुरानी बीमारियां या दवाओं का साइड इफेक्ट भी इसे ट्रिगर कर सकता है।

मानसिक सेहत को प्राथमिकता दें

 थकान

विशेषज्ञों का मानना है कि, भावनाओं को दबाकर रखना और लगातार दबाव में रहना स्थिति को और बिगाड़ देता है। डिप्रेशन से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता देना। रोजाना थोड़ा समय खुद के लिए निकालें, 7-8 घंटे की नींद लें, संतुलित आहार लें और हल्की एक्सरसाइज या योग करें। सुबह की सैर, ध्यान या गहरी सांस लेने वाले व्यायाम मन को शांति देते हैं। अपनी भावनाओं को किसी भरोसेमंद दोस्त, परिवार के सदस्य या काउंसलर से साझा करें। मोबाइल और सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाएं, छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें और खुद पर अनावश्यक दबाव न डालें।

संभव है डिप्रेशन का इलाज

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, अगर थकान, उदासी या चिड़चिड़ापन दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही हो, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या साइकेट्रिस्ट से संपर्क करें। जब काम, पढ़ाई या रिश्तों में परेशानी आने लगे, खुद को बेकार या दोषी महसूस हो, नकारात्मक विचार बार-बार आएं, नींद-भूख में बड़ा बदलाव हो या आत्महत्या जैसे विचार आएं, तो इसे कभी नजरअंदाज न करें। डिप्रेशन का इलाज संभव और प्रभावी है। ज्यादातर मामलों में मनोचिकित्सा जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी – CBT, एंटीडिप्रेसेंट दवाएं (SSRI) और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिलने लगती है।

कई बार गंभीर मामलों में संयोजन थेरेपी या अन्य उन्नत उपचार जैसे ECT भी इस्तेमाल किए जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग उपचार से राहत पा जाते हैं। डिप्रेशन कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि एक इलाज योग्य बीमारी है। अगर समय पर  ध्यान दे दिया जाये और उपचार शुरू कर दिया जाये, तो समस्या से छुटकारा पाया जा सकता  है।

 

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