
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से मजबूत हुई हेल्थ डीपीआई की नींव
- एसएमएस, वाट्सऐप और पीएचआर ऐप से मरीजों को मिल रही जांच रिपोर्ट
लखनऊ, 24 जनवरी। सीएम योगी की दूर की सोच और पॉलिसी के फैसलों की वजह से, उत्तर प्रदेश हेल्थ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Health DPI) के क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक नेशनल मॉडल बनकर उभरा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत, राज्य में सुरक्षित, इंटरऑपरेबल हेल्थकेयर सेवाओं की एक मजबूत नींव रखी जा रही है।
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अस्पताल से लेकर मरीज़ तक, पूरे सिस्टम को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म में इंटीग्रेट किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा राज्य की 240 मिलियन से ज़्यादा आबादी को मिलना शुरू हो गया है। अपने डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ, उत्तर प्रदेश ने न केवल हेल्थकेयर सेवाओं को तेज़, ट्रांसपेरेंट और मरीज़-सेंट्रिक बनाया है, बल्कि AI-बेस्ड हेल्थकेयर, इंटरऑपरेबिलिटी और सुरक्षित डेटा एक्सचेंज के लिए भी एक मजबूत नींव रखी है।
14.52 करोड़ आभा आईडी यूपी में
स्वास्थ्य सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि प्रदेश में एबीडीएम को कोर हेल्थ डीपीआई लेयर के रूप में लागू किया गया है। अब तक प्रदेश में 14.52 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। इसके साथ ही 70 हजार से अधिक स्वास्थ्य संगठनों और 1.04 लाख से ज्यादा हेल्थ प्रोफेशनल्स एबीडीएम के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड के क्षेत्र में भी यूपी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 13.03 करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड आभा से लिंक किए जा चुके हैं, जिससे मरीजों का संपूर्ण चिकित्सा इतिहास एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर, राज्य भर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल हेल्थ बैकबोन के तौर पर हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HIS) लागू किया गया है। अभी, NIC का नेक्स्ट-जेन HIS और CDAC का ई-सुश्रत सिस्टम पूरे राज्य में लागू है। राज्य में 15,000 से ज़्यादा सरकारी और प्राइवेट अस्पताल HIS का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि 1,171 पब्लिक हेल्थ संस्थानों को पूरी तरह से डिजिटल सिस्टम में जोड़ दिया गया है। इनमें मेडिकल कॉलेज, ज़िला अस्पताल, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHCs), और प्राइमरी हेल्थ सेंटर (PHCs) शामिल हैं।
रजिस्ट्रेशन से आसान हुआ इलाज
सीएम की मंशा के अनुरूप मरीजों को लाइन में लगने और कागजी झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए आभा आधारित पंजीकरण व्यवस्था लागू की गई है। अब मरीज स्कैन और शेयर सुविधा के जरिए ओपीडी पंजीकरण कर सकते हैं। प्रदेश में लगभग 40 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन आभा आधारित हो चुके हैं। इससे मरीज का डाटा एक बार दर्ज होने के बाद भविष्य में किसी भी सरकारी अस्पताल में आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
योगी सरकार ने ई-प्रिस्क्रिप्शन को भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया है। डॉक्टर अब डिजिटल पर्ची जारी कर रहे हैं, जिससे दवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। इसके साथ ही स्कैन एंड पे और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम (ओआरएस) के जरिए डिजिटल भुगतान की सुविधा शुरू की गई है, जिससे मरीजों को अस्पतालों में कैश लेन-देन से राहत मिली है।
ऑनलाइन मिल रही रिपोर्ट
सीएम योगी के विजन के तहत राज्य सरकार ने एलआईएस (लाइब्रेटरी इंफॉरर्मेशन सिस्टम) को एचआईएस से इंटीग्रेट कर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके तहत सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की लैब को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है। अब मरीज अपनी लैब जांच रिपोर्ट आभा आधारित पीएचआर ऐप, एसएमएस और वाट्सऐप के माध्यम से सीधे प्राप्त कर सकते हैं। डॉक्टरों को भी एचआईएस सिस्टम के जरिए तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है, जिससे इलाज में देरी नहीं होती। प्रदेश में अब तक 1,112 स्वास्थ्य संस्थानों में एलआईएस सक्रिय किया जा चुका है, जिनमें 126 जिला अस्पताल और 986 सीएचसी शामिल हैं।
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