नई दिल्ली: देश के बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 27 जनवरी 2026 को एक दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल में करीब आठ लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल रहेंगे, जिसके चलते बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक सभी इस हड़ताल का हिस्सा होंगे।
पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग पर हड़ताल
यह हड़ताल पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह (Five-Day Work Week) लागू करने की मांग को लेकर की जा रही है। बैंक यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित इस मांग पर सरकार की ओर से अब तक कोई अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।
UFBU के आह्वान पर होगा आंदोलन
हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने किया है, जो बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के नौ संगठनों का संयुक्त मंच है। इसमें ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC), ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (NCBE), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA), बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI), इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन (INBEF), इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (INBOC), नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (NOBW) और नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स (NOBO) शामिल हैं।
शनिवार अवकाश को लेकर सरकार पर दबाव
AIBOC की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित करने की मंजूरी में हो रही देरी के कारण यह हड़ताल जरूरी हो गई है। यूनियनों का कहना है कि भारतीय बैंक संघ (IBA) की ओर से पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह की सिफारिश पिछले दो वर्षों से सरकार के पास लंबित है।
समझौते के बावजूद नहीं मिली मंजूरी
यूनियनों ने बताया कि पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह का प्रस्ताव 7 दिसंबर 2023 को UFBU और IBA के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का हिस्सा था। इसके बाद 8 मार्च 2024 को हुए सेटलमेंट और जॉइंट नोट में भी इस पर सहमति बनी थी। प्रस्ताव के तहत सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना कार्य समय 40 मिनट बढ़ाने और सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की बात तय हुई थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।
पहले भी मिल चुके हैं आश्वासन
UFBU ने याद दिलाया कि वर्ष 2015 के 10वें द्विपक्षीय समझौते और 7वें जॉइंट नोट के दौरान सरकार और IBA ने दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित करने पर सहमति जताई थी और बाकी शनिवारों पर बाद में विचार करने का आश्वासन दिया गया था। यूनियनों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद यह मुद्दा अब तक लंबित है।
मार्च 2025 की हड़ताल टली थी आश्वासन पर
यूनियनों ने यह भी बताया कि सरकार के आश्वासन के बाद 24 और 25 मार्च 2025 को प्रस्तावित दो-दिवसीय हड़ताल को टाल दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद मंजूरी नहीं मिलने से अब आंदोलन तेज करने का फैसला लिया गया है।
RBI, LIC में पहले से लागू है 5-डे वर्किंग
UFBU का तर्क है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC) जैसी संस्थाओं में पहले से ही पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालय, शेयर बाजार, मुद्रा और विदेशी मुद्रा बाजार भी केवल सोमवार से शुक्रवार तक ही काम करते हैं।
भेदभाव का आरोप, जनता से सहयोग की अपील
यूनियनों का कहना है कि केवल बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से ही शनिवार को काम कराया जा रहा है, जिससे वे खुद को भेदभाव का शिकार महसूस कर रहे हैं। UFBU ने आम जनता से हड़ताल के कारण होने वाली असुविधा के लिए सहयोग की अपील की है और कहा है कि वैकल्पिक बैंकिंग चैनल उपलब्ध रहेंगे।
AIBOC का दावा, लाखों अधिकारी होंगे शामिल
UFBU का प्रमुख घटक AIBOC सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और निजी बैंकों में कार्यरत 3.25 लाख से अधिक बैंक अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो इस हड़ताल में शामिल होंगे।
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