लखनऊ पर आधारित इस फिल्म ने जीता इंटरनेशनल फिल्म अवार्ड..

इस साल कोरोना वायरस की वजह से ज्यादातर फिल्म महोत्सवों को या तो आगे बढ़ा दिया गया, या फिर ऑनलाइन इनका समापन हुआ। इन्हीं ऑनलाइन पूरे किए गए फिल्म महोत्सवों में एक रहा ‘द इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ सिनसिनाटी’। फीचर फिल्मों, शॉर्ट फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रीज प्रदर्शित करके उन्हें पुरस्कृत करने वाले इस समारोह में इस बार सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार कुमुद चौधरी के निर्देशन में बनी फिल्म छोटे नवाब को दिया गया है। कुमुद की एक निर्देशक के रूप में यह पहली ही फिल्म है।

लखनऊ पर आधारित है फिल्म छोटे नवाब की कहानी

फिल्म छोटे नवाब की कहानी 13 साल के एक लडक़े जुनैद की है जो ब्रिटेन में रहता है। एक बार एक शादी के मौके पर उसे अपने देश वापस लौटने का मौका मिलता है। यहां लखनऊ में उसके पुरखों की एक नवाबी हवेली होती है जहां यह शादी समारोह चल रहा है। जुनैद को शादी के दौरान ही अपनी परंपराएं पता चलती हैं और वह यहां दिल भी लगा बैठता है। और फिर उसका दिल टूट भी जाता है। यह सभी बातें जुनैद पर काफी गहरा असर छोड़ती हैं। कुछ घटनाओं के बाद जुनैद यहां पितृसत्तात्मक व्यवस्था के बारे में भी समझता है। तब उसके दिमाग में बहुत से सवाल उपजते हैं।

छोटे नवाब फिल्म में अक्षय ओबेरॉय, प्लाबिता बोरठाकुर और स्वार कांबले ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। लखनऊ की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन कुमुद चौधरी ने किया है। कुमुद चौधरी ने इससे पहले वर्ष 2003 में आई फिल्म धूप की कहानी और संवाद लिखे हैं। यह फिल्म कारगिल में शहीद हुए सेना के जवानों पर आधारित रही। लेखन का अनुभव होने की वजह से कुमुद ने फिल्म छोटे नवाब को लिखने का काम अरशद अब्बास जाफरी के साथ किया है।

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द इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ सिनसिनाटी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार अपनी फिल्म छोटे नवाब को मिलने की खुशी जाहिर करते हुए कुमुद ने कहा, मैं रोमांचित महसूस कर रही हूं कि हमारी फिल्म को अलग-अलग तरह के दर्शकों ने देखा और इसकी सराहना भी की। यह फिल्म एक काल्पनिक कहानी है जिसमें संस्कृति और उनमें आ रहे लगातार बदलावों को दर्शाया गया है। यह कहानी ऐसी है जो पूरी दुनिया को समेटती है। मैं बहुत खुश हूं कि यह फिल्म एक प्रतिष्ठित पुरस्कार लेकर घर आई।

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