Saraswati Puja Direction: शुक्रवार, 23 जनवरी को देशभर में बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती का अवतरण हुआ था, इसी कारण इस दिन को विद्या, संगीत और सृजन का महापर्व माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन प्रातः स्नान के बाद घरों, विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित कर पूजा की जाती है।

वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि अगर मां सरस्वती की मूर्ति गलत दिशा में स्थापित की जाए, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए देवी की स्थापना से पहले शुभ दिशा और सही मुद्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। मान्यता है कि सही दिशा और विधि से पूजा करने पर विद्या, बुद्धि, करियर और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।
मां सरस्वती की मूर्ति स्थापना की सबसे शुभ दिशाएं
पूर्व दिशा में करें स्थापना
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा ज्ञान और सूर्य की ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती है। इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने से बुद्धि तेज होती है, पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है और विद्या की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों के लिए यह दिशा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।
उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) है सबसे उत्तम
उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा कहा गया है। इस दिशा में मां सरस्वती की स्थापना करने से धन, ज्ञान और करियर में निरंतर प्रगति होती है। नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यवसाय में सफलता की कामना रखने वालों के लिए यह दिशा अत्यंत शुभ मानी जाती है।
उत्तर दिशा भी मानी जाती है लाभकारी
सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए मां सरस्वती की मूर्ति को उत्तर दिशा में भी स्थापित किया जा सकता है। इससे घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है और शिक्षा व करियर से जुड़े प्रयासों में सफलता मिलती है।
किस मुद्रा में होनी चाहिए मां सरस्वती की मूर्ति
कमल के फूल पर विराजमान मूर्ति
बसंत पंचमी पर कमल के फूल पर विराजमान मां सरस्वती की मूर्ति की पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है। कमल एकाग्रता, पवित्रता और ज्ञान का प्रतीक है, जिससे साधक का मन पढ़ाई और साधना में स्थिर रहता है।
चेहरे पर हो प्रसन्नता का भाव
मां सरस्वती की मूर्ति के चेहरे पर सौम्यता और प्रसन्नता का भाव होना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार उदास या क्रोधित भाव वाली मूर्ति घर में नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
हाथों में वीणा हो अनिवार्य
मां सरस्वती के हाथों में वीणा होना चाहिए, जो संगीत, कला और रचनात्मकता का प्रतीक मानी जाती है। यह विद्या और मानसिक संतुलन का संकेत भी देती है।
बसंत पंचमी पर विशेष ध्यान रखें
मां सरस्वती की मूर्ति हमेशा साफ और पवित्र स्थान पर स्थापित करें। पूजा के दौरान पीले वस्त्र पहनना, पीले फूल अर्पित करना और विद्या से जुड़े संकल्प लेना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सही विधि से की गई पूजा जीवनभर विद्या और सफलता का आशीर्वाद देती है।
Sarkari Manthan Hindi News Portal & Magazine