ईरान। देश में 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई सरकार की कार्रवाई का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की एक अमेरिका स्थित एजेंसी ने मंगलवार को दावा किया कि देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई में अब तक कम से कम 4029 लोगों की मौत हो चुकी है। इस कार्रवाई में 26,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। यह जानकारी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) ने दी है।

मरने वालों में 3786 प्रदर्शनकारी, 180 सुरक्षा कर्मी, 28 बच्चे
एजेंसी ने बताया कि मरने वालों में 3,786 प्रदर्शनकारी, 180 सुरक्षा बल, 28 बच्चे और 35 ऐसे लोग शामिल हैं जो प्रदर्शन में भाग नहीं ले रहे थे। HRANA का कहना है कि वह पहले भी ईरान में अशांति के दौरान सही आंकड़े देने के लिए जाना जाता है और हर मौत की पुष्टि के लिए जमीन पर मौजूद एक्टिविस्ट नेटवर्क पर निर्भर रहता है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि एपी (एपी न्यूज) ने नहीं की है।
दावोस में ईरान के विदेश मंत्री का आमंत्रण रद्द, म्यूनिख सम्मेलन ने भी किया बहिष्कार
इन हत्याओं के कारण स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बोलने का निमंत्रण वापस ले लिया गया है। फोरम ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में ईरान में नागरिकों की दुखद मौतों के चलते इस साल दावोस में ईरानी सरकार का प्रतिनिधित्व सही नहीं होगा। अराघची ने इस फैसले की निंदा करते हुए इसे “झूठ और राजनीतिक दबाव” से जोड़कर बताया। वहीं म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन ने भी ईरानी सरकारी अधिकारियों को दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया है।
ईरान सरकार ने मौतों का कोई आंकड़ा नहीं दिया
ईरानी अधिकारियों ने अब तक मरने वालों की संख्या का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं दिया है। हालांकि, शनिवार को देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा था कि विरोध प्रदर्शनों में कई हजार लोग मारे गए हैं और इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया था। यह ईरान के किसी नेता की ओर से विरोध प्रदर्शनों में हुई मौतों पर पहला संकेत था।
आगे क्या हो सकता है? मौत की सजा का खतरा बना हुआ
फिलहाल यह आशंका टली नहीं है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को मौत की सजा दी जा सकती है। ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां मौत की सजा सबसे अधिक दी जाती है। ईरान के राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और संसद स्पीकर ने एक बयान में कहा है कि “हत्यारों और देशद्रोही आतंकवादियों को सजा दी जाएगी, लेकिन जो लोग गुमराह हुए थे और आतंकवादी घटना में उनकी भूमिका नहीं थी, उन पर दया और नरमी बरती जाएगी।”
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