AI और एडवांस टेक्नोलॉजी के दम पर ‘विकसित भारत’ की अगुवाई करेगा यूपी, खुलेंगे 1000 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से पारंपरिक उद्योगों की सीमाओं से निकलकर तकनीकी नवाचार, निवेश और रिसर्च का वैश्विक हब बनता जा रहा है। राज्य सरकार की नई ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी के जरिए प्रदेश को देश का सबसे मजबूत ‘इनोवेशन पावरहाउस’ बनाने की तैयारी है। फिलहाल प्रदेश में करीब 90 जीसीसी संचालित हैं, जिन्हें आने वाले समय में बढ़ाकर एक हजार से अधिक करने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे न केवल हाई-स्किल जॉब्स का बड़े पैमाने पर सृजन होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को ज्ञान आधारित और भविष्य उन्मुख मॉडल पर नई मजबूती मिलेगी।

तकनीक आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर से बदलेगा औद्योगिक परिदृश्य

योगी सरकार की नीति के तहत जीसीसी को अब सिर्फ बैक-ऑफिस गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इंजीनियरिंग के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में आईआईटी कानपुर और आईआईएम लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से एआई, ब्लॉकचेन, 5जी और 6जी, हेल्थटेक समेत उभरती तकनीकों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। इसका मकसद वैश्विक कंपनियों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है।

स्टार्टअप्स और मल्टीनेशनल कंपनियों के बीच नई साझेदारी

उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक मंच से जोड़ने के लिए सरकार ने एक नया और प्रभावी मॉडल तैयार किया है। इसके तहत जीसीसी और स्थानीय स्टार्टअप्स के बीच प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट और समस्या समाधान आधारित साझेदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे प्रदेश के स्टार्टअप्स को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अनुभव, तकनीकी मार्गदर्शन और वैश्विक नेटवर्क का लाभ मिलेगा, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेंगे। यह मॉडल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

युवाओं को रोजगार से उद्यमिता की ओर ले जाने की पहल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट लक्ष्य युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। नई जीसीसी पॉलिसी में युवाओं, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे यह नीति सामाजिक रूप से समावेशी बनती है। निवेशकों के अनुकूल माहौल, नीतिगत स्थिरता और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था ने प्रदेश में निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश अब ‘विकसित भारत’ के संकल्प को नई गति देने और तकनीकी नेतृत्व के जरिए देश को वैश्विक मंच पर आगे ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहा है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया सरकारी मंथन के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...