प्रयागराज: संगम के माघ मेले में इस बार हठ योगियों, साधु-संतों और सन्यासियों की अनोखी साधनाएं श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींच रही हैं। कोई वर्षों से एक हाथ उठाए तप में लीन है तो कोई निरंतर खड़े रहकर साधना कर रहा है, लेकिन इन सबके बीच बिहार से आए एक साधु की कठिन तपस्या सबसे ज्यादा चर्चा में है। नुकीले कांटों की सेज पर लेटे इस साधु को देखकर लोग हैरानी में पड़ जा रहे हैं और उनकी साधना को निहारने के लिए मेले में भारी भीड़ जुट रही है।

कांटों को बनाया तपस्या का आधार
बिहार से माघ मेले में पहुंचे साधु का नाम रमेश निशादराज बताया जा रहा है। उनकी साधना का तरीका बेहद कठोर और असाधारण है। वह नुकीले कांटों से बनी सेज पर लेटकर ध्यान साधना करते हैं और लंबे समय तक उसी अवस्था में स्थिर रहते हैं। कांटों का यह बिस्तर ही उनकी तपस्या का मुख्य माध्यम है। कई श्रद्धालु कांटों की सैया देखकर सहम जाते हैं, तो कई लोग इसे अद्भुत साधना मानकर साधु के चरणों में नमन करते नजर आते हैं।
शांत चित्त और अडिग ध्यान देख रह जाते हैं लोग
साधु रमेश निशादराज की साधना को देखने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने इससे पहले कभी ऐसा दृश्य नहीं देखा। कांटों पर लेटे रहने के बावजूद उनके चेहरे पर शांति और स्थिरता बनी रहती है, जो लोगों को और अधिक आश्चर्य में डाल देती है। आसपास खड़े लोग आपस में इसी बात की चर्चा करते रहते हैं कि आखिर कोई व्यक्ति नुकीले कांटों पर कैसे लेट सकता है और इतने समय तक ध्यान में लीन रह सकता है।
सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल बना माघ मेला
माघ मेले में इस तरह की कठिन साधनाएं सनातन परंपरा की उस तपस्वी संस्कृति की याद दिलाती हैं, जहां संयम, तप और साधना को जीवन का सर्वोच्च मार्ग माना गया है। साधु रमेश निशादराज की कांटों पर की जा रही तपस्या भी उसी परंपरा की जीवंत झलक पेश कर रही है। यही वजह है कि दिनभर उनके पास श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है और यह साधना मेले में आने वाले लोगों के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
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