दुबई । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के तेल नेटवर्क के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों पर शुक्रवार को भीषण बमबारी की है। ट्रंप के अनुसार, इस हमले में द्वीप पर मौजूद सैन्य बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। राष्ट्रपति ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो द्वीप पर स्थित ईरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल और संबंधित ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। यह कार्रवाई ईरान के उस रुख के बाद आई है जिसमें उसने अमेरिकी हमलों की सूरत में बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दी थी।
इस सैन्य अभियान के बीच वाशिंगटन ने पश्चिम एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अतिरिक्त 2,500 मरीन सैनिकों और एक अत्याधुनिक युद्धपोत को तैनात करने का निर्णय लिया है। ईरान के साथ जारी इस युद्ध को लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, और अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह तैनाती क्षेत्र में सुरक्षा और दबाव बनाए रखने के लिए आवश्यक है। तनाव का असर जमीन पर भी दिख रहा है, जहां ईरान की राजधानी तेहरान के केंद्रीय चौक पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ। यह विस्फोट उस समय हुआ जब वहां फलस्तीन के समर्थन में और इजराइल के विरोध में सरकार द्वारा आयोजित एक विशाल रैली चल रही थी। हालांकि, इस घटना में फिलहाल किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान ने भी अपनी ओर से आक्रामक रुख बरकरार रखा है और पड़ोसी खाड़ी देशों के साथ-साथ इजराइल पर निरंतर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति होर्मुज जलडमरूमध्य में बनी हुई है, जिसे ईरान ने बाधित कर दिया है। ज्ञात हो कि वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है। इस बीच, अमेरिकी और इजराइली लड़ाकू विमान ईरान के विभिन्न हिस्सों में सैन्य ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रहे हैं।
राजनीतिक मोर्चे पर, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं पर संतुलित प्रतिक्रिया दी है। एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने स्वीकार किया कि निहत्थे नागरिकों के लिए वर्तमान ईरानी शासन को चुनौती देना एक बड़ी और कठिन बाधा है। उन्होंने विशेष रूप से ईरान के अर्द्धसैनिक बल ‘बासिज’ का उल्लेख किया, जिसने पूर्व में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को दबाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। ट्रंप के बयानों से संकेत मिलता है कि अमेरिका वर्तमान में शासन बदलने के बजाय सैन्य ठिकानों और आर्थिक तंत्र को पंगु बनाने की रणनीति पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।



