अहमदाबाद: सोमनाथ मंदिर के 75 वर्षों के आधुनिक पुनरुद्धार और उसके ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने उन महान विभूतियों को याद किया जिन्होंने अपने सिद्धांतों और आस्था से कभी समझौता नहीं किया और मंदिर की सभ्यतागत चेतना को बचाकर राष्ट्र की एकता को मजबूत किया।
सोमनाथ का गौरवशाली इतिहास
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को साझा करते हुए बताया कि जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला आक्रमण हुआ था। इसके बाद एक हजार वर्षों में मंदिर ने कई हमले झेले, लेकिन मंदिर की आस्था और सभ्यतागत चेतना कभी टूट नहीं सकी। इसी गौरवशाली इतिहास और 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 8 से 11 जनवरी तक ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है।
सिद्धांतों से समझौता न करने वालों को नमन
पीएम मोदी ने भारत माता के उन असंख्य सपूतों को याद किया, जिन्होंने कठिन समय में भी अपने मूल्यों और संकल्पों से समझौता नहीं किया। उन्होंने विशेष रूप से सरदार वल्लभ भाई पटेल और के.एम. मुंशी जैसे महान विभूतियों का जिक्र किया, जिनके प्रयासों से 1951 में मंदिर का आधुनिक स्वरूप सामने आया। 1951 का भव्य उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ था।
2001 की यादें और 2026 का संकल्प
पीएम मोदी ने 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में हुए 50 वर्ष पुनर्निर्माण समारोह को याद किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी शामिल थे। अब 2026 में मंदिर के आधुनिक उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सरकार इसे और भव्य तरीके से मना रही है। मुख्य कार्यक्रम 11 जनवरी को आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री स्वयं उपस्थित रहेंगे।
भक्तों से साझा करने की अपील
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ के अवसर पर पीएम मोदी ने अपनी पिछली यात्राओं की कुछ यादगार तस्वीरें साझा की और देश-दुनिया के भक्तों से आग्रह किया कि वे अपनी यादों और तस्वीरों को #SomnathSwabhimanParv हैशटैग के साथ सोशल मीडिया पर साझा करें। उन्होंने कहा कि यह पर्व राष्ट्र की एकता और आस्था को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।



