नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने साल 2026 के पहले अंतरिक्ष मिशन की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसरो का यह पहला लॉन्च मिशन PSLV-C62 / EOS-N1 आगामी 12 जनवरी (सोमवार) सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया जाएगा। इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-N1 को प्राथमिक पेलोड के रूप में अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा, जबकि इसके साथ 15 सह-यात्री उपग्रह भी लॉन्च होंगे।
505 किमी की कक्षा में स्थापित होगा पेलोड
ISRO के अनुसार यह मिशन पीएसएलवी-डीएल वैरिएंट से किया जाएगा, जो पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान होगी। रॉकेट पेलोड को 505 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित करेगा। श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्च पैड-1 पर वेहीकल इंटीग्रेशन का कार्य पूरा हो चुका है और फिलहाल प्री-लॉन्च चेक्स जारी हैं। मिशन की कुल अवधि लगभग 1 घंटा 48 मिनट की होगी।
EOS-N1 समेत ये होंगी मुख्य सैटेलाइट्स
इस लॉन्च मिशन में कई महत्वपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय उपग्रह शामिल किए गए हैं।
EOS-N1 (अन्वेषा):
डीआरडीओ के लिए विकसित करीब 400 किलोग्राम वजनी हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट, जो रक्षा निगरानी, कृषि, शहरी मैपिंग और पर्यावरणीय निगरानी के लिए 12 मीटर रेजोल्यूशन की इमेज उपलब्ध कराएगा।
KID (Kestrel Initial Technology Demonstrator):
स्पेनिश स्टार्टअप द्वारा विकसित 25 किलोग्राम का री-एंट्री प्रोटोटाइप, जिसकी तैनाती के बाद दक्षिण प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के जरिए री-एंट्री की जाएगी।
अन्य सह-यात्री उपग्रह:
भारत के साथ-साथ मॉरीशस, लक्जमबर्ग, यूएई, सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका के व्यावसायिक व रिसर्च उपग्रह भी इस मिशन का हिस्सा होंगे।
PSLV: इसरो का भरोसेमंद ‘वर्क हॉर्स’
पीएसएलवी रॉकेट को इसरो का वर्क हॉर्स माना जाता है। अब तक इसकी 63 उड़ानों में चंद्रयान-1, मंगल ऑर्बिटर मिशन और आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। वर्ष 2017 में एक ही मिशन में 104 उपग्रह लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का गौरव भी पीएसएलवी के नाम दर्ज है।
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