रामसनेहीघाट और संडीला में बनेंगे हाईटेक औद्योगिक क्षेत्र, बैंक-अस्पताल-स्कूल सब एक ही परिसर में

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नक्शे पर बाराबंकी और हरदोई जिले जल्द ही नई पहचान बनाने की तैयारी में हैं। बाराबंकी की रामसनेहीघाट तहसील के सनौली में 232 एकड़ तथा हरदोई के संडीला में 350 एकड़ में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने इन दोनों क्षेत्रों को केंद्र सरकार की भारत औद्योगिक विकास योजना, यानी ‘भाव्या’ के मॉडल पर संवारने की पहल की है। इसके लिए अलमांड एजेंसी ने डिजाइन भी तैयार कर लिया है।

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क्या है भाव्या योजना

केंद्र सरकार की भाव्या योजना का उद्देश्य देश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना है। इसके तहत ऐसे परिसर बनाए जाते हैं, जहां उद्यमियों को उत्पादन से लेकर रहने तक की जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें। केंद्र सरकार ने बड़े औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए राज्यों से प्रस्ताव मांगे थे, जिसके क्रम में रामसनेहीघाट और संडीला के विस्तारित औद्योगिक क्षेत्रों के नाम प्रस्तावित किए गए।

Barabanki Industrial Area

यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक (एसएम) प्रदीप कुमार ने बताया कि प्रस्ताव भेजे जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के विकास में केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि योजना के मानकों का पालन करते हुए ही आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

ये होंगी प्रमुख सुविधाएं

भाव्या योजना के तहत विकसित होने वाले इन औद्योगिक क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े, यानी हर श्रेणी के उद्योगों के लिए अलग-अलग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बुनियादी ढांचे के रूप में यहां:

सीवर लाइन की व्यवस्था होगी

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) स्थापित किए जाएंगे
बिजली आपूर्ति के लिए भूमिगत केबल प्रणाली होगी
पेयजल के लिए पाइपलाइन बिछाई जाएगी
चार से छह लेन तक की चौड़ी सड़कें बनाई जाएंगी

इसके अलावा परिसर के भीतर ही बैंक, अस्पताल और स्कूल जैसी सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। तैयार माल के भंडारण के लिए गोदाम की व्यवस्था होगी। उद्यमियों और श्रमिकों के लिए आवासीय सुविधा भी दी जाएगी, ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परिसर से बाहर न जाना पड़े।

निवेशकों को नहीं भटकना पड़ेगा

योजना का सबसे बड़ा लाभ यह माना जा रहा है कि उद्योग स्थापित करने वाले निवेशकों को जरूरी सुविधाओं के लिए दूर-दराज के शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एक ही परिसर में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और आवास जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होने से उद्योगों की लागत और समय दोनों की बचत होगी। जानकारों का मानना है कि इससे क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

महंगे हो सकते हैं भूखंड

हालांकि, इस आधुनिक मॉडल का एक पहलू उद्यमियों की जेब पर असर डाल सकता है। भाव्या के मानकों के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों में चौड़ी सड़कों और अन्य सुविधाओं के लिए अधिक जमीन छोड़नी होगी। इससे उद्योगों के लिए उपलब्ध भूखंडों की संख्या घटेगी और विकास लागत में बढ़ोतरी की आशंका है। ऐसे में उद्यमियों को प्लॉट पहले की तुलना में कुछ महंगे मिल सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि, सुविधाओं के स्तर को देखते हुए यह अतिरिक्त लागत उद्यमियों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

पहले बनी थी दो चरणों की योजना

भाव्या मॉडल पर विचार से पहले यूपीसीडा ने रामसनेहीघाट औद्योगिक क्षेत्र को दो चरणों में विकसित करने की योजना बनाई थी। पहले चरण में क्षेत्र के लेआउट पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। दूसरे चरण में औद्योगिक क्षेत्र को अयोध्या हाईवे से जोड़ने वाली सड़क को सुल्तानपुर हाईवे और पूर्वाचल एक्सप्रेसवे से फोरलेन मार्ग के जरिए जोड़ने की कार्ययोजना थी। इस संपर्क मार्ग के बनने से औद्योगिक क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होती और माल की ढुलाई आसान हो जाती।

अब भाव्या मॉडल के तहत विकास की नई रूपरेखा बनने से योजना का स्वरूप और व्यापक होने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार की मंजूरी और गाइडलाइन के अनुरूप आगे की प्रक्रिया तय होगी।

क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति

रामसनेहीघाट और संडीला, दोनों क्षेत्र लखनऊ से नजदीक होने के साथ-साथ प्रमुख मार्गों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यहां आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से आसपास के जिलों को भी आर्थिक गति मिलने की संभावना है। स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों ने योजना का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र का समग्र विकास होगा।

फिलहाल योजना प्रस्ताव और डिजाइन के स्तर पर है। केंद्र सरकार की औपचारिक स्वीकृति और बजट आवंटन के बाद ही निर्माण कार्य की समय-सीमा तय हो सकेगी। यूपीसीडा के अधिकारी इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने में जुटे हैं।

 

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