नयी दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान क्षेत्र में बुधवार तड़के अतिक्रमण रोधी अभियान के दौरान हिंसा भड़क गई। एक मस्जिद के पास चल रही कार्रवाई के विरोध में हुई पथराव की घटना में कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस के अनुसार हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में हैं और इलाके में शांति व्यवस्था बहाल कर दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने सैयद फैज इलाही मस्जिद से सटे क्षेत्र और तुर्कमान गेट के पास स्थित कब्रिस्तान इलाके में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया था। कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, भीड़ द्वारा कथित तौर पर पथराव किए जाने के बाद हालात को काबू में करने के लिए संयमित बल प्रयोग किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके बाद भीड़ तितर-बितर हो गई और स्थिति सामान्य हो गई।
पुलिस उपायुक्त मध्य निधिन वलसन ने बताया कि एमसीडी ने छह और सात जनवरी की दरमियानी रात अतिक्रमण हटाने का कार्यक्रम तय किया था, जिसे देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। उन्होंने बताया कि एमसीडी का साजो-सामान मौके पर पहुंचने से पहले ही करीब 100 से 150 लोग वहां एकत्र हो गए थे।
डीसीपी के अनुसार पुलिस ने पहले लोगों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया, जिसके बाद अधिकांश लोग वहां से हट गए। हालांकि कुछ लोगों ने हंगामा किया और पथराव किया, जिसमें पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आईं। सभी घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में चिकित्सा रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, अभियान के दौरान फैज ए इलाही मस्जिद के पास स्थित एक बैंक्वेट हॉल और एक औषधालय को ध्वस्त किया जा रहा था। दोनों निर्माणों को अदालत ने अतिक्रमण घोषित किया था। पुलिस ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि एमसीडी की है और प्रस्तावित विध्वंस की जानकारी पहले ही पुलिस को दे दी गई थी।
पुलिस के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से ही व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया था। इसके अलावा स्थानीय शांति समितियों के सदस्यों के साथ समन्वय बैठकें भी की गई थीं और स्थानीय निवासियों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया था कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी और अदालत के आदेश के तहत की जा रही है।
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