सोने से पहले आईना देखने से आती है बेचैनी और बुरे सपने? जानिए क्या कहता है वास्तु शास्त्र

आईना सिर्फ चेहरा देखने का साधन नहीं है। वास्तु शास्त्र में इसे ऊर्जा का वाहक माना गया है। अक्सर बड़े-बुजुर्गों से सुनने को मिलता है कि रात के समय आईना नहीं देखना चाहिए। मान्यता है कि, रात में शीशा देखना अशुभ होता है। अगर आपके बेडरूम में बिस्तर के ठीक सामने शीशा लगा है या आप सोने से पहले आईने में झांकने के आदी हैं, तो वास्तु से जुड़े कुछ नियम जान लेना आपके लिए जरूरी है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, रात के समय आईना देखने से ऊर्जा दोगुनी हो जाती है, जिसका अशुभ प्रभाव पड़ सकता है।

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वास्तु शास्त्र के अनुसार, खासतौर पर रात में रोते हुए आईने में अपना प्रतिबिंब देखना मानसिक शांति और ऊर्जा, दोनों को प्रभावित करता है। आइए जानते हैं कि वास्तु गुरु मान्या की नजर में सोने से पहले शीशा देखना क्यों ठीक नहीं माना जाता और इससे बचने के क्या उपाय हैं।

बेडरूम में सावधानी से रखें आइना

Vastu Shastra'

जानकारों के मुताबिक,  इंसान दिन के करीब आठ घंटे यानी एक तिहाई समय बेडरूम में गुजारता है। यही वजह है कि वास्तु शास्त्र में शयनकक्ष की बनावट, बिस्तर की स्थिति और वहां रखी चीजों को खास अहमियत दी गई है। आईना भी उन्हीं चीजों में शामिल है, जिसकी जगह तय करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

सोने से पहले आईना देखने से बढ़ती है बेचैनी

वास्तु गुरु मान्या का कहना है कि, सोने से ठीक पहले आईना देखने पर दिमाग में बेचैनी पैदा होती है। इसका असर नींद पर पड़ता है। गहरी नींद आने में रुकावट आती है और बुरे सपने आने की समस्या भी हो सकती है। उनके मुताबिक नींद की गुणवत्ता बिगड़ने का सीधा असर अगले दिन की ताजगी और कामकाज पर दिखाई देता है।

 नकारात्मक उर्जा का पड़ता है असर

वास्तु गुरु के अनुसार, आईने की प्रकृति ही ऐसी है कि वह अपने सामने आने वाली हर चीज को पलटकर वापस लौटा देता है। रात को सोते समय हमारा शरीर दिनभर का तनाव और थकान बाहर निकालता है, ताकि सुबह तक फिर से ऊर्जा से भर सके, लेकिन अगर बिस्तर के सामने शीशा रखा हो, तो वह इस थकान और नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर दोगुना करके हमारी ओर ही लौटा देता है। यही वजह है कि सुबह उठने पर शरीर तरोताजा महसूस होने के बजाय थका हुआ और भारी-भारी लगता है।

पति-पत्नी के रिश्ते पर असर

वास्तु गुरु के मुताबिक, दंपत्ति के कमरे में बेड के ठीक सामने आईना नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसा होने पर पति-पत्नी के बीच बिना बात के बहस, मतभेद और तनाव बढ़ने लगता है। इसकी वजह यह बताई गई है कि शीशा आपसी गुस्से और चिड़चिड़ेपन को दोगुना करके उन्हीं की ओर लौटा देता है। इससे रिश्ते का प्यार और शांति धीरे-धीरे कम होने लगती है।

बीमार सदस्य के कमरे में न रखें शीशा

घर में अगर कोई सदस्य बीमार है, तो रात के समय उसके बिस्तर के सामने आईना बिल्कुल नहीं होना चाहिए। वास्तु गुरु के अनुसार, सोते समय बीमारी और थकान की नकारात्मक ऊर्जा आईने से टकराकर दोगुनी हो जाती है। इससे मरीज की सेहत में सुधार होने में ज्यादा समय लग सकता है।

बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है असर

वास्तु गुरु मान्या के मुताबिक, अगर बच्चों के बिस्तर के सामने आईना रहता है, तो इसका प्रभाव उनके दिमाग पर पड़ सकता है। उनके मन में बेचैनी बढ़ सकती है और रात को नींद पूरी नहीं हो पाती। इसका नतीजा यह होता है कि अगले दिन बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटकने लगता है और वे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ नहीं पाते।

शीशे से जुड़े वास्तु उपाय

अगर आपके बेडरूम की बनावट ऐसी है कि आईने को बिस्तर के सामने से हटाना संभव नहीं है, तो वास्तु गुरु मान्या सलाह देती हैं कि रात को सोते समय उसे किसी कपड़े से ढक दें। इससे सोते समय आपका प्रतिबिंब शीशे में दिखाई नहीं देगा। अगर आप नया आईना लगाना चाहते हैं, तो वास्तु गुरु के अनुसार ड्रेसिंग मिरर को वार्डरोब के अंदर लगाना बेहतर रहता है।

वास्तु गुरु का यह भी कहना है कि जिस तरह रात को आईना देखना ठीक नहीं है, उसी तरह सुबह नींद खुलते ही शीशे में देखने के बजाय सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों के दर्शन करना चाहिए।

घर में आईना लगाने की दिशा को लेकर क्या है मान्यता

वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, घर में आईना उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। वहीं पश्चिम दिशा में शीशा लगाने से पारिवारिक जीवन में अशांति की बात कही जाती है। इसके अलावा घर में जरूरत से ज्यादा शीशे लगाना भी शुभ नहीं माना जाता। टूटा या चटका हुआ आईना घर की ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित करने वाला माना जाता है, इसलिए ऐसे शीशे को हटा देना चाहिए। आईने को हमेशा साफ रखने की भी सलाह दी जाती है।

 इन बातों का भी रखें ध्यान

रात को सोने से पहले आईने में देखने से बचें और बिस्तर के ठीक सामने शीशा न रखें। दंपत्ति, बीमार सदस्य और बच्चों के कमरे में इस नियम का खास ख्याल रखें। शीशा हटाना मुमकिन न हो तो रात में उसे कपड़े से ढक दें। सुबह उठते ही सबसे पहले हथेलियों के दर्शन करें। घर में आईना साफ-सुथरा और सही दिशा में लगाएं तथा टूटे-चटके शीशे को हटा दें। इन नियमों को मानने वालों का कहना है कि छोटी-छोटी सावधानियां घर के माहौल और परिवार की सुख-शांति में सहायक बनती हैं, हालांकि अंतिम फैसला हर व्यक्ति की अपनी आस्था पर निर्भर करता है।

 

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