महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर दिवाली से पहले फैसला, जल्द बुलाया जा सकता है संसद का विशेष सत्र

नई दिल्ली। परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। खबर है कि संसद का विशेष सत्र इसी महीने के आखिर में बुलाया जा सकता है। सरकार इस सत्र में परिसीमन और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पेश करने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि दिवाली से पहले इस मसले पर फैसला ले लिया जाएगा।

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संख्या को लेकर भरोसे में सरकार

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि, सरकार को भरोसा है कि, इन विधेयकों को लोकसभा से पारित कराने के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या है। इसी आत्मविश्वास के साथ वह विशेष सत्र बुलाकर प्रस्तावित विधेयकों को आगे बढ़ाना चाहती है। हालांकि, सरकार केवल अपनी संख्या के भरोसे नहीं बैठी है। जरूरी समर्थन पक्का करने के लिए विपक्षी दलों से बातचीत भी की जा रही है। फिलहाल सरकार विशेष सत्र की तारीखों और उसके कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में जुटी है।

special session of Parliament

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा तेज कर रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में सरकार की इस पहल पर सभी की नजरें टिकी हैं।

 अभी अधिकारिक तौर पर बंद नहीं हुआ है सत्र

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो गया था, लेकिन उसका औपचारिक सत्रावसान अब तक नहीं हुआ है यानी सदन की बैठकें भले खत्म हो चुकी हों, सत्र को आधिकारिक तौर पर बंद नहीं किया गया है। यही तकनीकी स्थिति सरकार के लिए इसी सत्र के तहत विशेष बैठक बुलाने का रास्ता खोले हुए है। सूत्रों के अनुसार विशेष बैठक बुलाने से पहले करीब एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है। फिर भी सत्र की तारीख और कार्यक्रम को लेकर अंतिम निर्णय होना बाकी है।

अप्रैल में गिर गया था विधेयक

सरकार की यह तैयारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कुछ महीने पहले उसे संसद में झटका लग चुका है। बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। विधेयक जरूरी समर्थन जुटाने में नाकाम रहा था। अब सरकार उसी मुद्दे पर दोबारा प्रयास करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि विशेष सत्र का मकसद इन प्रस्तावों को फिर संसद के सामने लाना और उनके लिए आवश्यक समर्थन जुटाना है।

डीएमके और छोटे दलों से संपर्क

सूत्रों के मुताबिक, इस बार सरकार ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) से भी बातचीत शुरू की है। बताया जा रहा है कि, तमिलनाडु चुनाव के बाद डीएमके के कांग्रेस से अलग होने और इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने के बाद यह संपर्क शुरू हुआ। डीएमके के अलावा सरकार कुछ छोटे विपक्षी दलों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि, मतदान से पहले संख्याबल मजबूत करना सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा है।

संविधान संशोधन के लिए क्यों जरूरी है व्यापक समर्थन

संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सामान्य बहुमत काफी नहीं होता। इसके लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई का समर्थन जरूरी होता है। यही वजह है कि, सरकार संख्या के भरोसे के बावजूद विपक्ष से संवाद का रास्ता खुला रखना चाहती है। अप्रैल में विधेयक के गिरने की वजह भी जरूरी समर्थन का न जुट पाना ही बताया गया था।

महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। इसका मकसद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। वहीं परिसीमन का मतलब आबादी के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं और संख्या का नए सिरे से निर्धारण है। दोनों मुद्दे आपस में जुड़े माने जाते हैं, इसलिए सरकार इन्हें एक साथ आगे बढ़ाना चाहती है।

26-27 अक्टूबर के कार्यक्रम को देखकर तय होगी तारीख

विशेष सत्र की तारीख तय करते समय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम को भी ध्यान में रखा जाएगा। यह कार्यक्रम 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में होना है। ऐसे में सरकार इसी आयोजन के आसपास की तारीखों को देखते हुए विशेष बैठक का कार्यक्रम तय कर सकती है।

आधिकारिक घोषणा का इंतजार

एक तरफ सरकार विशेष सत्र की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी तरफ विपक्ष एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर विपक्ष का रुख क्या रहता है और क्या सरकार इस बार जरूरी संख्या जुटा पाती है। फिलहाल विशेष सत्र बुलाने और विधेयकों को पेश करने को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

 

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