
लखनऊ। भाजपा के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और उन पर भारत में अराजकता फ़ैलाने का आरोप लगाया। ब्रजलाल ने कहा, राहुल गांधी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल विदेशी शक्तियों के हाथों की कठपुतली बने हैं। वे अमेरिकी डीप स्टेट की मदद से देश में अराजकता फैला कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को गिराने का प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
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अमेरिका के इशारे पर काम कर रहा विपक्ष
बृजलाल ने कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज किसी भी महाशक्ति से आंख में आंख डालकर बात करता है। भारत की इसी बढ़ती ताकत की वजह से अमेरिका और अन्य विदेशी शक्तियां परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि, इसमें अमेरिकी डीप स्टेट की भूमिका अहम है और कांग्रेस सहित विपक्षी दल उसके इशारे पर काम कर रहे हैं। अमेरिकी डीप स्टेट की मदद से देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है।
बृजलाल ने कहा कि, कांग्रेस सत्ता में नहीं आ पा रही है और आगे भी उसके सत्ता में आने की उम्मीद नहीं है, इसलिए अब विदेशी शक्तियों की मदद से देश में अस्थिरता पैदा करने में जुटी है। उन्होंने सीजेपी को भी इसी साजिश का हिस्सा बताते हुए आम आदमी पार्टी की बी टीम करार दिया। आरोप लगाया कि, राहुल गांधी और उनके सहयोगी दल संवैधानिक संस्थाओं को दबाव में लेकर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाना चाहते हैं।
मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का लगाया आरोप
बृजलाल ने कहा कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी अपने सहयोगियों अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करते हुए पहुंचे थे। उनकी मंशा चुनाव आयोग और एसआईआर जैसे मुद्दों पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलने की थी। मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से मना करते हुए ईमेल के जरिए उन्हें संवैधानिक परंपराओं से अवगत कराया। कांग्रेस ने इस पत्र को अपने एक्स हैंडल पर सार्वजनिक कर दिया।
बृजलाल का आरोप है कि, इसके बाद कांग्रेस की केरल इकाई ने मुख्य न्यायाधीश के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए उनसे इस्तीफा मांगा। यहां तक कहा गया कि अगर मुख्य न्यायाधीश कार्रवाई नहीं कर सकते, तो पद छोड़ दें, उनकी जगह दूसरा व्यक्ति नियुक्त कर लिया जाएगा। बृजलाल ने इसे सर्वोच्च न्यायपालिका का घोर अपमान और मुख्य न्यायाधीश को डराने-धमकाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर मुख्य न्यायाधीश राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से मिल लेते, तो राहुल राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद की तरह एक बार फिर झूठा नैरेटिव खड़ा कर देते।
जस्टिस बहरूल इस्लाम का दिया उदाहरण
बृजलाल ने कहा कि, कांग्रेस की प्रतिबद्ध न्यायपालिका की सोच उसके पुराने इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने जस्टिस बहरूल इस्लाम का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें 1962 और 1968 में राज्यसभा भेजा। इसके बाद वह गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश बने। वर्ष 1980 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। बृजलाल ने आरोप लगाया कि बिहार के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को सहकारी बैंक घोटाले से जुड़े मामले में राहत देने के बाद बहरूल इस्लाम ने सर्वोच्च न्यायालय से इस्तीफा दिया। इसके बाद कांग्रेस ने 1983 में उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेज दिया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1973 में केशवानंद भारती मामले के फैसले के बाद इंदिरा गांधी सरकार ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को दरकिनार कर जस्टिस एएन रे को मुख्य न्यायाधीश बनाया। इसी तरह आपातकाल के दौरान एडीएम जबलपुर मामले में जीवन के अधिकार के पक्ष में असहमति जताने वाले जस्टिस एचआर खन्ना की वरिष्ठता की अनदेखी कर जस्टिस एमएच बेग को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
बृजलाल ने कहा कि, कांग्रेस ने हमेशा उन्हीं न्यायाधीशों को तरजीह दी, जो सरकार की उम्मीदों के मुताबिक काम करें। उनके अनुसार राहुल गांधी भी अपनी पार्टी की उसी पुरानी सोच पर चलते हुए प्रतिबद्ध न्यायपालिका चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से बाहर होने की वजह से कांग्रेस अब न्यायपालिका पर दबाव बनाने और विदेशी ताकतों की मदद से देश में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रही है।
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