नई दिल्ली। भारत ने कृषि क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बनने का गौरव प्राप्त किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत ने 15.18 करोड़ टन चावल उत्पादन के साथ यह मुकाम हासिल किया है, जबकि चीन का उत्पादन 14.5 करोड़ टन रहा।
25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में की गईं जारी
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई उन्नत और उच्च उपज देने वाली किस्में जारी कीं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन नई किस्मों से न केवल फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि किसानों की आय को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ये नई किस्में तेजी से किसानों तक पहुंचाई जाएं।
उच्च उपज वाले बीजों के विकास में बड़ी सफलता
मंत्री ने कहा कि भारत ने ज्यादा उपज देने वाले बीजों के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने बताया कि 1969 में राजपत्र अधिसूचना प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक कुल 7205 फसल किस्में अधिसूचित की जा चुकी हैं। इनमें चावल, गेहूं, मक्का, ज्वार, दालें, तिलहन और फाइबर फसलें शामिल हैं।
शिवराज चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अब तक 3236 उच्च उपज वाली किस्मों को मंजूरी दी है, जबकि 1969 से 2014 के बीच 3969 किस्में अधिसूचित हुई थीं।
भोजन की कमी से वैश्विक खाद्य प्रदाता तक
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत अब भोजन की कमी वाला देश नहीं रहा, बल्कि वैश्विक खाद्य प्रदाता बन चुका है।
उन्होंने कहा,
“चावल उत्पादन में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। यह देश के किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि नीतियों की सामूहिक सफलता है।”
उन्होंने यह भी बताया कि देश में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार उपलब्ध है, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित है। साथ ही भारत अब विदेशी बाजारों में भी बड़े पैमाने पर चावल की आपूर्ति कर रहा है।
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