Mughal History: अकबर का बचपन का नाम क्या था? जानिए बदरुद्दीन से जलालुद्दीन बनने का सफर

तीसरे मुगल बादशाह अकबर के नाम को लेकर आज भी लोगों में जिज्ञासा बनी रहती है। कोई उन्हें सिर्फ अकबर कहता है, तो कोई बादशाह अकबर। कुछ लोग बदरुद्दीन का जिक्र करते हैं, तो कुछ जलालुद्दीन का। विद्वान भी इस मुद्दे पर एकमत कम ही नजर आते हैं। हालांकि, अबुल फजल के चर्चित ग्रंथ ‘अकबरनामा’ में इन सभी नामों का उल्लेख मिलता है। लगभग 50 साल तक गद्दी संभालने वाले इस बादशाह का सबसे प्रचलित नाम अकबर ही रहा। आइये जानते हैं कि बचपन का बदरुद्दीन आगे चलकर जलालुद्दीन कैसे बना और उनका नाम बार-बार क्यों बदला गया।

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बचपन में ही बदला गया नाम

ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक अकबर का बचपन का नाम बदरुद्दीन था। वर्ष 1546 ईस्वी में, जब वे करीब चार साल के थे, उनका खतना हुआ। उसी मौके पर पिता हुमायूं ने उनका नाम बदलकर जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर रख दिया। खास बात यह है कि यह बदलाव न तो किसी सत्ता संघर्ष का नतीजा था और न ही बादशाह बनने के बाद की घटना। यह उनके बचपन में ही हो चुका था।

कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि, उन्हें अबुल-फतह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर भी कहा जाता था। इसके अलावा उन्हें अकबर-ए-आजम, शहंशाह अकबर और महाबली शहंशाह जैसे नामों से भी जाना गया। इतिहास की समझ रखने वालों के अनुसार शुरुआती नाम निश्चित रूप से पिता हुमायूं ने रखे थे, जबकि बाद के नाम उनके बादशाह बनने और समय बीतने के साथ सम्मान के तौर पर जुड़ते चले गए।

कठिन दौर में हुआ जन्म

अकबर का जन्म 15 अक्तूबर 1542 को अमरकोट में हुआ था। उनके पिता मुगल बादशाह हुमायूं और माता हमीदा बानो बेगम थीं। उस समय हुमायूं की सत्ता डगमगाई हुई थी और उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वियों से लगातार संघर्ष करना पड़ रहा था। ऐसे ही कठिन दौर में अकबर ने जन्म लिया। आगे चलकर वे मुगल साम्राज्य के तीसरे शासक बने और 1556 से 1605 तक शासन किया। उनका पूरा शाही नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर था।

क्या हैं जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के मायने

जलालुद्दीन का शाब्दिक अर्थ सामान्य तौर पर धर्म की महिमा या धर्म का गौरव बताया जाता है। मुहम्मद इस्लामी नामों में प्रचलित एक सम्मान-सूचक नाम है। वहीं अकबर अरबी मूल का शब्द है, जिसका अर्थ महान या सबसे बड़ा होता है। नाम के इन अर्थों से समझा जा सकता है कि, यह एक राजकुमार के लिए चुना गया औपचारिक और सम्मानपूर्ण नाम था।

बदरुद्दीन का क्या है अर्थ

अरबी भाषा में ‘बदर’ का संबंध पूर्णिमा के चांद से है। इसी आधार पर बदरुद्दीन का अर्थ प्रायः ‘धर्म का पूर्ण चांद’ बताया जाता है। कुछ विवरणों में कहा गया है कि, अकबर का जन्म पूर्णिमा के दिन हुआ था, इसलिए उन्हें यह नाम दिया गया। हालांकि, हर ऐतिहासिक स्रोत इस कारण की समान रूप से पुष्टि नहीं करता। इसे एक प्रचलित व्याख्या के रूप में देखना ही बेहतर है, निर्विवाद तथ्य के रूप में नहीं।

उस दौर में बच्चों को जन्म के समय या बचपन में अलग-अलग नाम दिया जाना कोई असामान्य बात नहीं थी। परिवार के भीतर इस्तेमाल होने वाला नाम और राजपरिवार में औपचारिक अवसर पर दिया गया नाम अलग हो सकता था। अकबर के मामले में यही बात सबसे अहम लगती है। बदरुद्दीन उनका शुरुआती नाम था, जबकि जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर बाद में उनका औपचारिक नाम बना।

नाम किसने और कब बदला

लोकप्रिय संदर्भ वेबसाइट ‘भारत-कोश’ के अकबर संबंधी परिचय के अनुसार, वर्ष 1546 में खतने के अवसर पर हुमायूं ने उनका नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर रखा। यह विवरण बताता है कि नाम का यह परिवर्तन अकबर के बादशाह बनने से करीब दस साल पहले हो चुका था। तब अकबर एक छोटे बच्चे थे और शासन में उनकी कोई स्वतंत्र भूमिका या राजनीतिक अधिकार नहीं था।

इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि अकबर ने खुद बादशाह बनने के बाद अपना नाम बदला। उपलब्ध विवरणों के अनुसार यह निर्णय उनके पिता हुमायूं ने लिया था। नामकरण का यह अवसर संभवतः परिवार और दरबार की परंपराओं से जुड़ा रहा होगा।

क्या नाम बदलने के पीछे था राजनीतिक कारण

कुछ दस्तावेजों में दावा किया जाता है कि, हुमायूं ने अपने बेटे का नाम किसी खास राजनीतिक संदेश देने के लिए बदला था। उस जमाने में शाही परिवारों में औपचारिक नाम, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएं और राजकीय पहचान आपस में गहराई से जुड़ी रहती थीं। इसलिए संभव है कि नया नाम राजकुमार की औपचारिक पहचान को ध्यान में रखकर चुना गया हो।

नाम के अर्थ को देखें तो जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर एक गरिमापूर्ण शाही नाम था। लेकिन केवल नाम का अर्थ इस बात का प्रमाण नहीं है कि नामकरण किसी अभियान, भविष्यवाणी या खास राजनीतिक योजना के तहत हुआ था।

कैसे मशहूर हुआ अकबर नाम

अकबर उनके औपचारिक नाम का ही एक हिस्सा था। आगे चलकर यही नाम उनकी सबसे ज्यादा पहचानी जाने वाली पहचान बन गया। इतिहास में उन्हें अकबर, बादशाह अकबर और जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के नाम से जाना गया। अकबर महान या अकबर-ए-आजम जैसे संबोधन उनके शासन और ऐतिहासिक प्रतिष्ठा से जुड़े बाद के सम्मान-सूचक नाम हैं।

पिता की मृत्यु के बाद अकबर वर्ष 1556 में महज तेरह साल की उम्र में गद्दी पर बैठे। इस घटना के बाद उनका पूरा शाही नाम दस्तावेजों और दरबारी इतिहास में ज्यादा अहमियत पाने लगा, लेकिन नाम की शुरुआत इससे काफी पहले, उनके बचपन में ही हो चुकी थी।

सबसे संतुलित निष्कर्ष

अकबर का बचपन का नाम बदरुद्दीन बताया जाता है। जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर नाम रखे जाने का प्रसंग उनके बादशाह बनने से पहले का है। इस पूरे मामले में सबसे संतुलित उत्तर यही है कि अकबर के नाम में बदलाव उनके बचपन में पिता हुमायूं के समय हुआ। आगे चलकर अकबर ही उनका सबसे मशहूर नाम बना और इतिहास में उनकी पहचान उसी से स्थायी हुई। अबुल फजल के ‘अकबरनामा’ के हवाले से कई जगहों पर नाम बदलने से जुड़ी कहानियों का जिक्र मिलता है।

 

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