AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित होगा UP का ‘रूपम’, क्षमता विकास में प्रदेश देश में अव्वल: CM योगी

  • सिर्फ डिग्री से नहीं आती योग्यता, ‘राइट पर्सन, राइट रोल’ लागू करे क्षमता विकास आयोग: सीएम योगी

  • बीमारू से देश का ग्रोथ इंजन बना यूपी, देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश में, कृषि विकास दर 8 से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई

लखनऊ। लोक सेवक की सफलता का पैमाना केवल फाइलें निपटाना नहीं है, बल्कि यह है कि उसके पास आया आम नागरिक संतुष्ट होकर लौटा या नहीं। किसी बुजुर्ग को पेंशन के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े और आम नागरिक की समस्या का तय समय में समाधान हो, यही लोक सेवा का असली उद्देश्य है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के लोक भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला ‘साधना श्रृंखला-2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने के दौरान कही।

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ऑफिस-ऑफिस’ सीरियल का किया जिक्र

सीएम ने चर्चित धारावाहिक ‘ऑफिस-ऑफिस’ का जिक्र करते हुए कहा कि, व्यवस्था में ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए, जिसमें आम आदमी अपने छोटे-छोटे कामों के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटकता रहे। इसके लिए प्रशासन को सक्षम, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाना जरूरी है।

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लोकभवन में आयोजित सत्र का शुभारंभ मुख्यमंत्री और केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर दोनों ने मिलकर ‘उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स’ और ‘नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क’ का भी शुभारंभ किया।

सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास को प्रशासनिक कार्यसंस्कृति बदलने का राष्ट्रीय अभियान बताया। साथ ही उत्तर प्रदेश में इसे आगे बढ़ाने के लिए तीन अहम घोषणाएं भी की। उन्होंने क्षमता विकास से जुड़े संस्थान को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने, पंचायतों और नगर निकायों के कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने और अधिकारियों-कर्मचारियों की दक्षता को उनकी जिम्मेदारियों और पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

‘ऑफिस-ऑफिस’ जैसी स्थिति से मुक्त हो आम नागरिक

मुख्यमंत्री ने कहा कि, व्यवस्था की नाकामी तब दिखती है, जब कोई विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ ले कि, संबंधित काम किसी दूसरे विभाग का है। इसी तरह, जब कोई अधिकारी या कर्मचारी नागरिक की समस्या समझकर उसका हल निकालने के बजाय उसे टाल देता है, तो जनता का भरोसा व्यवस्था से उठने लगता है। उन्होंने कहा कि, कर्मचारी को पदोन्नति और अपने अधिकारों की जानकारी तो होती है, लेकिन कई बार अपने दायित्वों के प्रति अपेक्षित जागरूकता नहीं होती। योग्य और जिम्मेदार कार्मिकों की तैनाती और लगातार क्षमता विकास से प्रशासन को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है।

संतुष्ट होकर लौटें लोग

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक सेवक की कामयाबी इसमें है कि उसके पास आने वाला बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद तय समय में समाधान पाकर संतुष्ट होकर लौटे। अगर किसी नागरिक को न्याय या समाधान के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ें, तो प्रशासनिक प्रक्रिया का मकसद पूरा नहीं होता।

उन्होंने कहा कि, तकनीक शासन को रफ्तार दे सकती है, प्रक्रियाओं को आसान बना सकती है और फैसलों को बेहतर कर सकती है, लेकिन व्यवस्था को संवेदनशील बनाने का काम कार्मिक का सेवा भाव करता है, इसलिए क्षमता विकास का मकसद सिर्फ प्रशिक्षण पूरा कराना या प्रमाणपत्र बांटना नहीं, बल्कि लोक सेवकों की कार्यशैली और नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं में सचमुच सुधार लाना होना चाहिए।

यूपी का ‘रूपम’ बनेगा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख पहल गिनाईं। पहली पहल के तहत उन्होंने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने में सहयोग करे। उन्होंने कहा कि नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स शासन के कामकाज को तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए लोक सेवकों को इन बदलावों के हिसाब से तैयार करना जरूरी है।

दूसरी पहल में ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगरपालिका परिषदों और नगर निगमों के कार्मिकों की क्षमता विकास व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि, विकसित भारत का लक्ष्य पाने के लिए स्थानीय निकायों को सक्षम, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाना होगा। पंचायतें और नगर निकाय विकास की बुनियादी इकाइयां हैं, इसलिए वहां के कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना जरूरी है।

तीसरी पहल ‘राइट पर्सन, राइट रोल’ यानी सही पद पर सही अधिकारी की तैनाती से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से कहा कि कार्मिकों की दक्षता, उपलब्धियों, सक्सेस स्टोरी और वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) को उनकी जिम्मेदारियों और पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम किया जाए। इससे अधिकारियों-कर्मचारियों को उनकी क्षमता के अनुसार दायित्व सौंपना आसान होगा।

यूपी के 19.26 लाख कार्मिक iGOT से जुड़े

मुख्यमंत्री ने बताया कि, उत्तर प्रदेश के 19 लाख 26 हजार सरकारी कार्मिक iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। प्रदेश के कर्मचारी अब तक करीब चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। साथ ही प्रदेश के 334 से ज्यादा प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़ चुके हैं।

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उन्होंने कहा कि क्षमता विकास की असली सफलता प्रशिक्षण के बाद लिए गए बेहतर फैसलों, आसान हुई प्रक्रियाओं और नागरिकों को मिली बेहतर सेवाओं से नापी जानी चाहिए। उन्नति पोर्टल प्रशिक्षण संस्थानों को अपने अनुभव, विशेषज्ञता और श्रेष्ठ कार्यपद्धतियां साझा करने का मौका देता है, जिससे एक संस्थान के सफल प्रयोग दूसरे संस्थानों के काम आ सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोक सेवकों को नई जरूरतों के अनुरूप तैयार करना समय की मांग है। तकनीक और प्रशिक्षण के तालमेल से प्रशासनिक फैसलों की गुणवत्ता और सेवाओं के असर में सुधार किया जा सकता है।

क्षमता विकास में यूपी पहले स्थान पर

कार्यक्रम में बताया गया कि, राज्यों के क्षमता विकास संबंधी प्रयासों और प्रशासनिक उपलब्धियों के मूल्यांकन में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर रहा। राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे नंबर पर रहे। मुख्यमंत्री ने संबंधित राज्यों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।

उत्तर प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले विभागों को तीन श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया। श्रेणी ‘क’ में गृह विभाग को प्रथम और बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग को द्वितीय पुरस्कार मिला। श्रेणी ‘ख’ में उच्च शिक्षा विभाग पहले और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग दूसरे स्थान पर रहा। श्रेणी ‘ग’ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को प्रथम और प्रशासनिक सुधार विभाग को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि गृह विभाग ने एक करोड़ से ज्यादा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सराहा यूपी का प्रदर्शन

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने क्षमता विकास में उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए राज्य प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी गई है। दस्तावेजों के सत्यापन के लिए राजपत्रित अधिकारियों पर निर्भरता खत्म करने, सरकारी भर्तियों में साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त करने और रोजगार मेलों जैसे कदमों का मकसद युवाओं और नागरिकों का शासन पर भरोसा मजबूत करना रहा है।

उन्होंने बताया कि iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर देशभर के 1.70 करोड़ से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी पंजीकृत हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के 19 लाख से अधिक कार्मिक शामिल हैं। उन्नति पोर्टल से भी प्रदेश के बड़ी संख्या में प्रशिक्षण संस्थान जुड़े हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश सुशासन और क्षमता विकास के क्षेत्र में दूसरे राज्यों के लिए मिसाल बना रहेगा।

‘नागरिक देवो भवः’ लोक सेवा का मूलमंत्र

क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में अधिकारियों को पहल करने, निर्णय क्षमता बढ़ाने, नेतृत्व विकसित करने और तकनीक के जरिए नवाचार को बढ़ावा देने का अवसर मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘नागरिक देवो भवः’ मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक सेवकों को नागरिकों की जरूरतों और सेवा भावना पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।

19 लाख से अधिक कार्मिक iGOT पोर्टल पर पंजीकृत 

मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल ने बताया कि, प्रदेश में 19 लाख से अधिक कार्मिक iGOT पोर्टल पर पंजीकृत हैं और पौने चार करोड़ से ज्यादा पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने क्षमता विकास को विभागीय कार्य निष्पादन से जोड़ने, प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने, संकाय विकास, आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, डिजिटल तकनीक और एआई के उपयोग तथा प्रशिक्षण के नतीजों के मूल्यांकन को प्रदेश की मुख्य प्राथमिकताएं बताया।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान, मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल, आयोग की सदस्य डॉ. अल्का मित्तल, आयोग के सचिव जगदीप गुप्ता और डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के महानिदेशक एम. देवराज सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

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