आईसीयू में भर्ती हैं लालकृष्ण आडवाणी, अपोलो ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन, मिलने पहुंचे नड्डा

  • छाती में संक्रमण के कारण शुक्रवार शाम कराए गए थे भर्ती,

  • डॉक्टरों ने बताया- हालत स्थिर, कड़ी निगरानी में हैं 98 वर्षीय दिग्गज नेता

नई दिल्ली। पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। छाती में संक्रमण (चेस्ट इन्फेक्शन) की शिकायत के बाद उन्हें शुक्रवार को अस्पताल लाया गया। अस्पताल प्रशासन ने हेल्थ बुलेटिन जारी कर बताया है कि, आडवाणी फिलहाल आईसीयू में हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।

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शुक्रवार शाम 7:30 बजे लाया गया अस्पताल

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार 16 अक्टूबर को सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद 98 वर्षीय आडवाणी को शुक्रवार देर शाम करीब 7:30 बजे अपोलो अस्पताल लाया गया। उम्र के इस पड़ाव पर किसी भी संक्रमण को गंभीरता से लिया जाता है, इसलिए उन्हें सीधे गहन निगरानी में रखा गया है। अस्पताल की ओर से अभी तक किसी बड़ी जटिलता की जानकारी नहीं दी गई है।

 अस्पताल  ने जारी किया बुलेटिन

अपोलो अस्पताल ने अपने बुलेटिन में बताया कि वरिष्ठ नेता का इलाज चल रहा है और उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। वे न्यूरोलॉजी के वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. विनीत सूरी की देखरेख में हैं।

LAL KRISHNA AADVANI

अस्पताल ने साफ किया कि उन्हें डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। आने वाले दिनों में उनकी सेहत को लेकर अस्पताल की ओर से नए बुलेटिन जारी किए जा सकते हैं।

जेपी नड्डा पहुंचे हालचाल जानने

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा शनिवार सुबह नई दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल पहुंचे और आडवाणी की सेहत की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों से भी बातचीत की। पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाने वाले आडवाणी के स्वास्थ्य को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल है और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।

इस साल पहले भी हुए थे भर्ती

यह पहला मौका नहीं है जब आडवाणी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण अस्पताल जाना पड़ा है। इसी साल मई में उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब वे कुछ दिन अस्पताल में रहे और इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।

इससे पहले दिसंबर 2024 में भी पूर्व उप प्रधानमंत्री को मेडिकल जांच और इलाज के लिए इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती कराया गया था। उस समय भी वे न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सूरी की निगरानी में थे। यानी बीते लगभग दो वर्षों में उन्हें कई बार चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत पड़ी है।

तीन बार संभाली भाजपा की कमान

भाजपा के इस दिग्गज नेता का पार्टी के विस्तार में बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने तीन बार पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वे 1986 से 1990 तक, फिर 1993 से 1998 तक और उसके बाद 2004 से 2005 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। पार्टी को संगठन के स्तर पर मजबूत करने और उसे राष्ट्रीय राजनीति की मुख्य धारा तक पहुंचाने में उनकी भूमिका को आज भी अहम माना जाता है।

देश की राजनीति में लंबा सफर

आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था। वे भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में गिने जाते हैं और 1980 में पार्टी की स्थापना के समय अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनकी अहम भूमिका रही। वाजपेयी सरकार में वे गृह मंत्री रहे और बाद में उप प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। लंबे समय तक वे गुजरात की गांधीनगर सीट से लोकसभा में पहुंचते रहे।

1990 की उनकी राम रथयात्रा भारतीय राजनीति के बड़े घटनाक्रमों में शामिल मानी जाती है। इस यात्रा ने भाजपा को देशव्यापी पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। वर्ष 2024 में सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया। दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहे आडवाणी आज भी पार्टी के मार्गदर्शक के रूप में सम्मान के साथ देखे जाते हैं।

पार्टी के लिए क्यों खास हैं आडवाणी

भाजपा की मौजूदा पीढ़ी के कई नेताओं ने आडवाणी के संगठन कौशल के दौर में ही राजनीति की शुरुआत की या आगे बढ़े, ऐसा पार्टी के भीतर माना जाता है। संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और विचारधारा को जनता तक पहुंचाने की उनकी शैली आज भी पार्टी में याद की जाती है। यही कारण है कि उनकी सेहत की खबर आते ही पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह उनके हालचाल को लेकर पूछताछ बढ़ गई है और नेताओं के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।

बुजुर्गों में संक्रमण क्यों बनता है चिंता की वजह

चिकित्सा विशेषज्ञ आमतौर पर बताते हैं कि अधिक उम्र में फेफड़ों और छाती से जुड़े संक्रमण का असर शरीर पर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। यही वजह है कि, ऐसे मरीजों को अक्सर एहतियात के तौर पर आईसीयू में रखा जाता है, ताकि उनकी सांस, ऑक्सीजन स्तर और अन्य अंगों की लगातार निगरानी की जा सके। आईसीयू में भर्ती होने का मतलब हमेशा हालत गंभीर होना नहीं होता, लेकिन निगरानी का स्तर अधिक रखा जाता है। आडवाणी के मामले में भी अस्पताल ने फिलहाल हालत स्थिर बताई है।

बार-बार अस्पताल जाने से बढ़ी चिंता

उम्र के साथ बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत ने उनके प्रशंसकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अस्पताल का कहना है कि फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है, जो राहत की बात है। चिकित्सक छाती के संक्रमण के इलाज के साथ उनकी समग्र सेहत पर भी नजर रख रहे हैं।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आडवाणी को आईसीयू में कितने दिन रहना पड़ेगा। यह उनके इलाज के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया और डॉक्टरों के आकलन पर निर्भर करेगा। अस्पताल की ओर से अगला स्वास्थ्य बुलेटिन आने पर तस्वीर कुछ और साफ हो सकती है। तब तक देशभर में उनके समर्थक और शुभचिंतक सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

 

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