
इंफाल। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम गुरुवार, 15 अक्टूबर को पुलिस के समन पर इंफाल से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि वह अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे और न्याय होकर रहेगा। उन्होंने अपनी लड़ाई को सिर्फ खुद पर लगे आरोपों तक सीमित न बताते हुए अपने समुदाय के दशकों पुराने दुख और अन्याय का मुद्दा भी उठाया। दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
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जेएनयू ने इस मामले में 9 अक्टूबर को अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की।
समन के बाद दिल्ली रवाना
पुलिस ने अकोइजम को समन भेजा है। बुधवार को दिल्ली पुलिस ने उनके आवास के बाहर नोटिस भी चस्पा किया था। इसके अगले दिन गुरुवार को वह मणिपुर की राजधानी इंफाल से दिल्ली के लिए रवाना हुए। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा, मैं पुलिस के समन की वजह से वहां जा रहा हूं। चिंता मत कीजिए, न्याय होकर रहेगा। यह उन सभी अन्यायों को दूर करने की शुरुआत है, जिनका सामना मेरे लोगों ने दशकों से किया है। अन्याय के खिलाफ लड़ने की यह शुरुआत है और न्याय होकर रहेगा।
अकोइजम ने आगे कहा कि, उनकी लड़ाई केवल उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ नहीं है। वह उन दशकों के दुख और परेशानियों के लिए भी लड़ेंगे, जो उनके समुदाय ने झेली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि आज 15 अक्टूबर है।
कैसे सामने आया मामला
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मामला इस साल मई में तब चर्चा में आया, जब एक छात्रा ने वायवा परीक्षा के दौरान हुए अपने कथित अनुभव को साथी छात्रों से साझा किया। एक रिपोर्ट में बताया गया कि यह बातचीत एक अनौपचारिक व्हाट्सएप ग्रुप में हुई। इसके बाद कई और छात्राएं भी अपने अनुभवों के साथ सामने आईं।
रिपोर्ट्स अनुसार, कम से कम 11 छात्राओं ने विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) में शिकायत दर्ज कराई। छात्राओं का आरोप है कि प्रोफेसर कक्षाओं के दौरान अनुचित भाषा का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि, अतिरिक्त अंक देने का प्रलोभन देकर अनुचित प्रस्ताव रखे गए।
कुछ छात्राओं ने कहा कि उन्हें बैठकों या आयोजनों के बहाने परिसर स्थित आवास पर बुलाया गया, जहां उनके साथ अनुचित व्यवहार का प्रयास किया गया। कुछ छात्राओं ने अश्लील टिप्पणियों के भी आरोप लगाए हैं। ये सभी आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और इनकी अदालत में पुष्टि होना बाकी है। शिकायतें मिलने के बाद आईसीसी ने कार्यवाही शुरू की और छात्राओं से अपने बयान दर्ज कराने को कहा।
जांच के बाद जेएनयू की कार्रवाई
जेएनयू ने आरोपों की जांच के बाद 9 अक्टूबर को अकोइजम को सेवा से बर्खास्त कर दिया। वह विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र से जुड़े थे। विश्वविद्यालय के आदेश के मुताबिक, आंतरिक समिति ने जांच में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर ही कुलपति ने उन पर बर्खास्तगी का दंड लगाया। यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू हुई। अकोइजम पर विश्वविद्यालय की 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
11 अक्टूबर को दर्ज हुई थी FIR
दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की है। यह एफआईआर बीते 11 अक्टूबर को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में दर्ज की गई। इसमें अकोइजम को नामजद किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने सांसद के आवास के बाहर समन से जुड़ा नोटिस चस्पा किया। अब वह इसी समन पर पूछताछ के लिए दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं।
भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
इस मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन भी सौंपा। इसमें मणिपुर की इनर मणिपुर सीट से कांग्रेस सांसद अकोइजम के खिलाफ लगे आरोपों के मामले में कार्रवाई की मांग की गई है। भाजपा का सवाल है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने अब तक अपना रुख साफ क्यों नहीं किया।
अब सबकी नजर इस पर है कि दिल्ली पहुंचकर अकोइजम पुलिस के सामने क्या बयान देते हैं और जांच किस दिशा में बढ़ती है। एक तरफ जेएनयू की आंतरिक जांच और बर्खास्तगी की कार्रवाई है, दूसरी तरफ पुलिस की आपराधिक जांच। इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष के पास पहुंचे भाजपा के ज्ञापन पर क्या फैसला होता है, यह भी राजनीतिक तौर पर अहम रहेगा। अकोइजम ने अब तक अपने खिलाफ लगे आरोपों पर विस्तृत सफाई नहीं दी है और सिर्फ न्याय की बात कही है।
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