दिल्ली की रोहिणी जेल में धारदार हथियार से विचाराधीन कैदी की हत्या, ये है विवाद की वजह

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की रोहिणी जेल से रविवार को एक हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया, जिसने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। खबर है कि, जेल परिसर के भीतर एक विचाराधीन कैदी को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। मृतक की पहचान प्रमोद के रूप में हुई है। उसे आर्म्स एक्ट के एक मामले में इस जेल में बंद किया गया था। पुलिस के मुताबिक, जेल के अंदर ही उसके साथी कैदियों ने धारदार हथियार से उस पर हमला किया। इस हमले में उसकी मौत हो गई।

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दोपहर 12 बजे हुई वारदात

पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, यह वारदात रविवार दोपहर करीब 12 बजे हुई। इस दौरान जेल परिसर में प्रमोद पर अचानक तेज धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। हमले में उसे गंभीर चोटें आईं। आरोप है कि, प्रमोद के ही साथी कैदियों भोला और मुकेश ने उस पर हमला किया और उसे लहूलुहान कर दिया। वारदात के तुरंत बाद जेल प्रशासन हरकत में आया और घायल प्रमोद को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया ले गया, लेकिन गंभीर चोटों की वजह से इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

तंबाकू बिक्री को लेकर था विवाद

फ़िलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। हालांकि, सूत्रों के हवाले से बताया जा रहे है कि, प्रमोद जेल के भीतर कथित तौर पर तंबाकू बेचने का काम करता था। जेल परिसर में प्रतिबंधित सामग्री की खरीद-फरोख्त को लेकर कैदियों के बीच आए दिन विवाद की खबरें सामने आती रही हैं। बताया जा रहा है कि, इसी तंबाकू के कारोबार को लेकर प्रमोद का अन्य कैदियों से पहले भी विवाद हो चुका था।

Rohini jail

पुलिस को आशंका है कि, इसी पुरानी रंजिश के चलते प्रमोद पर हमला किया गया। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि, हत्या की असली वजह की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या यह विवाद अचानक भड़का या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी।

गैंगवार से जोड़कर नहीं देखा जा रहा मामला

रोहिणी जेल पहले भी कई बार कैदियों के बीच हिंसक झड़प और गैंगवार की घटनाओं को लेकर चर्चा में रही है। हालांकि, पुलिस और जेल प्रशासन ने फिलहाल इस घटना को किसी संगठित गैंगवार से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। शुरुआती जांच में यह मामला व्यक्तिगत विवाद और आपसी रंजिश से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। बावजूद इसके, पुलिस किसी भी एंगल को खारिज नहीं कर रही है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

जेल में हथियार पहुंचने पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि, जेल के भीतर धारदार हथियार आखिर कैसे पहुंचा। जेलों में कैदियों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर कड़े नियम लागू होते हैं, बावजूद इसके इस तरह की वारदात होना जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में खामियों की ओर इशारा करता है। पुलिस और जेल अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि, हथियार जेल परिसर तक किस माध्यम से पहुंचा और इसमें किसी जेलकर्मी या अन्य कैदी की भूमिका तो नहीं थी।

पुलिस और जेल प्रशासन ने जारी किया बयान

मामले की जांच पुलिस और जेल प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। जांच एजेंसियां घटनास्थल का मुआयना कर चुकी हैं और सबूत जुटाने में जुटी है। आरोपी कैदी भोला और मुकेश की भूमिका को लेकर पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि, हमले में उनकी सीधी संलिप्तता थी या इसमें कोई और भी शामिल था। इसके अलावा जेल में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जिससे घटना का पूरा क्रम सामने आ सके।

जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने राजधानी की जेलों में सुरक्षा प्रबंधों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बीते कुछ वर्षों में दिल्ली की विभिन्न जेलों से कैदियों के बीच झड़प, हमले और हत्या जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं, जिसके चलते जेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि, जेल परिसर में प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र और नियमित तलाशी अभियान चलाए जाने की जरूरत है।

पुलिस को उम्मीद है कि, जल्द ही इस हत्याकांड से जुड़े सभी पहलू स्पष्ट हो जाएंगे। मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस पूरे घटनाक्रम को लेकर सतर्कता से पड़ताल कर रही है।

 

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