
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जब भी उड़ती हुई कारों, हैरतअंगेज स्टंट्स और रोंगटे खड़े कर देने वाले पुलिसिया तेवरों का जिक्र होता है, तो एक ही नाम सबसे पहले आता है और वह नाम है रोहित शेट्टी का। हिंदी सिनेमा के ये दिग्गज निर्देशक आज अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं।
रोहित शेट्टी आज केवल एक नाम नहीं, बल्कि बॉलीवुड में कामयाबी की एक गारंटी बन चुके हैं, जिन्होंने ‘सिंघम’ और ‘सूर्यवंशी’ जैसी फिल्मों के जरिए एक्शन की परिभाषा ही बदल दी है। उनकी फिल्मों की पहचान बन चुके तेज रफ्तार स्टंट्स और जबरदस्त मारधाड़ के पीछे दरअसल एक बेटे की अपने पिता को दी गई सच्ची श्रद्धांजलि छिपी है। बहुत कम लोग इस हकीकत से वाकिफ हैं कि रोहित ने एक्शन फिल्मों की दुनिया में कदम रखने का फैसला अपने पिता एमबी शेट्टी से प्रेरित होकर ही लिया था।
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पिता से सीखा जज्बा और जूनून
रोहित शेट्टी के पिता एम.बी. शेट्टी 1970 और 80 के दशक के एक अत्यंत प्रतिष्ठित स्टंटमैन और एक्शन कोरियोग्राफर थे। बचपन में रोहित ने अपने पिता को काम के प्रति गजब का समर्पण दिखाते देखा था। वे अक्सर देखते कि, उनके पिता शूटिंग के दौरान लगने वाली गंभीर चोटों और खून-खराबे की परवाह किए बिना अपने काम में जुटे रहते थे। पिता को पर्दे पर जोखिम उठाते देख नन्हे रोहित के मन में एक्शन फिल्मों के प्रति एक गहरा जुनून और सम्मान पैदा हुआ।

हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था, जब रोहित 7-8 साल के थे, तभी साल 1982 में उनके पिता का निधन हो गया। पिता के निधन के बाद परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई। ऐसे कठिन दौर में उनकी मां रत्ना शेट्टी ने हार नहीं मानी और अकेले ही संघर्ष करते हुए रोहित को फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार प्रेरित किया।
‘फूल और कांटे’ से की करियर की शुरुआत
संघर्ष की इसी आग में तपकर रोहित ने महज 17 साल की उम्र में साल 1991 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘फूल और कांटे’ से अपने करियर की शुरुआत की। उस दौरान उन्होंने निर्देशक कुकू कोहली के साथ बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम शुरू किया था। उन शुरुआती दिनों में रोहित ने सफलता का स्वाद चखने के लिए हर छोटा-बड़ा काम पूरी ईमानदारी से किया। उन्होंने सेट पर अभिनेत्रियों की साड़ियां प्रेस करने से लेकर, स्पॉट बॉय का काम करने और यहां तक कि स्टंट डबल बनकर जोखिम भरे सीन करने में भी कोई संकोच नहीं किया।
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उनके जीवन में एक लंबा दौर ऐसा रहा जहां उन्होंने फर्श से अर्श तक पहुंचने के लिए कड़ा परिश्रम किया। साल 2003 में उन्हें पहली बार फिल्म ‘जमीन’ निर्देशित करने का मौका मिला, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई और रोहित के करियर पर सवालिया निशान लग गए।
असफलताएं भी नहीं कर सकीं कमजोर
असफलता के उस दौर में भी रोहित कमजोर नहीं पड़े। वह फिर से उठे और दौड़ने की हिम्मत जुटाई। साल 2006 में आई उनकी फिल्म ‘गोलमाल’ ने न केवल उनकी किस्मत बदली बल्कि उन्हें कॉमेडी फिल्मों का एक नया सुल्तान बना दिया। इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 2011 में आई उनकी फिल्म ‘सिंघम’ ने उन्हें भारतीय सिनेमा में एक्शन का निर्विवाद बादशाह घोषित कर दिया।
इसके बाद रोहित शेट्टी ने ‘सिंघम रिटर्न्स’, ‘सिम्बा’, ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ और ‘सूर्यवंशी’ जैसी एक के बाद एक कई ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर बॉक्स ऑफिस पर अपना एक अलग रूतबा कायम कर लिया। रोहित की सफलता केवल फिल्मों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने छोटे पर्दे पर भी अपना दबदबा कायम किया।
टीवी पर भी मचाया धमाल
रियलिटी शो ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी’ के होस्ट के रूप में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई और ‘कॉमेडी सर्कस’ जैसे शो में जज बनकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। आज रोहित शेट्टी का नाम उस अटूट विश्वास का प्रतीक है जो यह साबित करता है कि मेहनत और लगन से किसी भी मुश्किल हालात को बदला जा सकता है। प्रतिभा और लग्न किसी की मोहताज नहीं होती,बस जरूरत होती है हौसले और हिम्मत की।
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