ब्रिस्बेन वनडे: हरमनप्रीत और मंधाना के अर्धशतक बेकार, भारतीय महिलाएं 214 पर ढेर

स्मृति मंधाना ने एक छोर संभालते हुए आक्रामक रुख अपनाया और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने 68 गेंदों में 58 रनों की पारी खेली

ब्रिस्बेन के मैदान पर मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए पहले महिला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय (वनडे) मुकाबले में भारतीय टीम की बल्लेबाजी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करने में विफल रही। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला भारतीय टीम के लिए उस समय चुनौतीपूर्ण साबित हुआ जब कप्तान हरमनप्रीत कौर और उप-कप्तान स्मृति मंधाना के जुझारू अर्धशतकों के बावजूद पूरी टीम निर्धारित ओवरों के भीतर केवल 214 रनों पर सिमट गई। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण, विशेष रूप से स्पिनर एशले गार्डनर की फिरकी के सामने भारतीय मध्यक्रम और निचला क्रम संघर्ष करता नजर आया। भारतीय पारी की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही और टीम के नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे, जिससे बड़ा स्कोर बनाने की योजना को गहरा झटका लगा।

मैच की शुरुआत में ही ऑस्ट्रेलिया की अनुभवी तेज गेंदबाज मेगन शट ने भारत को करारा झटका दिया। उन्होंने पारी के पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर सलामी बल्लेबाज प्रतिका रावल को अपनी बेहतरीन इनस्विंगर पर पवेलियन भेज दिया। प्रतिका, जो पिछले साल घरेलू विश्व कप के दौरान लगी टखने की चोट से उबरकर लंबे समय बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी कर रही थीं, खाता भी नहीं खोल सकीं। उनके आउट होने के बाद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आईं शेफाली वर्मा भी कुछ खास कमाल नहीं कर पाईं और मात्र 4 रन बनाकर डार्सी ब्राउन की गेंद पर एक आसान कैच दे बैठीं। शुरुआती दो झटकों के बाद भारतीय पारी काफी दबाव में आ गई थी, जिसे संभालने की जिम्मेदारी मंधाना और मध्यक्रम के कंधों पर आ गई।

स्मृति मंधाना ने एक छोर संभालते हुए आक्रामक रुख अपनाया और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने 68 गेंदों में 58 रनों की पारी खेली, जिसमें स्लिप की दिशा में लगाए गए उनके शानदार चौके और दर्शनीय ड्राइव्स ने दर्शकों का दिल जीत लिया। हालांकि, दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। जेमिमा रोड्रिग्स (08) और दीप्ति शर्मा (02) सस्ते में आउट होकर पवेलियन लौट गईं। ऑस्ट्रेलियाई स्पिनरों ने बीच के ओवरों में अपनी कसी हुई गेंदबाजी से रन गति पर अंकुश लगाए रखा। एशले गार्डनर ने अपनी चतुराई भरी गेंदबाजी से जेमिमा को विकेटकीपर के हाथों कैच कराकर भारत की मुश्किलें और बढ़ा दीं। मंधाना के आउट होने के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने मोर्चा संभाला और धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी करते हुए 84 गेंदों में 53 रन बनाए।

हरमनप्रीत कौर ने अपनी पारी के दौरान भारतीय पारी को सम्मानजनक स्कोर तक ले जाने का प्रयास किया, लेकिन वह भी अपनी पारी को बड़े स्कोर में तब्दील करने में असफल रहीं। गार्डनर की एक गेंद पर स्वीप शॉट खेलने के प्रयास में वह डीप में कैच थमा बैठीं। विकेटकीपर बल्लेबाज रिचा घोष ने 23 रनों का योगदान दिया, लेकिन वह भी अपनी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सकीं। जब ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम 200 रन का आंकड़ा भी नहीं छू पाएगी, तब काशवी गौतम ने निचले क्रम में आकर साहस दिखाया। काशवी ने 44 गेंदों में 43 रनों की तेजतर्रार पारी खेली, जिसमें उन्होंने तीन गगनचुंबी छक्के जड़े। मेगन शट की गेंद पर लॉन्ग-ऑन के ऊपर से लगाया गया उनका छक्का पारी का सबसे आकर्षक शॉट रहा।

ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी की बात करें तो एलिसे पेरी और किम गार्थ जैसी प्रमुख गेंदबाजों की अनुपस्थिति के बावजूद उनका आक्रमण बेहद संतुलित दिखा। एशले गार्डनर ने अपने सात ओवरों में महज 33 रन देकर तीन महत्वपूर्ण विकेट चटकाए और भारत की कमर तोड़ दी। मेगन शट और लूसी हैमिल्टन, जिन्हें अंतिम समय में टीम में शामिल किया गया था, ने भी कप्तान के भरोसे को सही साबित किया। अब भारतीय गेंदबाजों के सामने ऑस्ट्रेलिया के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को रोकने की कठिन चुनौती होगी। 214 रनों का लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण नहीं माना जा सकता, लेकिन ब्रिसबेन की पिच पर शुरुआती स्विंग और स्पिनरों की भूमिका मैच का रुख पलट सकती है।

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