शुरुआती कारोबार में रुपया दबाव में, सात पैसे फिसलकर 90.96 प्रति डॉलर

घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 525.29 अंक टूटकर 82,769.37 पर पहुंच गया।

मुंबई। वैश्विक बाजार से मिले मिश्रित संकेतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच मंगलवार को भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में दबाव में दिखाई दिया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.91 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन शुरुआती सौदों के दौरान यह और फिसलकर 90.96 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह पिछले कारोबारी सत्र के 90.89 के बंद स्तर से सात पैसे की गिरावट को दर्शाता है।

सोमवार को घरेलू मुद्रा पांच पैसे की बढ़त के साथ बंद हुई थी, जिससे बाजार में थोड़ी राहत देखी गई थी। हालांकि मंगलवार को वैश्विक कारकों ने फिर से दबाव बना दिया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार अमेरिकी डॉलर में मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू शेयर बाजारों की कमजोर शुरुआत ने रुपये की चाल को प्रभावित किया।

घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 525.29 अंक टूटकर 82,769.37 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 145.85 अंक की गिरावट के साथ 25,567.15 पर कारोबार करता नजर आया। इक्विटी बाजार में यह नरमी विदेशी निवेशकों की रणनीति और वैश्विक अनिश्चितताओं को दर्शाती है।

हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लिवाली ने रुपये को कुछ हद तक सहारा दिया। शेयर बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सोमवार को एफआईआई ने 3,483.70 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। विश्लेषकों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश का यह रुख बरकरार रहता है तो रुपये की गिरावट सीमित रह सकती है।

इस बीच, छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला अमेरिकी डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत बढ़कर 97.81 पर पहुंच गया। डॉलर सूचकांक में मजबूती आमतौर पर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव डालती है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।

ऊर्जा बाजार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। वैश्विक मानक कच्चा तेल का भाव 0.85 प्रतिशत बढ़कर 72.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा सकती हैं, जिससे मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ती है और डॉलर में नरमी आती है, तो रुपये को समर्थन मिल सकता है। वहीं, यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है, तो मुद्रा में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी निवेश प्रवाह पर टिकी हुई है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपये की चाल बाजार की समग्र धारणा को प्रतिबिंबित करेगी।

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