शंकराचार्य विवाद में भाजपा का डैमेज कंट्रोल, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों का किया सम्मान

लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में माघ मेला के दौरान हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद ने अभी ही सियासी हलकों में हलचल मचा रखी है। घटना के बाद से ही विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर है। हालांकि, अब सरकार डैमेज कंट्रोल मोड में आ गई है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 101 बटुक ब्राह्मणों को बुलाकर उनका सम्मान किया। उन्हें तिलक लगाया, फूल-माला पहनाई और शिखा का सम्मान कर आशीर्वाद लिया। यह कदम शंकराचार्य विवाद के बीच सनातन संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद

हालांकि, समाजवादी पार्टी ने इसे सियासी नाटक बताते हुए ब्रजेश पाठक पर हमला बोला है। सपा नेता शिवपाल यादव ने कहा कि अगर शिखा खींचना पाप है, तो ब्रजेश पाठक को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देना चाहिए।

डिप्टी सीएम

बता दें कि, इस घटना की पृष्ठभूमि प्रयागराज के माघ मेला से जुड़ी है, जहां मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उन्हें स्नान से रोका गया और उनके साथ चल रहे बटुक ब्राह्मणों की शिखा (चोटी) खींची गई।

सीएम में विधानसभा में तोड़ी चुप्पी

उन्होंने पुलिसकर्मियों की फोटो दिखाते हुए धरना दिया और कहा कि, यह घटना प्रयागराज कमिश्नर सौम्या अग्रवाल के सामने हुई। प्रशासन ने सफाई दी कि शंकराचार्य के रथ के साथ प्रवेश सुरक्षा की दृष्टि से अनुचित था। उन्हें पैदल जाने को कहा गया, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। प्रशासन ने अनुयायियों पर धक्का-मुक्की और बैरिकेड तोड़ने का आरोप लगाया। इस विवाद जल्दी ही सियासी रंग ले लिया। विपक्ष ने योगी सरकार को घेरना शुरू आकर दिया और उन पर सनातनियों का अपमान करने का आरोप लगाने लगे।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 फरवरी को विधानसभा में पहली बार इस  मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा, हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। विद्वत परिषद के प्रमाण से ही व्यक्ति शंकराचार्य होता है।

शंकराचार्य सनातन का सर्वोच्च पद है, लेकिन कानून सबके लिए बराबर है। मौनी अमावस्या पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु थे, कोई ऊपर नहीं हो सकता… मुख्यमंत्री भी नहीं। योगी ने सपा पर पलटवार करते हुए कहा, 2015 में जब आपकी सरकार थी तब शंकराचार्य को क्यों पीटा? एफआईआर क्यों कराई? निकासी द्वार पर खड़े होना भगदड़ की दावत था। उन्होंने आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों का जिक्र करते हुए वेदों के ज्ञान और मर्यादाओं का पालन करने पर जोर दिया। मालूम हो कि, विपक्ष, खासकर सपा शुरू से ही शंकराचार्य के साथ खड़ी है।

अखिलेश ने योगी सरकार पर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने घटना के दूसरे दिन ही शंकराचार्य से फोन पर बात की और लगातार योगी सरकार पर निशाना साधा। रविवार को अखिलेश ने बिना नाम लिए कहा, हम शंकराचार्य के साथ खड़े हैं। परंपराओं पर सवाल उठाने और दूसरों से ‘सर्टिफिकेट’ लेने की कोशिश हो रही है। समाजवादी पार्टी ने इसे सनातन संस्कृति का अपमान बताते हुए योगी सरकार को घेरा। शिवपाल यादव ने ब्रजेश पाठक की बातों को ही हथियार बनाया।

डिप्टी सीएम

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ब्रजेश ने कहा था, शिखा खींचना महापाप है। जो छूते हैं, उन्हें कई बरस बाद भी पाप लगेगा। सब खाता-बही में लिखा जा रहा है। इस पर शिवपाल ने पलटवार किया, मंत्रिमंडल का सदस्य होने के नाते पाप तो ब्रजेश पाठक को भी लगेगा। अपमान वहीं से हुआ है, इस्तीफा दे दें। ब्रजेश पाठक इस विवाद में डैमेज कंट्रोल की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पहले ही शिखा छूने को गंभीर अपराध बताया था।

101 बटुकों का किया सम्मान

एक कार्यक्रम में कहा, यह सनातन संस्कृति और परंपराओं का अपमान है। इसमें शामिल लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। अब उन्होंने 101 बटुकों को आवास पर बुलाकर उनका सम्मान करने का व्यावहारिक कदम उठाया। उप मुख्यमंत्री ने बटुकों का फूल-माला से स्वागत किया, तिलक लगाया और शिखा का सम्मान किया। ब्रजेश ने कहा, शिखा का सम्मान होना चाहिए। परंपराओं का आदर समाज की जिम्मेदारी है। 101 बटुकों को सम्मानित करना सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है। यह कदम सरकार की किरकिरी को कम करने की कोशिश माना जा रहा है, क्योंकि विपक्ष लगातार हमलावर था।

इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भाजपा के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी डैमेज कंट्रोल किया, लेकिन योगी के सख्त तेवर से पार्टी की लाइन साफ है, कानून सबके लिए समान। वहीं, सपा इसे ब्राह्मण वोट बैंक को साधने का मौका मान रही है। आपको बता दें कि यूपी में ब्राह्मण समुदाय करीब 10-12% है, जो निर्णायक भूमिका निभाता है। 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ब्राह्मणों का समर्थन पाया, लेकिन 2024 लोकसभा में सपा ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति से फायदा उठाया। अब शंकराचार्य विवाद सपा के लिए ब्राह्मणों को लुभाने का टूल बन गया है।

धरने पर बैठ गये थे शंकराचार्य

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बताते हुए विवाद को बढ़ाया। उन्होंने धरने पर बैठकर पुलिस पर आरोप लगाए और कहा कि सनातन धर्म के सर्वोच्च पद का अपमान हुआ है। उनके अनुयायियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए, जिसमें बटुकों की शिखा खींचने की कथित घटना दिखाई गई।

प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। प्रयागराज के डीएम मनीष वर्मा और पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने बयान जारी कर सफाई दी। यह घटना माघ मेला की पवित्रता पर सवाल उठाती है। माघ मेला हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, और मौनी अमावस्या पर रिकॉर्ड स्नान होता है। इस साल साढ़े चार करोड़ लोग पहुंचे, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था सख्त थी,   लेकिन शंकराचार्य का रोकना और बहस ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। धार्मिक संगठनों ने शंकराचार्य के समर्थन में बयान दिए, जबकि बीजेपी ने इसे कानून व्यवस्था का मामला बताया।

बैकफुट पर आये बृजेश पाठक

शिवपाल के इस्तीफा वाले बयान ने ब्रजेश को बैकफुट पर ला दिया। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह ब्राह्मण वोट को साधने की जंग है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे मुद्दे पार्टियों की रणनीति बदल सकते हैं। सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए कदम उठाए, लेकिन विपक्ष इसे भुनाने में लगा है। शंकराचार्य ने भी चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रहेगी। उनके अनुयायियों ने यूपी सरकार पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया।

वहीं, योगी ने साफ कहा कि मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा। यह विवाद उत्तर प्रदेश की सियासत में नया अध्याय जोड़ रहा है, जहां धर्म, परंपरा और राजनीति का घालमेल आम है। ब्रजेश पाठक के आवास पर हुए सम्मान समारोह में बटुकों ने सरकार की सराहना की। एक बटुक ने कहा, यह सम्मान हमारी संस्कृति की रक्षा का संकेत है, लेकिन SP का कहना है कि यह दिखावा है। अखिलेश ने ट्वीट कर कहा, अपमान करने वाले अब सम्मान का नाटक कर रहे हैं। जनता सब समझती है। कुल मिलाकर, यह विवाद UP सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। डैमेज कंट्रोल की कोशिशें जारी हैं, लेकिन SP के हमलों से मामला गर्माया हुआ है।

 

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