AI Summit 2026 में बोले अमिताभ कांत, कहा- एआई से नौकरियां नहीं जाएंगी, बल्कि नई आएंगी

नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (AI Summit 2026) के दूसरे दिन 17 फरवरी को एआई के समावेशी विकास, ग्लोबल साउथ की भूमिका और स्वास्थ्य क्षेत्र में इसकी उपयोगिता पर गहन चर्चा देखने को मिली। नीति आयोग के पूर्व सीईओ और पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने जोर देकर कहा कि भारत को अपने डेटा पर आधारित स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने होंगे, ताकि बड़ी टेक कंपनियां ग्लोबल साउथ के डेटा का फायदा उठाकर मुनाफा कमाती रहें और विकासशील देशों को महंगे उत्पाद बेचें।

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20 फरवरी तक चलेगी समिट

मालूम हो कि, इस साल एआई समिट 16  फरवरी से नई दिल्ली के भरत मंडपम में शुरू हुआ है, जो 20 फरवरी तक चलेगा। इस समिट में एआई के जिम्मेदार उपयोग, नवाचार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और समान पहुंच पर फोकस किया जा रहा है।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026

 

यह ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला बड़ा एआई समिट है, जहां भारत अपनी युवा आबादी, डेटा की प्रचुरता और तकनीकी महत्वाकांक्षा से वैश्विक एआई दौड़ में अग्रणी भूमिका निभाने की तैयारी दिखा रहा है।

भारत के डेटा से तैयार हो रहा एआई मॉडल

पैनल चर्चा और साइडलाइन इंटरव्यू में अमिताभ कांत ने कहा कि, भारत अकेले अमेरिका से 33 प्रतिशत अधिक डेटा प्रदान करता है, जो बड़े लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) जैसे ChatGPT को ट्रेंड करने में इस्तेमाल होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि, बड़ी टेक कंपनियां ग्लोबल साउथ, खासकर भारत के डेटा से अपने एआई मॉडल तैयार कर रही हैं। ये मॉडल बाद में महंगे व्यावसायिक उत्पाद बनकर बाजार में बिकते हैं, जबकि डेटा देने वाले देशों को इसका उचित लाभ नहीं मिलता। अमिताभ ने जोर दिया कि, भारत और अन्य विकासशील देशों को स्वदेशी, मल्टीलिंगुअल एआई मॉडल बनाना होगा, जो स्थानीय भाषाओं, संस्कृति और जरूरतों पर आधारित हों।

समाज के हर वर्ग तक बने पहुंच

उन्होंने कहा, एआई को मल्टीलिंगुअल बनाना जरूरी है, ताकि यह समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। ग्लोबल साउथ को सिर्फ डेटा सोर्स नहीं बनना चाहिए, बल्कि एआई से जीवन बदलने वाली तकनीक का फायदा उठाना चाहिए। भारत की ताकत पर प्रकाश डालते हुए अमिताभ ने कहा, देश की युवा आबादी और एआई के प्रति बढ़ती रुचि इसे परिवर्तनकारी बनाती है।

एआई नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नई तरह की नौकरियां पैदा करेगा, जैसे डेटा साइंटिस्ट, मशीन लर्निंग एक्सपर्ट्स आदि। हर तकनीकी क्रांति ने नई रोजगार संभावनाएं पैदा की हैं। कांत ने एआई को गरीबों तक पहुंचाने की चुनौती पर बात करते हुए भारत में एआई की मुख्य चुनौती यह है कि क्या यह गरीबों तक पहुंच पाएगा? अगर एआई असमान समाज बनाता है, तो हम असफल हो गये हैं।

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एआई साक्षरता बढ़ाने पर बल

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने समिट में ‘इनोवेशन टू इम्पैक्ट: एआई ऐज ए पब्लिक हेल्थ गेम-चेंजर’ सेशन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि एआई डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि उनके नियमित कार्यों का बोझ कम करने वाला सहायक है। एआई चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाता है, लेकिन अंतिम निर्णय और उपचार की जिम्मेदारी डॉक्टरों की ही रहेगी।

 इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026

पटेल ने एआई को ऑल-इनक्लूसिव इंटेलिजेंस बताया और जोर दिया कि यह स्वास्थ्य असमानता कम करने में मदद कर सकता है। उन्होंने एआई साक्षरता बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। पटेल ने कहा, मेडिकल समुदाय को एआई को बेहतर तरीके से समझना और अपनाना चाहिए। इससे समावेशिता और स्वास्थ्य समानता के लक्ष्य हासिल होंगे।

मंत्री ने SAHI फ्रेमवर्क (संभवतः Strategic AI for Health Integration) का जिक्र किया, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को एकीकृत करने पर फोकस करता है। इसमें रोग निगरानी, निदान से लेकर उपचार तक शामिल है।

बिल गेट्स का नाम हटने पर विवाद 

समिट में एक बड़ा विवाद तब उठा जब माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स का नाम आधिकारिक वेबसाइट से हटा दिया गया। सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि, गेट्स अब समिट में शामिल नहीं होंगे और यह फैसला हाल ही में जारी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के संदर्भ में लिया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के रिकॉर्ड में एपस्टीन की ओर से गेट्स पर एक आरोप का जिक्र है (एसटीडी से जुड़ा), हालांकि, गेट्स पर किसी पीड़ित ने आरोप नहीं लगाया और कोई आधिकारिक आपराधिक शिकायत नहीं है।

गेट्स ने इन आरोपों को “absolutely absurd” बताया है। हालांकि, गेट्स फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि, बिल गेट्स समिट में शामिल होंगे और 19 फरवरी को कीनोट एड्रेस देंगे। फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा, बिल गेट्स इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे और अपना कीनोट डिलीवर करेंगे। वेबसाइट पर नाम हटने से अफवाहें फैलीं, लेकिन फाउंडेशन ने इसे गलत बताया।

समिट का महत्व और आगे की राह

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत की एआई रणनीति को वैश्विक मंच पर रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘आइडियाज, इनोवेशन और इंटेंट’ का संगम बताया। समिट में सैम ऑल्टमैन, सुंदर पिचाई जैसे दिग्गज भाग ले रहे हैं।

समिट में जिम्मेदार एआई गवर्नेंस, क्लाइमेट-कॉन्शस टेक्नोलॉजी, एआई फॉर एग्रीकल्चर, हेल्थ और इकोनॉमिक ग्रोथ को मुख्य तरीके से फोकसकिया जा रहा है।

अमिताभ कांत की टिप्पणियां भारत के लिए एआई में आत्मनिर्भरता की दिशा दिखा रही हैं। स्वास्थ्य में एआई के उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर सेवाएं पहुंच सकती हैं। बिल गेट्स विवाद के बावजूद, समिट एआई को समावेशी बनाने पर केंद्रित है। समिट के अंत तक एआई इन्वेस्टमेंट्स में 200 बिलियन डॉलर से ज्यादा की उम्मीद है। भारत एआई को ‘विकसित भारत’ का इंजन बनाने की कवायद में जुटा है, जहां तकनीक समाज के हर वर्ग को लाभ पहुंचाए।

 

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