इन छोटे-छोटे बदलावों को न करें नजरंदाज, हो सकते हैं कैंसर के संकेत

कैंसर अक्सर चुपके से शुरू होता है। यह बीमारी शुरू में कोई बड़ा संकेत नहीं देती, बल्कि छोटे-छोटे बदलावों के साथ शरीर को अपनी चपेट में लेती है, जिन्हें लोग आमतौर पर इग्नोर कर देते हैं या सामान्य बीमारी समझकर गंभीरता से नहीं लेते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अगर इन्हीं शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए जान बचाई जा सकती है।

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 गंभीरता से लें बदलाव

रायपुर के आईटीएसए हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में भारत में आम कैंसरों के शुरुआती चेतावनी संकेतों पर विस्तार से जानकारी साझा की है। उनका मकसद जागरूकता फैलाना है, ताकि लोग छोटे बदलावों को नजरअंदाज न करें। डॉ. शर्मा बताते हैं कि, कैंसर के लक्षण अक्सर दर्द रहित या हल्के होते हैं, लेकिन अगर कोई बदलाव 2-3 हफ्तों से ज्यादा समय तक बना रहे या बार-बार लौटे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। भारत में ओरल कैंसर, लंग कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर सबसे आम हैं और इनके शुरुआती संकेतों को पहचानना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

ओरल कैंसर के शुरुआती संकेत

ओरल कैंसर

डॉ. शर्मा बताते हैं कि, मुंह के भीतर कोई सूजन, छाला, घाव या सफेद/लाल पैच अगर कई हफ्तों तक ठीक न हो रहा हो, तो इसे सामान्य इन्फेक्शन समझकर टालना बड़ी भूल है। भारत में तंबाकू, गुटखा और सुपारी के सेवन से ओरल कैंसर बहुत आम है। लोग इसे मामूली समस्या मानकर डॉक्टर के पास नहीं जाते, जिससे बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच जाती है। अगर मुंह में कोई घाव 15 दिनों से ज्यादा समय तक रहे, मुंह खोलने में दिक्कत हो या निगलने में तकलीफ हो, तो तुरंत जांच कराएं।0

लंग कैंसर का रेड फ्लैग

लंग कैंसर

लगातार खांसी और खून की खांसी आ रही हो या असामान्य ब्लीडिंग हो रही हो, तो सतर्क हो जाएं  डॉ. शर्मा उदाहरण देते हुए कहते हैं कि पुरानी फिल्मों में दिखाया जाता था कि, कोई व्यक्ति खांसते हुए रूमाल पर खून थूक देता है। असल जिंदगी में भी यह लंग कैंसर का बड़ा संकेत हो सकता है। लगातार खांसी जो 2-3 हफ्तों से ज्यादा चले, खांसी में खून आए, सीने में दर्द या सांस फूलना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। धूम्रपान करने वालों में यह खतरा ज्यादा होता है, लेकिन नॉन-स्मोकर्स में भी यह हो सकता है। शुरुआती स्टेज में पकड़ने पर इलाज की सफलता दर बहुत अधिक होती है।

महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर

सर्वाइकल कैंसर

भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है। डॉ. शर्मा बताते हैं कि, इसका एक प्रमुख शुरुआती संकेत असामान्य वजाइनल ब्लीडिंग है। अगर ब्लीडिंग सामान्य पीरियड्स से अलग हो, सेक्स के बाद हो, मेनोपॉज के बाद हो या लगातार हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। उनका कहना है कि, इसका उद्देश्य डराना नहीं, बल्कि जागरूक करना है। सर्वाइकल कैंसर HPV वायरस से जुड़ा होता है और वैक्सीनेशन व नियमित पैप स्मीयर से रोका जा सकता है।

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अन्य आम संकेत जो लोग इग्नोर करते हैं

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, कैंसर के कई यूनिवर्सल शुरुआती संकेत होते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जैसे कि…

अनएक्सप्लेन्ड वेट लॉस: बिना डाइट या एक्सरसाइज बदले 4-5 किलो या इससे ज्यादा वजन कम होना। यह पैनक्रियाटिक, लंग, स्टमक या कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत हो सकता है।

परसिस्टेंट फटीग: आराम करने के बाद भी थकान न जाना। यह ल्यूकेमिया, लिम्फोमा या अन्य कैंसरों में आम है।

अनयूजुअल लंप्स या स्वेलिंग: गर्दन, बगल, ब्रेस्ट, ग्रोइन या कहीं भी नई गांठ या सूजन। ब्रेस्ट कैंसर में ब्रेस्ट में गांठ या निप्पल से डिस्चार्ज प्रमुख संकेत है।

स्किन चेंजेस: नया तिल आना, पुराने तिल का साइज, कलर बदलना या घाव जो ठीक न हो तो वह स्किन कैंसर का संकेत हो सकता है।

पेट या ब्लैडर की आदतों में बदलाव: पेट या ब्लैडर की आदतों में लगातार बदलाव, जैसे कब्ज़, डायरिया, मल/पेशाब में खून, कैंसर, इंफ्लेमेटरी बाउल डिज़ीज़ (IBD), पाइल्स, आंतों में इन्फेक्शन के लक्षण हो सकते हैं। ये गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम के लक्षण हो सकते हैं, इसलिए बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेना और कोलोनोस्कोपी जैसी जांच करवाना ज़रूरी हो जाता है।

डिस्कॉलर या पेन: निगलने में दिक्कत (डिस्फेजिया), लगातार सीने में जलन या पेट दर्द जो ठीक नहीं होता, ये GERD या खाने की नली में सूजन के लक्षण हो सकते हैं। यह आमतौर पर एसिड रिफ्लक्स, इन्फेक्शन या मांसपेशियों की बीमारियों की वजह से होता है। अगर ये लक्षण बने रहें, तो गंभीर स्थिति से बचने के लिए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डॉ. शर्मा ने ये भी स्पष्ट किया है कि, हर लक्षण कैंसर का मतलब नहीं होता। कई बार ये सामान्य बीमारियां भी हो सकती हैं, जैसे मसूड़ों से खून आना या अनियमित पीरियड्स, लेकिन फर्क लगातार और बार-बार होने में है। अगर कोई लक्षण 2-3 हफ्तों से ज्यादा चले या बिगड़ता जाए, तो जांच जरूरी है।

हेल्थ चेकअप करवाएं

डॉ. शर्मा  का कहना है कि अपने शरीर की छोटी-छोटी बातों को सुनें। नियमित हेल्थ चेकअप, स्क्रीनिंग (जैसे मैमोग्राम, पैप स्मीयर, कोलोनोस्कोपी) कराएं। कैंसर अक्सर दर्द से नहीं, बल्कि छोटे बदलावों से शुरू होता है। शुरुआती स्टेज में पकड़ने पर इलाज के नतीजे बहुत बेहतर होते हैं और सर्वाइवल रेट बढ़ जाती है। भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन जागरूकता और समय पर जांच से लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। अगर आपको कोई भी संदिग्ध लक्षण दिखे, तो तुरंत ऑन्कोलॉजिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करें। याद रखें, इग्नोर करने से बीमारी बढ़ती है, लेकिन पहचानने से लड़ाई जीती जा सकती है

 

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