
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र में लगातार हंगामा और अव्यवस्था ने एक बार फिर लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 5 फरवरी 2026 को सदन में गंभीर बयान देते हुए कहा कि बुधवार (4 फरवरी) को जो घटनाक्रम हुआ, वह संसदीय इतिहास में ‘काले धब्बे’ की तरह है। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी को घेर सकते हैं और कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती है। इसी वजह से उन्होंने पीएम मोदी से लोकसभा में न आने का आग्रह किया, जिसे प्रधानमंत्री ने मान लिया। स्पीकर के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां एक तरफ सत्ताधारी दल इसे विपक्ष की जिम्मेदारी बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की साजिश करार दे रहा है।
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वेल में घुसीं महिला सांसद

बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पारंपरिक जवाबी भाषण निर्धारित था। शाम करीब 5 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन विपक्षी सांसदों, खासकर महिला सांसदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। वे वेल में घुस गईं, नारे लगाए और प्रधानमंत्री की कुर्सी की ओर बढ़ीं। कुछ सांसदों ने बैनर भी लहराए। उस समय पीएम मोदी सदन में मौजूद नहीं थे, लेकिन स्थिति बेकाबू होने लगी। सदन की अध्यक्षता कर रही भाजपा सांसद संध्या राय ने कार्यवाही को स्थगित कर दिया। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने बाद में कहा कि विपक्षी महिला सांसदों ने पीएम की कुर्सी को घेर लिया था। वरिष्ठ मंत्रियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मानीं। इससे सदन में तनाव बढ़ गया और पीएम का प्रवेश रोकना पड़ा।
स्पीकर ने जताई नाराजगी
आज गुरुवार को सदन में स्पीकर ओम बिरला ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “देश ने देखा कि कल सदन में क्या हुआ। सबने देखा कि, कैसे सांसदों ने पीएम की कुर्सी की तरफ जाने की कोशिश की। मेरे पास पुख्ता जानकारी आई कि कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री के पास पहुंचकर कोई अप्रत्याशित घटना कर सकते हैं। अगर यह घटना हो जाती तो यह बेहद निंदनीय होती। मैंने पीएम से आग्रह किया कि वे सदन में न आएं और उन्होंने मेरी बात मानी।”
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स्पीकर ने इसे ‘काले धब्बे’ की तरह बताया और कहा कि सदन के चैंबर में हंगामा किया गया। उन्होंने याद दिलाया कि संसदीय प्रणाली में स्पीकर का स्थान गरिमामयी है और राजनीतिक मतभेद सदन के पटल पर नहीं लाए जाने चाहिए। स्पीकर ने आगे कहा कि उन्हें पहले से पता था कि, कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया कि उन्होंने सदन में न आकर अप्रिय दृश्यों को रोका। इस बयान से साफ है कि स्पीकर ने सुरक्षा की दृष्टि से सतर्कता बरती और प्रधानमंत्री की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
विपक्ष बोला- राजनीति से प्रेरित है स्पीकर का बयान

विपक्ष ने स्पीकर के बयान को राजनीतिक बताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले ही स्पीकर को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि उन्हें बोलने से रोका गया, जो लोकतंत्र पर काला धब्बा है। अब इस घटना पर विपक्ष का कहना है कि सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है और पीएम मोदी सदन में आने से डरते हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि पीएम डरे हुए हैं, इसलिए सदन में नहीं आए। राहुल गांधी ने भी कहा कि पीएम सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते। विपक्ष का आरोप है कि यह सब पूर्व से तय साजिश थी ताकि पीएम को बोलने से रोका जा सके।
कई मुद्दों को लेकर हो रहा हंगामा
यह घटना संसद में लगातार बढ़ते हंगामे का हिस्सा है। बजट सत्र में पहले भी कई बार कार्यवाही स्थगित हुई है। विपक्ष विभिन्न मुद्दों जैसे पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरावणे की किताब, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आदि पर हंगामा कर रहा है। सत्ताधारी दल का कहना है कि विपक्ष सदन चलने नहीं दे रहा और लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। स्पीकर के बयान से अब सुरक्षा और संसदीय मर्यादा पर बहस छिड़ गई है। गुरुवार को लोकसभा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया, लेकिन पीएम का जवाबी भाषण नहीं हो सका। संभावना है कि पीएम अब राज्यसभा में बोल सकते हैं। यह घटना संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है और दोनों पक्षों के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है। फिलहाल, संसद में शांति बहाल करने की जरूरत है ताकि लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।
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