मुजफ्फरपुर (बिहार): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम पर AI तकनीक से फर्जी वीडियो और ऑडियो तैयार करना एक युवक को भारी पड़ गया। बिहार के मुजफ्फरपुर में पुलिस ने इस मामले में आरोपी को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर आरोप है कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के फर्जी और भ्रामक वीडियो-ऑडियो बनाए और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया।

सोशल मीडिया पर बढ़ता AI फर्जीवाड़ा
बीते कुछ समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर AI जनरेटेड फर्जी वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई कंटेंट क्रिएटर्स लाइक्स और व्यूज़ के चक्कर में मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए ऐसे वीडियो बना रहे हैं, जिनसे समाज में भ्रम और गलत सूचना फैल रही है। अक्सर ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं हो पाती, लेकिन चूंकि यह मामला सीधे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने तेजी दिखाते हुए आरोपी तक पहुंच बनाई।
पहचान करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही फर्जीवाड़ा किसी अन्य नेता या आम व्यक्ति के साथ होता, तो कार्रवाई में देरी हो सकती थी या मामला दब भी सकता था। इसकी सबसे बड़ी वजह है AI फर्जी कंटेंट बनाने वालों की पहचान और लोकेशन ट्रेस करना, जो पुलिस के लिए तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है।
क्या है AI और क्यों बन रहा खतरा?
AI यानी Artificial Intelligence एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसमें कंप्यूटर और मशीनें इंसानों की तरह सोचने, समझने और फैसले लेने में सक्षम हो जाती हैं। यह तकनीक जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और विज्ञान के क्षेत्र में बेहद उपयोगी साबित हो रही है, वहीं इसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है।
AI के जरिए किसी भी व्यक्ति की फोटो, वीडियो या आवाज को इस तरह बदला जा सकता है कि वह पूरी तरह असली जैसी लगे, जबकि हकीकत में वह घटना कभी हुई ही न हो। कई मामलों में AI इतना सटीक होता है कि आम लोग फर्जी वीडियो को भी सच मान लेते हैं, जिससे अफवाह और गलत जानकारी फैलती है।
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