
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार को जंगल क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए, जबकि पिछले चार दिनों में 214 नक्सली ठिकानों और बंकरों को ध्वस्त करने में सफलता मिली है। यह कार्रवाई राज्य में चल रहे ‘नक्सल-मुक्त भारत’ अभियान का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करना है।
इसे भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में 6 नक्सलियों को पुलिस ने किया ढेर
सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी बरामद की है, जिससे नक्सलियों की साजिशों को बड़ा झटका लगा है।मुठभेड़ की शुरुआत तब हुई जब बीजापुर के घने जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता खुफिया सूचना मिली।
नक्सलियों ने शुरू फायरिंग

इसके आधार पर डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) और छत्तीसगढ़ पुलिस की संयुक्त टीम ने सघन तलाशी अभियान शुरू किया। जैसे ही जवान इलाके में आगे बढ़े, नक्सलियों ने घात लगाकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की। दोनों तरफ से करीब आधे घंटे तक चली भीषण मुठभेड़ में 5 नक्सली मौके पर ढेर हो गए। मारे गए नक्सलियों की पहचान की जा रही है।
चार दिनों से चल रहा अभियान
यह सफलता बीजापुर जिले में पिछले चार दिनों से चल रहे विशेष अभियान का नतीजा है। इस दौरान सुरक्षाबलों ने 214 नक्सली ठिकानों, बंकरों और छिपने के स्थानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इन ठिकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई, जिसमें आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस), बारूद, डेटोनेटर और अन्य हथियार शामिल हैं।
साल में मारे गये सैकड़ों नक्सली
अधिकारियों का कहना है कि, जिन बंकरों को ध्वस्त किया गया है, वे नक्सलियों के लिए काफी रणनीतिक महत्व रखते थे। इन्हीं बंकरों में वे हमलों की योजना बनाते थे और हथियार छिपाते थे। इनका ध्वस्त होना नक्सल नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचाएगा और इलाके में उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। बीजापुर जिला नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र का हिस्सा है, जहां पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों ने कई बड़े अभियान चलाए हैं।
केंद्र सरकार की ‘नक्सल-मुक्त भारत’ नीति के तहत 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय बलों ने पिछले एक साल में सैकड़ों नक्सलियों को मार गिराया, सैकड़ों ने सरेंडर किया और हजारों ठिकाने नष्ट किए।
नक्सलियों का मजबूत गढ़ है बीजापुर
बीजापुर में हाल की यह कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है, जो नक्सलियों की कमर तोड़ने में अहम साबित हो रहा है। सुरक्षाबलों की रणनीति में खुफिया जानकारी पर आधारित सटीक ऑपरेशन, नए कैंप स्थापित करना और स्थानीय लोगों से सहयोग बढ़ाना शामिल है। बीजापुर-सुकमा सीमा नक्सलियों के मजबूत गढ़ थे, जहां वे PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन और अन्य संगठनों के साथ छिपे रहते थे, लेकिन लगातार कैंप और ऑपरेशन से उनका ‘अजेय’ होने का भ्रम टूट चुका है। अधिकारियों का कहना है कि, अब नक्सली छोटे-छोटे ग्रुप में बिखर रहे हैं और उनका मनोबल टूट रहा है। मारे गए 5 नक्सलियों में कुछ प्रमुख कैडर होने की आशंका है।
इसे भी पढ़ें- छत्तीसगढ़:दस महिला नक्सली के साथ 24 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
मुठभेड़ में किसी जवान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन इलाके में ऑपरेशन जारी है। सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर रखा है और बाकी नक्सलियों की तलाश की जा रही है। बरामद विस्फोटकों से बड़े हमलों को नाकाम किया गया है। यह अभियान न केवल सुरक्षा बलों की क्षमता दिखाता है, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति का भी प्रमाण है।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का इतिहास लंबा है। 2000 के दशक में बस्तर क्षेत्र नक्सलियों का गढ़ था, जहां हजारों हमले हुए और सैकड़ों जवान शहीद हुए, लेकिन पिछले 5-6 सालों में बदलाव आया है। नए कैंप, सड़कें, स्कूल और विकास कार्यों से स्थानीय लोग नक्सलियों से दूर हो रहे हैं। सरेंडर करने वालों की संख्या बढ़ी है। केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों में विशेष पैकेज दिए हैं। बीजापुर जैसे जिलों में अब विकास की रफ्तार तेज है, जो नक्सलियों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
2026 में नक्सल मुक्त होगा भारत
यह मुठभेड़ और 214 ठिकानों का ध्वस्त होना नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का संकेत है। गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार कहा है कि 2026 तक भारत नक्सल-मुक्त होगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस दिशा में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। बीजापुर की यह सफलता उसी लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम है। पुलिस और सीआरपीएफ की नक्सल विरोधी कार्रवाई से एक तरफ तरफ जहां नक्सलियों की कमर टूट रही है। वहीं इलाके में शांति स्थापित होने के साथ ही विकास के नये रास्ते खुलेंगे। हालांकि बड़ी मात्रा में हथियार, विस्फोटक पदार्थ मिलने और इलाके में और कैडरों के छिपे होने की आशंका से स्थानीय लोग दहशत में हैं।
इसे भी पढ़ें- दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने किया बड़ा हमला, धमाके से थर्रा उठा इलाका



