
कोटद्वार। उत्तराखंड के कोटद्वार में हाल ही में एक साधारण दुकान के नाम से शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा कर रहा है, बल्कि संविधान, इंसानियत, धार्मिक सद्भाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों को भी उजागर कर रहा है। विवाद की जड़ 26 जनवरी 2026 को गढ़वाल क्षेत्र के कोटद्वार शहर में पटेल मार्ग पर स्थित एक कपड़े की दुकान से जुड़ी है। दुकान का नाम “बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर” है, जो लगभग 30 वर्षों से एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यापारी वकील अहमद द्वारा संचालित की जा रही है।

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26 जनवरी को हुआ था विवाद

बीते 26 जनवरी को कथित तौर पर कुछ बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने दुकान पर पहुंचकर “बाबा” शब्द पर आपत्ति जताई और नाम बदलने का प्रेशर बनाने लगे। बजरंगदल के कार्यकर्ताओं का कहना था कि “बाबा” हिंदू संतों से जुड़ा शब्द है और इसे मुस्लिम दुकानदार द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, नोकझोंक बढ़ी और मामूली मारपीट भी हुई। इसी बीच स्थानीय जिम संचालक दीपक कुमार जिन्हें सोशल मीडिया पर मोहम्मद दीपक के नाम से जाना जा रहा है ने हस्तक्षेप किया और दुकानदार का बचाव किया। दीपक ने कहा, दुकान का नाम 30 साल पुराना है और इसे बदलने की कोई जरूरत नहीं। जब उनसे उनका नाम पूछा गया, तो दीपक ने निडर होकर जवाब दिया, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।”
उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं।
दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं – उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज़ रौंदने की साज़िश कर रहे हैं।
वे नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं और यही बात सत्ता को सबसे ज़्यादा चुभती है।
संघ परिवार… pic.twitter.com/c1D4VHV5XO
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 1, 2026
यह बयान वीडियो में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। दीपक का कहना है कि उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वे मानते हैं कि इंसान की पहचान धर्म से नहीं, बल्कि इंसानियत से तय होनी चाहिए। वे खुद को पहले इंसान मानते हैं और धार्मिक विभेद के खिलाफ खड़े होने को अपना कर्तव्य समझते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्थिति और जटिल हो गई। बजरंग दल के देहरादून और हरिद्वार से जुड़े कार्यकर्ता 31 जनवरी को कोटद्वार पहुंचे। उन्होंने पटेल मार्ग और मालवीय उद्यान में विरोध प्रदर्शन किया, नारे लगाए और दीपक व उनके परिवार वालों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।
सख्त हुई सुरक्षा व्यवस्था

दीपक का आरोप है कि, उनके साथ मारपीट हुई, परिवार को अपशब्द कहे गए और उनके जिम पर तोड़फोड़ की कोशिश की गई। पुलिस ने दोनों पक्षों से शिकायतें लीं और जांच शुरू कर दी। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए। जिले की सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया, बाहरी राज्यों से आने वाली गाड़ियों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को अशांति फैलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार और देहरादून से कुछ जिम संचालक दीपक से मिलने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें संदिग्ध मानकर पूछताछ के बाद छोड़ दिया। कोतवाल प्रदीप नेगी ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बरती जा रही है।
राहुल ने दीपक को बताया बब्बर शेर
विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है क्योंकि, कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर दीपक का खुलकर समर्थन किया। राहुल गांधी ने लिखा, “उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं। दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं, उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज़ रौंदने की साज़िश कर रहा है। वे नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि संघ परिवार जानबूझकर देश में आर्थिक और सामाजिक जहर घोल रहा है ताकि भारत बंटा रहे और डर के सहारे राज किया जा सके। राहुल ने उत्तराखंड की BJP सरकार पर असामाजिक ताकतों का समर्थन करने का इल्जाम लगाया और कहा, “नफरत, डर और अराजकता में कोई देश आगे नहीं बढ़ सकता। शांति के बिना विकास सिर्फ जुमला है।” उन्होंने दीपक को “बब्बर शेर” बताया और लिखा, “डरो मत, तुम हमारे बब्बर शेर हो। हमें और दीपकों की जरूरत है जो झुकें नहीं, डरें नहीं और संविधान की रक्षा के लिए खड़े हों।
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विवाद ने लिया राजनीतिक रूप

राहुल गांधी के इस बयान से मामला राजनीतिक हो गया। एक तरफ समर्थक दीपक को इंसानियत का प्रतीक बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ विरोधी इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करार दे रहे हैं। जमीअत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड ने डीजीपी को पत्र लिखकर दीपक कुमार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। पत्र में कहा गया कि, दीपक ने 26 जनवरी को हिंसा का विरोध कर दुकानदार की जान बचाई, मानवीय और संवैधानिक दायित्व निभाया, लेकिन अब उन्हें धमकियां मिल रही हैं। जमीअत के प्रदेश महासचिव मौलाना शराफत अली कासमी और उपाध्यक्ष मुफ्ती रईस अहमद कासमी ने तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और दीपक को सुरक्षा की अपील की। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी की घटना देवभूमि उत्तराखंड की शांत छवि को धूमिल करने वाली थी। हालांकि, पुलिस ने 1 फरवरी की रात प्रेस नोट जारी कर बताया कि बजरंग दल से जुड़े कमल पाल की शिकायत पर दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
दर्ज हुई एफआईआर
आरोपों में गाली-गलौज, जाति-सूचक शब्दों का प्रयोग और मारपीट शामिल हैं। साथ ही, प्रदर्शन करने वाले 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी अलग FIR दर्ज की गई, जिसमें शांति भंग और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप हैं। कुल तीन FIR दर्ज होने से दोनों पक्षों पर कानूनी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। यह विवाद अब सिर्फ एक दुकान के नाम का नहीं रहा, बल्कि यह धार्मिक सद्भाव, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संविधान की रक्षा और राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रतीक बन गया है। दीपक कुमार जैसे व्यक्ति जो धर्म से ऊपर इंसानियत को रखते हैं, उन्हें एक तरफ हीरो कहा जा रहा है, तो दूसरी तरफ FIR का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से चल रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन यह घटना सवाल उठाती है कि क्या छोटे-छोटे मुद्दे बड़े सामाजिक तनाव में बदल सकते हैं, और राजनीतिक बयानबाजी इसे और भड़काती है या शांत करती है? कोटद्वार जैसे शांत शहर में यह घटना एक चेतावनी है कि धार्मिक नामों और पहचान पर संवेदनशीलता बरतनी जरूरी है, लेकिन साथ ही इंसानियत और संविधान को सर्वोपरि रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दीपक की बहादुरी ने कई लोगों को प्रेरित किया है, लेकिन सुरक्षा और न्याय की मांग अब और तेज हो गई है।
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