9 दिन के उपवास के बाद एकादशी का व्रत सही या गलत, क्या लिखा है शास्त्रों में, क्या कहते हैं डॉक्टर?

 पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर को, शास्त्रों में नहीं है मनाही, पर शरीर की क्षमता देखकर लें फैसला

इस समय शारदीय नवरात्रि चल रहा है, अधिकतर लोग नौ दिन तक व्रत हैं और मां दुर्गा की कठिन उपासना कर रहे हैं। नवरात्रि के तुरंत बाद एकादशी का व्रत आ गया है। दरअसल, इस बार पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर दिन गुरुवार को पड़ रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि, लगातार नौ दिन उपवास रखने के बाद दसवें दिन पारण करके क्या 11वें दिन फिर एकादशी का उपवास रखना सही रहेगा या नहीं? आइये जानते हैं शास्त्र क्या कहता है और क्या हैं इसके नियम।

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क्या कहता है शास्त्र

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है। पद्म पुराण के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। ‘पापांकुशा’ का अर्थ है पापों पर अंकुश लगाने वाली एकादशी।

Ekadashi immediately after Navratri

शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि और एकादशी दोनों के संकल्प और आराध्य अलग-अलग हैं। नवरात्रि शक्ति की उपासना यानी मां दुर्गा का पर्व है, जबकि एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसे में एक व्रत के कारण दूसरे व्रत का निषेध नहींमाना जाता यानी नवरात्रि का व्रत रखा हो, तब भी एकादशी का व्रत रखना धर्म के अनुसार वर्जित नहीं है।

नियमित एकादशी व्रत रखने वालों के लिए नियम

जो भक्त साल की सभी 24 एकादशियों का नियमित व्रत रखते हैं, उनके लिए नवरात्रि के बाद आने वाली एकादशी को छोड़ना शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता। वे दशमी तिथि को सात्विक पारण करके अगले दिन एकादशी का व्रत रख सकते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं के लिए यह व्रत उनके नियम का हिस्सा है, इसलिए इसे बीच में छोड़ना उचित नहीं समझा जाता।

 सिर्फ नवरात्रि का संकल्प लेने वालों के लिए नियम

इसके उलट जिन्होंने केवल नवरात्रि का संकल्प लिया था और जो नियमित रूप से एकादशी व्रत नहीं करते, उनके लिए यह व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। ऐसे लोग केवल सात्विक रहकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसमें किसी तरह का दोष नहीं माना गया है।

सेहत का रखें ध्यान

लगातार नौ दिन तक सीमित आहार या फलाहार पर रहने के बाद शरीर की ऊर्जा का स्तर घट जाता है। ऐसे में दशमी को भारी भोजन करना और अगले ही दिन एकादशी पर भूखे रहना पाचन तंत्र पर दबाव डाल सकता है, इसलिए व्रत का फैसला भावना के साथ-साथ शरीर की स्थिति देखकर भी लेना चाहिए।

शरीर की क्षमता पहचानें। अगर नौ दिन के उपवास के बाद कमजोरी, चक्कर आना, लो ब्लड प्रेशर या डिहाइड्रेशन की समस्या महसूस हो रही है, तो निर्जला या सख्त उपवास से बचना चाहिए।

पारण में बरतें सावधानी

नवमी या दशमी को पारण करते समय एकदम से गरिष्ठ, तला-भुना या ज्यादा मीठा भोजन न करें। मूंग दाल की खिचड़ी, लौकी की सब्जी या दलिया जैसा हल्का सुपाच्य भोजन लें, ताकि शरीर अगले दिन के उपवास के लिए तैयार रहे।

बीमार और बुजुर्ग रखें ध्यान

डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या गैस्ट्रिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को लगातार उपवास से बचना चाहिए। ऐसे लोग व्रत को लेकर अपने चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

व्रत रखना चाहें तो अपनाएं आसान तरीका

अगर आपकी गहरी आस्था है और आप एकादशी का पुण्य भी पाना चाहते हैं, तो कुछ व्यावहारिक नियम अपनाए जा सकते हैं।

फलाहारी या जलीय व्रत रखें

निर्जला या कठोर व्रत के बजाय दूध, ताजे फल, नारियल पानी और मखाने का सेवन करते हुए उपवास करें।

अन्न का त्याग, मानसिक व्रत

अगर शरीर अनुमति नहीं दे रहा, तो भूखे रहने के बजाय सिर्फ अन्न, खासकर चावल और अनाज का त्याग करें। सात्विक आहार लेते हुए भगवान विष्णु का नाम जपें।

चावल से पूरी तरह परहेज धार्मिक मान्यता के अनुसार अगर आप व्रत न भी रखें, तब भी एकादशी के दिन घर में चावल पकाने और खाने से बचना चाहिए।

दान-पुण्य और सेवा

उपवास न रख पाने की स्थिति में जरूरतमंदों को अन्न, फल या वस्त्र का दान करें। शास्त्रों में भाव और सेवा को उपवास के समान ही फलदायी माना गया है।

संकल्प और भावना सबसे अहम

परंपरा की मान्यता के अनुसार व्रत में सबसे अहम चीज संकल्प और भावना है, इसलिए किसी दबाव या देखादेखी में उपवास रखने के बजाय अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार निर्णय लेना बेहतर माना जाता है। परिवार के बुजुर्गों और बीमार सदस्यों को भी इसी सोच के साथ अपनी सुविधा के हिसाब से नियम तय करने चाहिए।

एकादशी के दिन कैसी हो दिनचर्या

एकादशी पर सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करना और दिन भर उनका नाम जपना शुभ माना गया है। इस दिन आहार सात्विक रखें, चावल से परहेज करें और मन को शांत रखने का प्रयास करें, जिन लोगों का स्वास्थ्य कमजोर है, वे फलाहार के साथ हल्की दिनचर्या अपनाएं और थकान महसूस होने पर आराम करें।

पारण का नियम

एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है, इसलिए 22 अक्टूबर को व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन द्वादशी में, पंचांग में बताए गए पारण समय के भीतर व्रत खोलें। अपने शहर के पारण का सटीक समय स्थानीय पंचांग या किसी विश्वसनीय पंचांग से जरूर देख लें, क्योंकि समय शहर के हिसाब से बदलता है।

व्रत के बाद भी रखें संयम

नौ दिन के उपवास के बाद शरीर को सामान्य दिनचर्या में लौटने के लिए थोड़ा समय देना चाहिए। एकादशी का व्रत रखने वाले भी पारण के समय हल्का और सुपाच्य आहार लें और खूब पानी पिएं। एकदम से बहुत तला-भुना या भारी भोजन करने से बचें, ताकि पेट और ऊर्जा का संतुलन बना रहे।

 

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