
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ राजधानी में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि, उन्हें धमकी मिली है। खुफिया जानकारी और नई दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को देखते हुए उनके घर के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
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पहले से थी जेड प्लस सुरक्षा
ज्ञानेश कुमार को पहले से ही जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। ताजा फैसले के बाद उनके आवास पर इंतजाम और पुख्ता किए गए हैं। अब उनके आवास के बाहर एक शिफ्ट में करीब 50 जवान तैनात रहेंगे। पुलिस का कहना है कि, यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
स्थानीय पुलिस को भी निर्देश
एक मीडिया रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि, स्थानीय जिला पुलिस से भी जवानों की तैनाती बढ़ाने को कहा गया है। नई दिल्ली जिले में पहले से ही प्रदर्शन चल रहे हैं, इसलिए संवेदनशीलता और बढ़ गई है। सभी सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे आपस में बेहतर तालमेल बनाए रखें। अधिकारियों का मानना है कि, अलग-अलग बलों के बीच समन्वय से किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सकेगा।
कैसे शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद मीडिया की उस रिपोर्ट के बाद गहराया, जिसमें कहा गया था कि, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुक्तों का कहना था कि, ये आदेश उनकी जानकारी और सिफारिश के बिना जारी किए गए। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए और तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए।
विपक्ष ने मांगा इस्तीफा
सुरक्षा के ये सख्त इंतजाम ऐसे समय किए गए हैं, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन में अनियमितताएं हुई हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर के बाद लाखों लोग, खासकर पहली बार वोट देने वाले युवा, मताधिकार से वंचित हो गए। राहुल गांधी ने यमुना किनारे बेला एस्टेट का दौरा कर दावा किया कि वहां के 728 निवासियों में से केवल एक का नाम मतदाता सूची में बचा है। वहीं भाजपा ने विपक्ष पर जनता को गुमराह करने और आयोग को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
सड़कों पर प्रदर्शन, सैकड़ों हिरासत में
पिछले दिनों राजधानी में प्रदर्शन तेज हुए हैं। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में करीब 600 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें आम आदमी पार्टी, वाम दलों, एनएसयूआई और आइसा के कार्यकर्ता शामिल थे। शुक्रवार और शनिवार को मिलाकर 650 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए, जबकि रविवार को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इंडिया गेट के पास विरोध करते हुए हिरासत में लिए गए।
जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी रही और उसे बैरिकेड लगाकर बंद रखा गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को नई दिल्ली में युवाओं की बड़ी लामबंदी का आह्वान किया है। माना जा रहा है कि इसी को देखते हुए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती की गई है। चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज कर चुका है, जबकि कुमार ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।
क्या होती है जेड प्लस सुरक्षा
जेड प्लस देश में दूसरी सबसे बड़ी सुरक्षा श्रेणी है। इससे ऊपर केवल स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की सुरक्षा आती है, जो प्रधानमंत्री और उनके परिवार के करीबी सदस्यों को दी जाती है। जेड प्लस में सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के आवास और काफिले के लिए बेहतर इंतजाम किए जाते हैं और करीब 50 जवान शिफ्ट में काम करते हैं।
राजधानी में 23 हजार जवान
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय बलों की अब तक की सबसे बड़ी तैनातियों में से एक की गई है। गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर तक दिल्ली पुलिस को सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) की 221 कंपनियां, यानी लगभग 23 हजार जवान उपलब्ध कराए हैं। इस तैनाती के लिए सीआरपीएफ की कंपनियों को जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से बुलाया जा रहा है। ये अतिरिक्त बल विरोध प्रदर्शनों को संभालने, अहम सरकारी इमारतों की सुरक्षा करने और मध्य दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस की मदद करेंगे।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
एक तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास पर अतिरिक्त बल और दूसरी तरफ राजधानी में हजारों केंद्रीय जवानों की मौजूदगी बताती है कि प्रशासन कोई ढील नहीं बरतना चाहता। आने वाले दिनों में नई दिल्ली और खासकर मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर सबकी नजर रहेगी।
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