समलैंगिक विवाह का केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में किया विरोध, कहा- ‘कानून बनाना कोर्ट का काम नहीं’

समलैंगिक विवाह को वैध बनाने के मामले में सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने जवाब दाखिल कर कहा है कि ‘कानून बनाना सरकार का काम है न्यायपालिका का नहीं’. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक विवाह (Legalising Gay Marriage) को कानूनी मान्यता देने का विरोध किया है. केंद्र ने आज फिर से समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी देने का विरोध किया. केंद्र ने कहा कि इससे नागरिकों के हितों पर असर पड़ेगा.

केंद्र ने शीर्ष अदालत में कहा कि संसद को सभी ग्रामीण और शहरी आबादी के व्यापक विचारों और आवाज़ों को ध्यान में रखना होगा.केंद्र ने कहा कि धार्मिक और रीति-रिवाजों में गे मैरिज को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, और जस्टिस एसके कौल, रवींद्र भट, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हा की पांच सदस्यीय संविधान पीठ समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करेगी.

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