नई दिल्ली। सनातन धर्म में पौष मास की पूर्णिमा विशेष महत्व रखती है। यह साल की पहली पूर्णिमा मानी जाती है, जब चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। इस दिन चंद्र देव की पूजा का विशेष लाभ मिलता है, साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।

साल 2026 में पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी को रखा जाएगा। इसी दिन से प्रयागराज में माघ मेले की भी शुरुआत होती है। इस पुण्य तिथि पर स्नान, दान और पूजा-पाठ से जुड़े सरल उपायों से सभी नौ ग्रहों को शांत किया जा सकता है और जीवन की परेशानियाँ कम हो सकती हैं।
रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ
पौष पूर्णिमा के दिन चावल और दूध की खीर बनाकर, शाम को उसे चाँदी की कटोरी में निकालकर चंद्रमा की रोशनी में रखें। रातभर रखने के बाद अगले दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर इसे ग्रहण करें। यह उपाय स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक शांति देता है।
धन की कमी दूर करने का उपाय
प्रातःकाल विष्णु जी और माता लक्ष्मी की पूजा करें और माँ लक्ष्मी के चरणों में 11 कौड़ियाँ अर्पित करें। हर कौड़ी पर हल्दी का तिलक करें और ‘ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः’ मंत्र 11 बार जपें। शाम को इसे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या पैसों वाली जगह पर रखें। इससे घर में माँ लक्ष्मी का वास होता है और धन की कमी दूर होती है।
सुखी जीवन और बिगड़े काम
समस्याओं से घिरे लोगों को पौष पूर्णिमा पर गरीबों को चावल की खीर खिलाना या दान करना चाहिए। इससे पाप नष्ट होते हैं, पुण्य की प्राप्ति होती है और रुके हुए काम बनते हैं।
नवग्रहों की शांति के लिए विशेष दान उपाय
- सूर्य ग्रह: गेहूँ, ताँबे के बर्तन और गुड़ का दान।
- चंद्रमा: दूध, चावल, सफेद वस्त्र और चाँदी का दान।
- मंगल: गुड़, चने की दाल, लाल वस्त्र; हनुमान चालीसा का पाठ।
- बृहस्पति (गुरु): पीली सरसों, केसर, पीला चंदन का दान।
- बुध: हरी सब्जियाँ, हरे कपड़े, मूँग दाल का दान।
- शुक्र: दही, चावल, चीनी, सफेद वस्त्र, इत्र का दान।
- शनि: काले तिल, लोहे के बर्तन, काले वस्त्र; शिव या हनुमान उपासना।
- राहु-केतु: उड़द की दाल, सरसों का तेल, काले तिल; गरीबों को भोजन कराना।
इन उपायों से नवग्रहों की शांति होती है, जीवन में सुख, स्वास्थ्य, धन और सफलता आती है।
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