कार की सेफ्टी का नया पैमाना ‘Banana Test’! सोशल मीडिया ट्रेंड से ऑटो कंपनियों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ा एक अनोखा ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे ‘Banana Test’ नाम दिया गया है। इस ट्रेंड में लोग कार के ऑटोमैटिक टेलगेट या पावर विंडो के बीच एक केला रखकर उसकी सेफ्टी जांचते नजर आ रहे हैं। देखने में भले ही यह मजाकिया लगे, लेकिन इसके पीछे कार की एक बेहद अहम सुरक्षा तकनीक छिपी है। यही वजह है कि अब यह ट्रेंड सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कार कंपनियों की टेंशन भी बढ़ाने लगा है।

क्या है ‘Banana Test’?
Banana Test कोई आधिकारिक क्रैश टेस्ट या सेफ्टी सर्टिफिकेशन नहीं है। दरअसल, यह एक अनौपचारिक तरीका है, जिसके जरिए कार में मौजूद एंटी-पिंच सेफ्टी सिस्टम की सेंसिटिविटी को परखा जाता है। यह फीचर खासतौर पर ऑटोमैटिक टेलगेट और पावर विंडो में दिया जाता है, ताकि बंद होते समय अगर किसी की उंगली, हाथ या कोई वस्तु बीच में आ जाए, तो सिस्टम तुरंत रुक जाए और वापस खुल जाए।

कैसे किया जाता है Banana Test?
इस टेस्ट में इलेक्ट्रिक टेलगेट या पावर विंडो को बंद करते समय उसके बीच एक केला रख दिया जाता है। इसके बाद देखा जाता है कि सिस्टम दबाव पड़ते ही रुकता है या नहीं। अगर टेलगेट या विंडो तुरंत रुककर पीछे की ओर खुल जाती है, तो माना जाता है कि एंटी-पिंच सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है। वहीं, अगर केला पूरी तरह कुचल जाता है, तो यह सिस्टम की कम सेंसिटिविटी की ओर इशारा करता है। केला इसलिए चुना जाता है क्योंकि वह नरम होता है और उंगली जैसी स्थिति को दर्शाता है।

कार कंपनियों के लिए क्यों बना चिंता का कारण?
हर कार ब्रांड में एंटी-पिंच सिस्टम की सेंसिटिविटी अलग-अलग होती है। सोशल मीडिया पर जब दो अलग-अलग कंपनियों की कारों के Banana Test वीडियो सामने आते हैं और एक कार सुरक्षित रुक जाती है, जबकि दूसरी केला कुचल देती है, तो ग्राहकों के मन में सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े हो जाते हैं। कई बार इस ट्रेंड का इस्तेमाल ब्रांड्स को ट्रोल करने और उनके सेफ्टी फीचर्स पर सवाल उठाने के लिए भी किया जा रहा है।

कार ओनर्स के लिए क्यों है जरूरी?
यह फीचर बच्चों और पालतू जानवरों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। गलती से अगर टेलगेट या पावर विंडो बंद होते समय उंगली फंस जाए, तो एंटी-पिंच सिस्टम गंभीर चोट से बचा सकता है। Banana Test भले ही आधिकारिक तरीका न हो, लेकिन यह कार मालिकों को अपने वाहन की सेफ्टी को समझने का एक आसान संकेत जरूर देता है।

क्या निकलता है इस ट्रेंड का मतलब?
यह वायरल ट्रेंड साफ तौर पर दिखाता है कि आज के ग्राहक सिर्फ फीचर्स ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा को भी परख रहे हैं। आने वाले समय में कार कंपनियों पर अपने सेफ्टी सिस्टम को और ज्यादा संवेदनशील और भरोसेमंद बनाने का दबाव बढ़ सकता है।

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