सियासत में कभी हार नहीं देखने वाले महाना बने विधानसभा अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक सतीश महाना निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। कानपुर में जन्में सतीश महाना किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। सतीश महाना कानपुर के ऐसे दूसरे व्यक्ति हैं जो विधानसभा अध्यक्ष बने हैं। सतीश महाना से पहले कानपुर के हरिकिशन श्रीवास्तव भी 1990 से 1991 तक विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं।

राजनीतिक जीवन में कभी हार का मुंह नहीं देखने वाले आठ बार के विधायक व पूर्व मंत्री सतीश महाना के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने से सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक खुशी जाहिर की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने नवनिर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष की शुभकामनाएं ही नहीं दीं बल्कि उनकी सराहना भी की।

सतीश महाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक ऐसे चेहरा रहे हैं जो कभी चुनाव हारे नहीं। उन्होंने हार का स्वाद कभी नहीं चखा। 1991 से वह लगातार विधायक बन रहे हैं। महाना को पांच बार कानपुर की कैंट सीट से जनता से जीत का उपहार दिया। उसके बाद वह महाराजपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े। वहां भी जीत मिली। इस चुनाव में भी वह शहर की महाराजपुर विधानसभा सीट से विधायक बनकर सदन पहुंचे हैं।

सतीश महाना योगी की पहली सरकार में औद्योगिक विकास मंत्री थे। इस बार भी उनका मंत्री बनाया जाना लगभग तय माना जा रहा था। योगी मंत्रिमण्डल में तो उन्हें जगह नहीं मिली। संगठन ने उनका नाम विधानसभा अध्यक्ष के लिए तय किया। 28 मार्च को उन्होंने नामांकन किया। 29 को वह निर्विरोध निर्वाचित हुए। कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच उनकी लोकप्रियता उनके लगातार चुनाव जीत से साबित होता है। योगी सरकार-1 में भी उनका प्रदर्शन बेहतर रहा है। औद्योगिक विकास मंत्री के रूप में उनके कार्य की सराहना खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की है। उन्होंने भरोसा जताया है महाना के अध्यक्ष रहते उप्र विधान नये कीर्तिमान स्थापित करेगी।

भाजपा को ऐसा नेता चाहिए जो एक ताकतवर विपक्ष को संभाल सके। कहीं ऐसा न हो कि सदन में कोई असहज स्थिति पैदा हो तो सभी हाथ खड़ा कर लें। भाजपा के पास दो ही नेता इतना अनुभवी थे। एक सतीश महाना और दूसरे सुरेश खन्ना। खन्ना का उपयोग कहीं और किया जाना था। इसलिए उन्हें मंत्री बनाया गया। महाना आठ बार के विधायक हैं।

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विधानसभा की कार्यवाही से लेकर परम्पराओं तक का उन्हें अच्छा ज्ञान है। उनकी बात को विपक्ष के लोग भी गंभीरता से ही लेंगे। सभी दल के नेता उनका सम्मान करते हैं। उनके अनुभव और ज्ञान का 18वीं विधानसभा को भरपूर लाभ मिलेगा।

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