
पटना। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज अब बिहार की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपना विस्तार करने की तैयारी में जुट गई है। पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जिस अंदाज में शानदार जीत दर्ज की, उसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व का मनोबल कई गुना बढ़ गया है।
इसी जीत को आधार बनाकर अब पार्टी नेतृत्व अपने संगठन को बिहार से बाहर ले जाने की रणनीति पर काम कर रहा है, और दिल्ली को इस विस्तार अभियान के पहले बड़े केंद्र के रूप में चुना गया है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि, जन सुराज पार्टी आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमा सकती है।
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दिल्ली के चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति
एक अख़बार में सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि, प्रशांत किशोर रविवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचकर जन सुराज पार्टी के समर्थकों से रूबरू होंगे। इस मुलाकात को लेकर पार्टी के भीतर खासी हलचल है, क्योंकि माना जा रहा है कि, इसी दौरान दिल्ली इकाई के लिए एक संचालन समिति, यानी स्टीयरिंग कमेटी के गठन की औपचारिक घोषणा भी की जा सकती है।

यह प्रस्तावित समिति दिल्ली में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज की निगरानी करेगी और साथ ही राजधानी में जन सुराज की एक विधिवत इकाई खड़ी करने में अहम भूमिका निभाएगी। यह कदम पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत बिहार में मिली पहचान को अन्य राज्यों तक फैलाने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली में खुलेगा कार्यालय
रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि, पार्टी ने दिल्ली में अपने कार्यालय के लिए जगह तलाशना भी शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि इसके लिए कुछ संभावित स्थानों को पहले ही शॉर्टलिस्ट किया जा चुका है।
गौरतलब है कि, यह सारी गतिविधियां पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मिली बड़ी जीत के महज दो महीने के भीतर शुरू हो गई हैं। यानी चुनावी सफलता का सिलसिला थमने से पहले ही जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने संगठन का दायरा बढ़ाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, यह तेजी दिखाती है कि पार्टी अपनी बिहार वाली सफलता को जल्द से जल्द भुनाना चाहती है, इससे पहले कि इसका राजनीतिक असर कम हो।
जल्द हो सकता है स्टीयरिंग कमेटी का ऐलान
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि, प्रशांत किशोर बिहार के बाहर सबसे पहले दिल्ली में ही अपने संगठन की नींव मजबूत करना चाहते हैं। यही वजह है कि, उन्होंने इसे पार्टी विस्तार के पहले पड़ाव के रूप में चुना है। सूत्रों का कहना है कि, 49 वर्षीय प्रशांत किशोर 27 सितंबर को दिल्ली में जेएसपी समर्थकों के साथ एक अहम बैठक करने वाले हैं।
इस बैठक में राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी की गतिविधियों को संभालने के लिए एक संचालन समिति के गठन की घोषणा की जा सकती है। यह समिति आने वाले समय में दिल्ली में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और चुनावी तैयारियों की दिशा तय करने का काम करेगी।
बिहार चुनाव में नहीं खुला था खाता
गौरतलब है कि, चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2024 को जन सुराज पार्टी की औपचारिक स्थापना की थी। इसके बाद नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने बड़े पैमाने पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे। राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों में से जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे।
हालांकि, नतीजे पार्टी के लिए बेहद निराशाजनक रहे और उसे एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और कुल 202 सीटें अपने नाम कीं। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 35 सीटों से संतोष करना पड़ा।
बांकीपुर उपचुनाव में जीत से बढ़ा आत्मविश्वास
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी और प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे, लेकिन इसी साल अगस्त में हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी डेब्यू में ही शानदार वापसी करते हुए सभी को चौंका दिया।
यह सीट राजनीतिक रूप से काफी हाई-प्रोफाइल मानी जाती है और यहां उपचुनाव कराने की नौबत इसलिए आई थी क्योंकि इस सीट से लगातार पांच बार विधायक रह चुके नितिन नवीन ने भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद और राज्यसभा सदस्य चुने जाने के चलते अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। इस खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत को राजनीतिक जानकार उनके और उनकी पार्टी के लिए एक बड़े मनोबल बूस्टर के तौर पर देख रहे हैं।
पूर्वांचली वोटरों पर रहेगी खास नजर
पार्टी से जुड़े एक सूत्र ने जानकारी दी है कि, जन सुराज पार्टी अब दिल्ली में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में सक्रियता से काम कर रही है। इस रणनीति के तहत पार्टी की खास नजर दिल्ली की बड़ी पूर्वांचली आबादी पर है। राजधानी में पूर्वांचल मूल के मतदाताओं की तादाद काफी बड़ी मानी जाती है, और कई सीटों पर इनका प्रभाव निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में जन सुराज पार्टी बिहार से जुड़ी अपनी पहचान का इस्तेमाल करते हुए इस वोट बैंक में सेंध लगाने की योजना बना रही है। यही वजह है कि पार्टी की रणनीति में पूर्वांचली मतदाताओं के बीच पैठ बनाना एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
बीजेपी, कांग्रेस और आप के लिए बढ़ सकती हैं चुनौतियां
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, अगर जन सुराज पार्टी वाकई दिल्ली के चुनावी मैदान में उतरती है, तो इसका सीधा असर राजधानी की मौजूदा राजनीतिक तिकड़ी, यानी भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के समीकरणों पर पड़ सकता है। खासतौर पर पूर्वांचली मतदाताओं को लेकर तीनों ही प्रमुख दल पहले से सक्रिय रणनीति अपनाते रहे हैं, ऐसे में एक नए राजनीतिक खिलाड़ी की एंट्री इस वोट बैंक में विभाजन ला सकती है।
हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार में मिली सीमित सफलता के बावजूद प्रशांत किशोर की पार्टी दिल्ली जैसे बड़े और प्रतिस्पर्धी राजनीतिक मैदान में किस तरह अपनी जगह बना पाती है। फिलहाल सभी की निगाहें 27 सितंबर को होने वाली उस अहम बैठक पर टिकी हैं, जिसमें पार्टी अपनी दिल्ली रणनीति को औपचारिक रूप देने की तैयारी में है।
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