
छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने के लिए सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं और नक्सलियों का समूल नाश करने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में बीजापुर जिले में भी सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियान चलाया और आठ लाख के इनामी बदमाश को मौत के घाट उतार दिया।
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31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त होगा छत्तीसगढ़

उल्लेखनीय है कि, केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक जिले को नक्सल मुक्त करने लक्ष्य तय किया है। ये कार्रवाई ‘नक्सल-मुक्त भारत’ नीति के तहत ही की जा रही है। आज सुबह बीजापुर जिले के पेद्दागेलूर या चिन्नगेलूर जंगल इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें नक्सली कमांडर उधम सिंह मारा गया। यह घटना जहां नक्सलियों के लिए एक बड़ा झटका है, वहीं इलाके में शांति बहाल करने की दिशा में एक मजबूत कदम।
मुखबिर की सूचना पर चला ऑपरेशन
जानकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को गुप्त सूचना मिली थी कि, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पेद्दागेलूर इलाके में नक्सलियों का एक बड़ा समूह छिपा हुआ है और शायद किसी बड़े हमले की योजना बना रहा है। इस जानकारी के आधार पर, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और CRPF की कोबरा बटालियन के जवानों ने मिलकर एक ऑपरेशन शुरू किया। सुबह करीब 7:30 बजे से जंगलों में रुक-रुक कर फायरिंग शुरू हुई और कई घंटों तक चलती रही।
सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया, जिससे नक्सलियों को पीछे हटने का कोई मौका नहीं मिला। घने जंगल और पहाड़ी इलाके के कारण ऑपरेशन बहुत चुनौतीपूर्ण था। घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियां और मुश्किल रास्ते जवानों की मुश्किल बढ़ा रहे थे, लेकिन नक्सली सुरक्षा बलों की रणनीतिक तैयारी और सतर्कता का सामना नहीं कर पाए। मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से जोरदार फायरिंग हुई, लेकिन सुरक्षा बलों की बेहतर स्थिति और मारक क्षमता ने नक्सलियों को भारी नुकसान पहुंचाया।
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सुरक्षाबलों की रडार पर था उधम सिंह
बताया जा रहा है कि, उधम सिंह लंबे समय से सुरक्षाबलों की रडार पर था। छत्तीसगढ़ सरकार ने उसे पकड़ने पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। वह पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) का एक प्रमुख सदस्य था और उसे जगरगुंडा एरिया कमेटी और लाटुन नंबर 30 का कमांडर माना जाता था। उधम सिंह कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल था।

बीजापुर के टेकुलगुडेम इलाके में 2021 में हुए हमले के सिलसिले में उसका नाम प्रमुखता से सामने आया था, जिसमें 22 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। उसे उस हमले का मास्टरमाइंड माना जाता था। वह कई IED धमाकों, पुलिस स्टेशनों पर हमलों और दूसरी हिंसक गतिविधियों में भी शामिल था। उसकी मौत से नक्सली संगठन के कमांड स्ट्रक्चर में बड़ी गड़बड़ी हुई है। घटनास्थल से बरामद शव और दूसरे सुरागों से उसकी पहचान की पुष्टि हो गई है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। घटनास्थल से हथियार और दूसरा सामान बरामद किया गया है।
बड़े हमले की तैयारी में थे नक्सली
मुठभेड़ स्थल से एक ऑटोमेटिक AK-47 राइफल बरामद की गई, जो नक्सलियों के प्रमुख हथियारों में से एक है। इसके अलावा भारी मात्रा में गोला-बारूद, अन्य हथियार और नक्सली सामग्री भी जब्त की गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि नक्सली दस्ता किसी बड़ी साजिश या हमले की तैयारी में था। बरामद हथियारों से नक्सलियों की सैन्य क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन सुरक्षाबलों की कार्रवाई ने उनकी योजना को नाकाम कर दिया।
सर्च ऑपरेशन जारी
मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि, कुछ नक्सली जंगल की घनी आड़ में भाग निकले होंगे। डीआरजी और कोबरा के जवान पूरे क्षेत्र में छापेमारी कर रहे हैं। पेद्दागेलूर और आसपास के गांवों में हाई अलर्ट जारी है। अधिकारियों का कहना है कि, ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही पूरी जानकारी और आंकड़े साझा किए जाएंगे। फिलहाल किसी भी जवान के हताहत होने की खबर नहीं है।
तेज हुआ नक्सल विरोधी अभियान
बता दें कि, छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में नक्सल विरोधी अभियान तेज हुआ है। 2025-2026 में कई बड़े एनकाउंटर हुए, जिसमें दर्जनों नक्सली मारे गए और कई सरेंडर कर चुके हैं। बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर जैसे जिले नक्सलवाद के गढ़ माने जाते हैं, लेकिन सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से उनका प्रभाव कम हो रहा है। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य बल संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। उधम सिंह जैसे कमांडरों का खात्मा नक्सली संगठन की कमर तोड़ने वाला कदम है। इससे स्थानीय ग्रामीणों में भय का माहौल कम होगा और विकास कार्य तेज हो सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि जल्द ही इन इलाकों में शांति स्थापित हो और लोग सामान्य जीवन जी सकें।
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