
बॉलीवुड को सत्या, शूल, राजनीति, गैंग्स ऑफ वासेपुर, स्पेशल 26, सत्यमेव जयते जैसी फिल्में और फैमिली मैन जैसी वेबसीरिज देने वाले अभिनेता मनोज बाजपेयी की अगली फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ रिलीज से पहले ही बड़े विवादों में घिर गई है। इस क्राइम थ्रिलर फिल्म को ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम किया जाना है। विवाद फिल्म की कहानी को लेकर नहीं बल्कि इसके टाइटल को लेकर है। आरोप है कि फिल्म का टाइटल ब्रह्मणों की भावनाओं को आहत करने वाला है।
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सड़क से लेकर अदालत तक विरोध
बता दें कि, मंगलवार तीन फरवरी को फिल्म का टीजर जारी किया गया था। इसे देखने के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़क और अदालत तक विरोध की लहर फैल गई है। कई संगठनों, वकीलों और आम लोगों ने फिल्म के नाम को ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक और जातिवादी बताया है। इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर कर दी गई। वहीं, विभिन्न शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं।
लोग फिल्म का टाइटल बदलने की मांग कर रहे हैं। साथ ही नेटफ्लिक्स का बायकॉट करने बात कर रहे हैं। ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया है। जयपुर में सर्व ब्राह्मण महासभा ने फिल्म के शीर्षक को जातिवादी मानसिकता का उदाहरण बताया। उज्जैन में अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने मेकर्स के चेहरे पर कालिख पोतने की धमकी दी। भोपाल, प्रयागराज और अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए, जहां लोग एफआईआर दर्ज करने और फिल्म पर बैन की मांग कर रहे हैं।
संतों ने भी जताई आपत्ति
अयोध्या और बनारस के संतों ने भी इसे ब्राह्मण समाज का अपमान करार दिया। फिल्म के टाइटल को लेकर विरोध इतना तेज हो गया है कि कई जगहों पर तनावपूर्ण माहौल बन गया है। कानूनी स्तर पर मामला और गंभीर हो गया है। दिल्ली हाईकोर्ट में वकील विनीत जिंदल ने याचिका दायर और खुद को जनहितैषी नागरिक बताते हुए फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। याचिका में आरोप है कि टाइटल और प्रचार सामग्री ‘पंडित’ को भ्रष्टाचार से जोड़कर ब्राह्मण समुदाय की गरिमा को नुकसान पहुंचा रही है। यह कंटेंट सांप्रदायिक रूप से आपत्तिजनक, मानहानिकारक और हेट स्पीच जैसा है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इससे सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है।
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उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का हवाला दिया। केंद्र सरकार को मुख्य पक्षकार बनाया गया है, क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट कंट्रोल सरकार का कर्तव्य है। इसके अलावा, मुंबई के वकील अशुतोष दुबे ने नेटफ्लिक्स और मेकर्स को लीगल नोटिस भेजा, जिसमें टाइटल को तुरंत हटाने की मांग की गई। नोटिस में कहा गया कि ‘पंडित’ शब्द भारतीय सभ्यता में विद्वता, आध्यात्मिकता और नैतिकता से जुड़ा है, लेकिन इसे अपराध से जोड़ना सामूहिक स्टिरियोटाइपिंग है।
तेज हुई बहस
यह मामला न केवल सिनेमा की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक संवेदनशीलता का है, बल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट रेगुलेशन की बहस को भी तेज कर रहा है। फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं। वे दिल्ली पुलिस के एक सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित का किरदार निभा रहे हैं, जिन्हें ‘पंडित’ के नाम से जाना जाता है। कहानी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की है, जो 20 साल से उसी रैंक पर अटका हुआ है। उसकी वर्दी पर कई दाग हैं और वह बदनाम है। फिल्म में भ्रष्टाचार, पावर और नैतिकता जैसे मुद्दों को उठाया गया है। निर्देशक रितेश शाह हैं, जबकि नीरज पांडे ने इसे प्रेजेंट किया है।
इन कलाकारों ने निभाई है अहम भूमिका
अन्य कलाकारों में नुशरत भरुचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय और दिव्या दत्ता शामिल हैं। नेटफ्लिक्स ने हाल ही में एक इवेंट में इसका टीजर रिलीज किया, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया। फिल्म की रिलीज डेट अभी स्पष्ट रूप से घोषित नहीं हुई है, लेकिन यह नेटफ्लिक्स पर जल्द ही स्ट्रीम होने वाली है।
Hello @NetflixIndia, normalisation of hatred against Pandits & Brahmins won’t be tolerated. I’ll see you in Court.
CC: @MIB_India @GoI_MeitY pic.twitter.com/TKUnjweViE
— Shashank Shekhar Jha (@shashank_ssj) February 3, 2026
विवाद का मुख्य केंद्र फिल्म का टाइटल ‘घूसखोर पंडित’ है। विरोधियों का कहना है कि ‘पंडित’ शब्द, जो ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा एक सम्मानजनक धार्मिक और सामाजिक पदनाम है, उसे जानबूझकर घूसखोरी और भ्रष्टाचार से जोड़ा गया है। इससे पूरे ब्राह्मण समुदाय की छवि खराब होती है और सामूहिक मानहानि होती है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे जातिवादी बताया और पूछा कि क्या इसी तरह ‘घूसखोर दलित’ या ‘घूसखोर मुस्लिम’ टाइटल रखा जा सकता है?
“Ghooskhor Pandat” isn’t accidental. If corruption was the point, the title could have been Officer, Babu, or Netaji. But Bollywood’s old habit remains. Demonise Brahmins and dress it up as “art.”@NetflixIndia, you know exactly what you are doing, and this won’t be tolerated… pic.twitter.com/JdKNVWMoeI
— Hindu Network Foundation (@hindufund_) February 4, 2026
मेकर्स की तरफ से नहीं आया बयान
क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किसी समुदाय की निंदा के लिए नहीं किया जा सकता। यह विवाद बॉलीवुड और ओटीटी कंटेंट में बार-बार उठने वाली बहस को दोहराता है, जहां संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनती हैं, लेकिन टाइटल या कंटेंट से समुदाय आहत हो जाते हैं। पहले भी ‘महाराज’ जैसी फिल्मों पर इसी तरह विरोध हुआ था। फिलहाल नेटफ्लिक्स या मेकर्स की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यदि अदालत रोक लगाती है, तो फिल्म की रिलीज प्रभावित हो सकती है। यह मामला न केवल मनोज बाजपेयी की फिल्म के लिए, बल्कि पूरे इंडस्ट्री के लिए एक सबक है कि कंटेंट क्रिएशन में सामाजिक संवेदनशीलता कितनी जरूरी है।
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